मुर्शिदाबाद की स्थापना एक हिंदू ब्राह्मण बाद में मुसलमान बने मुर्शिद कुली खान ने की थी

Edited by Rajneesh Anand
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मुर्शिदाबाद से मुगलों को जाता था करोड़ों रुपया

Murshidabad Violence : वक्फ अधिनियम को लेकर कुछ दिनों पहले तक बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला हिंसा की आग में जल रहा था. एक पिता-पुत्र की हत्या घर से निकालकर कर दी गई, अभी भी दोनों समुदाय एक दूसरे को शक की नजर से देख रहे हैं और राजनीति जारी है. मुर्शिदाबाद जो कभी हिंदू-मुसलमान सहजीवन का आदर्श था और जिसने अपनी नीतियों की वजह से बंगाल की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया था, वो आज बदहाल हो चुका है.

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Murshidabad Violence : जन्म से एक हिंदू ब्राह्मण ने बंगाल के मुर्शिदाबाद की स्थापना की थी. हालांकि उस व्यक्ति का पालन-पोषण एक मुस्लिम ने किया था, इसलिए उनसे इस्लाम स्वीकार कर लिया था. मुर्शिदाबाद जिला मुगलों के समय उनकी आय का बड़ा स्रोत था, यहां से मलमल और मसाले का व्यापार होता था और इस काम में हिंदू और मुसलमान दोनों साथ जुटे थे. मुर्शिदाबाद में हिंदू-मुसलमान के बीच सहजीवन था और त्योहारों पर खुशियां मनाई जाती थी. आज उसी मुर्शिदाबाद में हिंदू और मुसलमान आमने-सामने हैं.

मुहम्मद अजीज उद्दीन बंगाल का सूबेदार था, बंगाल था खस्ताहाल

औरंगजेब ने अपने पोते मुहम्मद अजीज उद्दीन जिसे अजीम-उश-शान भी कहा जाता है, उसे बंगाल का सूबेदार बनाया था. वह 1697 में यहां आया था और काम देख रहा था. लेकिन औरंगजेब ने जिस उम्मीद से उसे यहां भेजा था, वह पूरा नहीं हो पा रहा था तब औरंगजेब ने राजस्व वृद्धि के लिए मुर्शिद कुली खान को बंगाल भेजा. औरंगजेब को यह उम्मीद थी कि मुर्शिद कुली खान मुगलों की खस्ता होती स्थिति को सुधारेगा और राजस्व में वृद्धि करेगा.

मुर्शिद कुली खान और मुहम्मद अजीज उद्दीन में नहीं बनी

मुर्शिद कुली खान जब बंगाल आया उस वक्त ढाका बंगाल की राजधानी थी. औरंगजेब ने उसे 1700 में बंगाल भेजा. बंगाल आने के बाद उसने पूरे सूबे के राजस्व को करोड़ों में पहुंचा दिया, जो मुगलों की टूटती हिम्मत को सहारा था. प्रसिद्ध इतिहासकर जदुनाथ सरकार ने History-Of-Bengal–Vol-2 में लिखा है कि मुर्शिद कुली खान जन्म से ब्राह्मण था, लेकिन उसे बचपन में ही हाजी शफी को बेच दिया गया था और उसने मुर्शिद कुली खान को मुसलमान बनाया और उसकी परवरिश की. मुर्शिद का नाम मुहम्मद हादी था. मुर्शिद कुली खान की उसे उपाधि दी गई थी. जदुनाथ सरकार लिखते हैं कि जब मुहम्मद हादी दीवान के रूप में बंगाल आया था, तो उसके अधिकार स्पष्ट नहीं थे, लेकिन उसने अपनी नीतियों से बंगाल की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया और करोड़ों का राजस्व दिल्ली को भेजने लगा. औरंगजेब उसपर बहुत भरोसा भी करता था और उसे काम करने की पूरी आजादी दे रखी थी. बंगाल में पहले जागीर थे और उनके अधीन कर वसूली की व्यवस्था थी. इससे सरकार के खजाने में ज्यादा कुछ आता नहीं था. मुर्शिद कुली खान ने जागीरों को राज्य के खजाने में मिला दिया, जिससे राजस्व बढ़ गया. उसने राजस्व वसूली का काम ठेके पर देना शुरू किया जिसका बहुत लाभ मिला. मुर्शिद कुली खान स्वतंत्र काम कर रहा था जो अजीम उश शान को पसंद नहीं था, वह चाहता था दीवान मुर्शिद उसके अधीन काम करे. दोनों के बीच अनबन की यह बड़ी वजह बना.

मुर्शिद कुली खान ने बसाया मुर्शिदाबाद

मुर्शिद कुली खान औरंगजेब के प्रति समर्पित था, उसके प्रति निष्ठा दिखाने के लिए वह हमेशा तत्पर रहता था. दीवान मुर्शिद, सूबेदार अजीम से अधिक प्रतिभावान था, इस वजह से दोनों के बीच बन नहीं रही थी और सत्ता को नुकसान हो रहा था. अजीम उश शान से दूरी बनाने के लिए मुर्शिद कुली खान ने भागीरथी नदी के किनारे मुर्शिदाबाद को बसाया. मुर्शिदाबाद के जरिए व्यापार बहुत सहज हो गया और विदेश से व्यापार होने लगा. उस वक्त शासन में मुसलमान थे, लेकिन व्यापार करने वालों में हिंदू अधिक थे. मुर्शिदाबाद की जनसंख्या भी हिंदू बहुल थी, इस वजह से यहां हिंदू-मुस्लिम एकता दिखी और वे साथ रहते थे. भागीरथी नदी बंगाल के कई हिस्सों को जोड़ती थी इसलिए राजस्व वसूली और प्रशासन में काफी मदद मिली. नदी किनारे होने की वजह से सुरक्षा की दृष्टि से भी यह नगर काफी सुरक्षित था. मुर्शिद कुली खान ने यहां कटरा मस्जिद बनवाया था.

मुर्शिदाबाद में अब मुसलमानों की संख्या अधिक

स्थापना के वक्त मुर्शिदाबाद नगर में मुसलमानों की संख्या कम थी, जबकि हिंदू बहुसंख्यक थे. लेकिन 2011 की जनगणना के अनुसार मुर्शिदाबाद में मुसलमान 66.27% है, जबकि हिंदू 33.21% हैं. वक्फ अधिनियम के अस्तित्व में आते ही यहां दंगा भड़का और हिंदू और मुसलमान आमने-सामने आ गए. हिंसा की आग में पिता-पुत्र सहित तीन लोगों की मौत हुई है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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