Patna Manhole Cleaning: एएन कॉलेज वाले हादसे से भी नहीं लिया सबक! बिना Safety Kit मैनहोल में उतरे सफाईकर्मी

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Patna Manhole Cleaning: राजधानी में एएन कॉलेज के पास मैनहोल की सफाई के दौरान मजदूर की मौत के महज दस दिन बाद फिर नियमों को ताक पर रख दिया गया है. राजीव नगर में बिना पीपीई किट और सुरक्षा मानकों के मजदूरों को गहरे गटर में उतारा गया. मशीनों से शत-प्रतिशत सफाई के दावे जमीनी हकीकत के आगे पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं.

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Patna Manhole Cleaning: राजधानी में मानसून पूर्व जलनिकासी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी पूरी हो गयी है. मैनहोल की उड़ाही व मॉपअप राउंड भी 15 जून तक लगभग पूरा कर लिया गया है. इस बीच सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिए जा रहे हैं. बीते सोमवार को ही एएन कॉलेज स्थित पानी टंकी के पास नमामि गंगे के मैनहोल की सफाई के दौरान दम घुटने से एक मजदूर की मौत हो गई थी.

इस हादसे को अभी दस दिन भी नहीं बीते हैं कि शहर में फिर से जान जोखिम में डालकर मैनुअल सफाई शुरू हो गया है. सोमवार की सुबह ही राजीव नगर मुख्य मार्ग में बिना पीपीइ किट व सुरक्षा मानकों का ख्याल रखे बिना मजदूर को गहरे मैनहोल के नीचे उतारकर सफाई कराई गई.

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सभी मैनहोल की मशीन से नहीं हो रही सफाई

पटना नगर निगम के सभी छह अंचलों में करीब 56 हजार मैनहोल हैं. इसका सफाई होना जरूरी है. निगम प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक सभी मैनहोल की उड़ाही मशीनों से नहीं हो सकती है. क्योंकि, वर्तमान में मशीन भी उपलब्ध नहीं है. बाकी, ज्यादा गहरे मैनहोल में सुपर सकर मशीन व अन्य की मदद से की जाती है. लेकिन, चार फुट से पांच फुट गहरे नाले में मैनुअल हो रही है. कांग्रेस मैदान, मीठापुर, एएन कॉलेज, दीघा-गांधी मैदान मेन रोड सहित अन्य इलाकों में मजदूर उतारकर ही सफाई की गयी.

मैनुअल उड़ाही पर सुप्रीम कोर्ट भी लगाया है रोक

सामाजिक न्याय मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक पटना को भले ही सौ फीसदी मैनुअल सफाई प्रथा से मुक्त घोषित किया जा चुका है और सुप्रीम कोर्ट की भी इस पर रोक है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. बिना सेफ्टी गियर के सीवर में उतरने से कर्मियों को जहरीली गैसों के कारण जान का खतरा तो रहता ही है, साथ ही हृदय रोग, त्वचा संक्रमण और सांस संबंधी गंभीर बीमारियां भी हो रही हैं.

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सभी मैनहोल की सफाई में असमर्थ है मशीन

मैनहोल की सफाई के लिए सुपर सकर व मिनी जेटिंग मशीनें उपलब्ध हैं. लेकिन मैनहोल से पत्थर, कपड़ा, कचरा व जानवरों के अवशेष निकलते हैं, जिसे मशीनें नहीं खींच पातीं. ऐसी स्थिति में निगम डेली बेसिस पर पैसे देकर कर्मियों को नीचे उतारता है.

56 हजार मैनहोल की हुई उड़ाही

निगम प्रशासन का दावा है कि मानसून में जलजमाव रोकने के लिए 56 हजार मैनहोल की उड़ाही मशीनों से पूरी कर ली गई है. जनवरी महीने से ही सभी 75 वार्डों में पोकलेन, जेसीबी, मिनी सकर व सुपर सकर मशीनों की मदद से मॉपअप अभियान चलाया गया. सफाईकर्मियों को ग्लव्स व सेफ्टी गियर दिए गए हैं. निगम ने शहर के 75 हजार कैचपिट, मैनहोल व स्लैब की जियो टैगिंग भी की है.

क्या बोले अधिकारी?

राजधानी में मैनहोल की सफाई के लिए आधुनिक मशीनों को मंगाया जा रहा है. इसके बाद स्कैवेंजर से उड़ाही करवाई जाएगी. इसके लिए जीइएम पोर्टल से 6 मैनहोल स्कैवेंजर मशीनें मंगवाई जाएंगी, जो कैमरों व रोबोटिक हाथों से लैस होंगी. विभाग से भी स्वीकृति मिल गयी है. हालांकि, इसे पूरी तरह डेवलप करने में थोड़ा समय लगेगा.
– राजन सिन्हा, अपर नगर आयुक्त

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हिमांशु देव

लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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