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इसरो का शतक

Updated at : 31 Jan 2025 6:45 AM (IST)
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Indian Space Research Organization

इसरो

ISRO : वर्ष 2025 में इसरो का यह पहला मिशन तो था ही, इसी महीने पदभार संभालने वाले इसरो के नये अध्यक्ष वी नारायणन के नेतृत्व में भी यह पहला मिशन था. ऐसे ही, जीएसएलवी का यह 17 वां मिशन था और 11 वीं बार इसमें स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया.

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ISRO : बुधवार सुबह छह बजकर 23 मिनट पर इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने श्री हरिकोटा से अपनी 100 वीं लांचिंग की. इसरो ने जीएसएलवी-एफ-15 रॉकेट के जरिये एनवीएस-02 उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के साथ अपने सौवें मिशन का जश्न मचाया. वर्ष 2025 में इसरो का यह पहला मिशन तो था ही, इसी महीने पदभार संभालने वाले इसरो के नये अध्यक्ष वी नारायणन के नेतृत्व में भी यह पहला मिशन था. ऐसे ही, जीएसएलवी का यह 17 वां मिशन था और 11 वीं बार इसमें स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया.

गौरतलब है कि इससे पहले 30 दिसंबर, 2024 को अंतरिक्ष में डॉकिंग के एक प्रयोग को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया था, जो इसरो का 99 वां मिशन था. इसरो के मुताबिक, एनवीएस-02 उपग्रह भारत के क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली का हिस्सा होगा, जो देश के लिए अधिक सटीक नेविगेशन प्रणाली का हिस्सा होगा. इस प्रणाली के तहत कई उपग्रह अंतरिक्ष में तैनात किये जाने हैं. इस उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करने का उद्देश्य भारत के साथ-साथ भारतीय भूमि से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं को सटीक स्थिति, वेग और समय प्रदान करना है.

इस उपग्रह को 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जायेगा, जिससे पोजीशनिंग और टाइमिंग की सटीकता और बढ़ेगी. ‘नाविक’ यानी ‘नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन’ शृंखला का यह दूसरा उपग्रह स्थलीय, हवाई और समुद्री नेविगेशन, कृषि संबंधी सटीक जानकारी, मोबाइल उपकरणों में स्थान आधारित सेवाओं, उपग्रहों के लिए कक्षा निर्धारण, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित एप्स और आपातकालीन सेवाओं में सहयोग करेगा.

यह स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली भारत को विदेशी जीपीएस सेवाओं पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी और इससे देश के परिवहन, सैन्य, समुद्री नौवहन, कृषि और संचार क्षेत्रों में बड़े बदलाव आयेंगे. नाविक में दूसरी पीढ़ी के कुल पांच उपग्रहों के प्रक्षेपण की योजना है, जिनमें से दो का सफल प्रक्षेपण हो चुका है. इस श्रेणी के पहले उपग्रह यानी एनवीएस-01 का प्रक्षेपण 29 मई, 2023 को हुआ था. साइकिल और बैलगाड़ी पर रॉकेट के पुर्जे ढोने वाले इसरो ने इन 46 वर्षों में एक लंबा सफर तय किया है और अब यह दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक बन गयी है, जो दूसरे देशों के उपग्रहों का प्रक्षेपण करती है. अपनी सौवीं लांचिंग में इसरो को 46 साल भले ही लग गये हों, लेकिन अपनी 200 वीं लांचिंग वह अगले पांच साल में कर लेने का इरादा जता रहा है, जो उसकी क्षमता और निरंतरता को देखते हुए असंभव भी नहीं लगता.

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