कहां है मुगलों की शान तख्त ए ताऊस, जिसको बनाने में लगा था 1150 किलो सोना, कोहिनूर और दरिया ए नूर हीरा

Published by :Rajneesh Anand
Published at :25 Nov 2025 12:51 PM (IST)
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takht e taus

तख्त ए ताऊस, एआई इमेज

Mughal Empire : तख्त ए ताऊस (takht e taus), मुगलों का राजसिंहासन था. यह सिंहासन पूरी तरह सोने से बना था और इतिहासकार यह बताते हैं कि इसमें 1150 किलो सोना लगा था. हीरे, जवाहारात, कोहिनूर और दरिया ए नूर जैसे हीरे इसकी शोभा थे. पांचवें मुगल शासक शाहजहां, जिसने ताजमहल का निर्माण कराया था, उसी ने इस तख्त ए ताऊस का निर्माण भी कराया था. तख्त ए ताऊस यानी मोर सिंहासन मुगलों की शान का प्रतीक था, लेकिन जब उनकी शान नहीं रही, तो ईरान के शाह नादिर शाह ने इसे लूट लिया और अपने साथ ईरान लेकर गया.

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Mughal Empire : मुगल साम्राज्य विश्व इतिहास का ऐसा साम्राज्य है जिसे बहुत ही वैभवशाली और शक्तिशाली माना जाता है. 300 वर्षों से अधिक समय तक इस साम्राज्य का सिक्का बुलंद रहा. इस साम्राज्य के शासकों ने भारत को एक केंद्रीय सत्ता के अधीन लाया और यहां एक समृद्ध संस्कृति और कला का विकास किया. मुगल साम्राज्य विश्व के सबसे अमीर राजवंशों में से एक था, लेकिन औरंगजेब के बाद इस साम्राज्य के शासक कमजोर होने लगे और बाहरी आक्रमण बढ़ने लगा. 1739 में ईरान के राजा नादिर शाह ने दिल्ली पर हमला किया और यहां कत्लेआम मचा दिया. उसने मुगलों के खजाने को लूटा और सबसे अहम बात यह है कि उसने मुगल सत्ता की शान तख्त- ए- ताऊस को भी लूट लिया और अपने साथ ले गया.

क्या था तख्त ए ताऊस, जिसपर जड़ा था कोहिनूर हीरा?

तख्त ए ताऊस मुगलों का राज सिंहासन था, जिसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने करवाया था. तख्त ए ताऊस के बारे में यह कहा जाता है कि यह पूरी तरह सोने से बना सिंहासन था. लगभग 1150 किलो सोने का उपयोग इस सिंहासन को बनाने में किया गया था. इस सिंहासन के बारे में यह कहा जाता है कि इसपर हीरे-जवाहरात जड़े थे. इस सिंहासन के ऊपर दो मोर बने थे.अरबी में ताऊस का अर्थ मोर होता है, इसलिए इस सिंहासन का नाम तख्त ए ताऊस पड़ा. इसे हिंदी में मयूर सिंहासन कहा जाता है. टैवर्नियर जो एक फ्रांसिसी व्यापारी था उसने इस बात का जिक्र किया है कि तख्त ए ताऊस में एक 80-90 कैरेट का हीरा जड़ा था, जिसे कोहिनूर माना जाता है. इसकी वजह यह है कि मुगलों के पास उस वक्त कोहिनूर हीरा था. हालांकि टैवर्नियर ने उसके नाम का जिक्र नहीं किया है.

तख्त ए ताऊस क्यों था इतना खास?

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मुगलों का राजसिंहासन तख्त ए ताऊस, मयूर सिंहासन, एक्स से ली गई तस्वीर

तख्त ए ताऊस के बारे में जानकारी देते हुए शाहजहां के दरबारी इतिहासकार अब्दुल हमीद लाहोरी इसे वैभव का प्रतीक बताते हैं. वे लिखते हैं कि सिंहासन लगभग छह फीट लंबा और चार फीट चौड़ा है. यह लगभग छब्बीस इंच ऊंचे चार फीट के खंभों पर टिका है. यह खंभे सोने के बने हैं जिसपर रूबी, पन्ना और हीरे जड़े हैं. सिंहासन के किनारे पर मोतियों से सजावट की गई है. छत पर भी बेहतरीन कारीगरी की गई है, इसमें मीनाकारी की गई है, जो इसकी खूबसूरती को चार चांद लगाता है. सिंहासन के ऊपर हिस्से में दो नाचते मोर की मूर्तियां हैं जिन पर हीरे और दूसरे गहने जड़े थे. हर मोर की पूंछ फैली हुई थी, जो नीलम, पन्ना और दूसरे कीमती पत्थरों से बनी थी. मोरों के बीच लगभग 80 से 90 कैरेट का हीरा लटका हुआ था, जिसकी चमक बहुत ज्यादा थी. तख्त ए ताऊस पर कोहिनूर हीरा और दरिया ए नूर हीरा भी लगा था. दरिया ए नूर तराशे गए हीरों में विश्व का सबसे बड़ा हीरा है. तख्त ए ताऊस की इन खासियतों से यह साफ जाहिर है कि यह तख्त कितना महंगा होगा. इस तख्त को बनाने में कुल सात साल लग गए थे.

