अक्षय ऊर्जा पर जोर

नवीकरणीय ऊर्जा
Renewable Energy : पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है. जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल कम होने से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है और वायु तथा जल प्रदूषण भी कम होता है. इससे पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.
Renewable Energy : ऊर्जा मंत्रालय का यह आकलन, कि अगले कुछ महीनों में और अधिक से अधिक इस साल के अंत तक अक्षय या नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन जीवाश्म ऊर्जा से अधिक हो जायेगा, बेहद उत्साहवर्धक और पेरिस समझौते की प्रतिबद्धता के अनुरूप है. फिलहाल देश में कुल बिजली उत्पादन 472 गीगावाट है, जिसमें जीवाश्म ऊर्जा (कोयला, गैस, लिग्नाइट और डीजल) की हिस्सेदारी 240 गीगावाट, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा (जलविद्युत, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और अपशिष्ट से ऊर्जा) की हिस्सेदारी 232 गीगावाट है. प्रतिशत में देखें, तो कुल बिजली उत्पादन में जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 48 फीसदी है. इस वर्ष कुल बिजली उत्पादन के 526 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है.
हालांकि भारत का लक्ष्य 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाकर 500 गीगावाट करना है, जो कुल ऊर्जा उत्पादन का 50 फीसदी होगा. अभी सबसे अधिक लगभग 45 फीसदी बिजली कोयले से बनती है, जबकि सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत और जल विद्युत व पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी 10-10 फीसदी है. सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने पिछले एक दशक में भारी वृद्धि दर्ज की है. वर्ष 2014 में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता मात्र 2.82 गीगावाट थी, जो 2025 में बढ़कर 100 गीगावाट से अधिक हो गयी. चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक है और सौर पैनल, सौर पार्क तथा रूफटॉप सौर परियोजनाओं जैसी पहलों का इसमें महत्वपूर्ण योगदान है.
पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है. जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल कम होने से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है और वायु तथा जल प्रदूषण भी कम होता है. इससे पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिलती है. इसी को देखते हुए सरकार ने 2.5 गीगावाट के दो बिजली संयंत्रों (एक कोयला और एक गैस) को फिलहाल बंद करने का फैसला किया है. हालांकि विशेषज्ञों का आकलन है कि वायु प्रदूषण के कारण भविष्य में सौर ऊर्जा का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. एक चुनौती यह भी है कि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता अभी कुछ राज्यों तक ही सीमित है. कुल 500 गीगावाट के लक्ष्य तक पहुंचने और नेट जीरो की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को हासिल करने के लिए देश के सभी राज्यों को योगदान देना होगा.
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