क्रमांकविशेषताविवरण
1निर्माता और कालशाहजहां के आदेश पर बनवाया गया (1635–1648 के बीच)
2शैलीमुगल–फारसी कला का सर्वोत्तम उदाहरण
3सामग्रीशुद्ध सोना, जवाहरात, मोती और कीमती पत्थर
4अनुमानित लागतलगभग 10 मिलियन रुपये (टैवर्नियर के अनुसार) — उस समय पूरी मलिकाना बजट के बराबर
5आकारकरीब 6 फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा (Tavernier के वर्णन के अनुसार)
6स्तंभों की संख्या12 सोने के स्तंभ, जिनमें रत्न जड़े थे
7मोर का आकारसिंहासन के पीछे रत्नों से बना मोर
8उपयोग किए गए रत्नहीरे, पन्ने, माणिक, मोती, नीलम, रूबी
9विशेष रत्नबड़े आकार के दुर्लभ हीरे — जिनमें से माना जाता है कि कोहिनूर और दरिया-ए-नूर भी शामिल थे
10आलंकारिक आकृतिशाही तोता जिसमें एक रूबी लगी थी
तख्त ए ताऊस की खूबियां

नादिर शाह कब तख्त ए ताऊस को अपने साथ ले गया?

ईरान के शाह नादिर शाह ने 1739 में दिल्ली पर हमला किया, चूंकि उस वक्त मुगल शासन कमजोर हो चुका था और करनाल के युद्ध में मुगलों ने नादिर शाह के सामने हथियार डाल दिए थे, इसलिए दिल्ली में नादिर शाह का एक तरह से मजबूरी वश स्वागत हुआ. यह स्वागत मित्रता की नहीं थी बल्कि मजबूरी की थी. इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने अपनी किताब Nadir Shah In India में लिखा है कि मुगल शासक मुहम्मद शाह रंगीला बहुत ही कमजोर बादशाह था, उसने नादिर शाह का मुकाबला नहीं किया, बल्कि उसके सामने हथियार डालकर उसका स्वागत किया. नादिर शाह ने उसके ताज को बनाए रखने की बात की और समझौते की बात हुई, जिसकी वजह से मुहम्मद शाह रंगीला ने उसके सामने दिल्ली का खजाना खोल दिया था. उसी वक्त दिल्ली में नादिर शाह की धोखे से हत्या की अफवाह फैली, बस क्या था फिर नादिर शाह ने दिल्ली में कत्लेआम मचवा दिया और खजाने को लूट लिया. उस वक्त दिल्ली का खजाना विश्व के सबसे कीमती खजानों में से एक था. उसने दिल्ली का बेशकीमती खजाना तो लूटा ही तख्त ए ताऊस को भी अपने साथ ले गया. नादिर शाह ने दिल्ली में लगभग 30 -50 हजार लोगों का कत्लेआम एक दिन में कराया था, जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों शामिल थे.नादिर शाह ने भारत से करोड़ों की संपत्ति लूटी और उसे अपने साथ लेकर गया. तख्त ए ताऊस अलग से ही करोड़ों की संपत्ति था. इसके अलावा नादिर शाह अपने साथ कई भारतीय कारीगरों और मिस्त्रियों को भी लेकर गया, ताकि वह ईरान में दिल्ली जैसी कलाकृतियां बनवा सके.

तख्त ए ताऊस का क्या हुआ?

नादिर शाह, तख्त ए ताऊस को अपनी जीत के प्रतीक के रूप में भारत से ईरान लेकर गया. इतिहासकार लिखते हैं कि वह भारत से इतनी अधिक संपत्ति लूटकर गया था कि उसने दो-तीन वर्षों तक अपनी प्रजा पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाया. इतिहासकाकर किशोरी शरण लाल और जदुनाथ सरकार सहित अन्य इतिहासकार भी यह मानते हैं कि नादिर शाह तख्त ए ताऊस को अपने साथ ईरान लेकर गया. ईरान में उसने तख्त एक ताऊस को अपनी जीत के प्रतीक के रूप में रखा, फिर उससे कोहिनूर और दरिया ए नूर को निकाल लिया. बाद में संभवत: तख्त ए ताऊस को तोड़ दिया गया, क्योंकि इसके मूल स्वरूप में पाए जाने की कोई जानकारी नहीं मिलती है. वर्तमान दौर की बात करें, तो तख्त ए ताऊस का कोई प्रमाण नहीं मिलता है जिससे यह बात साफ होती है कि संभवत: इसे तोड़कर बर्बाद कर दिया गया. हां इसके दोनों बड़े हीरे अभी भी मौजूद हैं, कोहिनूर हीरा इंग्लैंड की महारानी के मुकुट पर जड़ा है और दरिया ए नूर ईरान के एक म्यूजियम में मौजूद है.

तख्त ए ताऊस क्या है?

तख्त ए ताऊस मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा बनवाया हुआ राज सिंहासन था.

तख्त ए ताऊस अभी कहां है?

तख्त ए ताऊस अभी कहां है, इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिलते हैं. संभवत: तख्त ए ताऊस को नष्ट कर दिया गया था.

तख्त ए ताऊस को बनाने वाला कौन था?

तख्त ए ताऊस को किस कारीगर या उसकी टीम ने बनाया था, इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी किसी समकालीन इतिहासकार ने नहीं दी है.

तख्त ए ताऊस को किसने बनवाया था?

तख्त ए ताऊस को मुगल बादशाह शाहजहां ने बनवाया था.

जब नादिर शाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया था, उस वक्त दिल्ली पर किसका शासन था?

मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला के समय नादिर शाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया था.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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