पटना में तीन और दिल्ली में एक बंगला, बिहार के इस पॉलिटिकल फॅमिली के पास हैं 4 सरकारी आवास

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 01 Jun 2026 6:31 PM

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सरकारी आवास

Rabri Devi: पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर विवाद लगातार गहरा रहा है. राबड़ी देवी बंगला खाली करने को तैयार नहीं हैं, जबकि सरकार उन्हें दूसरा आवास आवंटित कर चुकी है. इस बीच लालू परिवार के अन्य सरकारी आवासों और इस बंगले से जुड़े पुराने रिश्ते की भी चर्चा तेज हो गई है.

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Rabri Devi: बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड वाला सरकारी आवास इन दिनों राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है. यह बंगला लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए सिर्फ एक सरकारी आवास नहीं, बल्कि दो दशकों से जुड़ी कई यादों का केंद्र भी रहा है. इसी घर में परिवार के कई महत्वपूर्ण मौके बीते हैं और लंबे समय तक यह लालू परिवार का प्रमुख ठिकाना बना रहा.

लालू परिवार के पास कौन-कौन से सरकारी आवास हैं?

बंगला विवाद के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि लालू परिवार के सदस्यों के पास फिलहाल कौन-कौन से सरकारी आवास हैं.

39 हार्डिंग रोड का आवास

राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया है. सरकार ने 10 सर्कुलर रोड के बदले यही आवास उन्हें दिया है. हालांकि राबड़ी देवी ने अब तक वहां शिफ्ट होने की सहमति नहीं दी है.

1 पोलो रोड का बंगला

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के कारण तेजस्वी यादव को 1 पोलो रोड स्थित सरकारी आवास मिला हुआ है. राजनीतिक बैठकों और पार्टी की कई गतिविधियों का संचालन भी इसी परिसर से होता है.

49 हार्डिंग रोड का आवास

तेज प्रताप यादव फिलहाल 49 हार्डिंग रोड स्थित बंगले में रह रहे हैं. यह आवास उन्हें हसनपुर से विधायक रहने के दौरान आवंटित किया गया था. बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बावजूद यह आवास अब तक उनके पास बना हुआ है.

दिल्ली में भी सरकारी आवास

नई दिल्ली के पंडारा पार्क क्षेत्र में भी परिवार का एक सरकारी आवास है. यह आवास पाटलिपुत्र सांसद मीसा भारती को आवंटित है. दिल्ली में राजनीतिक और संसदीय गतिविधियों के दौरान यह परिवार का प्रमुख ठिकाना माना जाता है.

आखिर 10 सर्कुलर रोड छोड़ने को तैयार क्यों नहीं हैं राबड़ी देवी?

10 सर्कुलर रोड को लेकर राबड़ी देवी के रुख के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. करीब 20 साल से अधिक समय तक इस आवास में रहने के कारण परिवार का इस जगह से गहरा भावनात्मक रिश्ता बन चुका है. परिवार के कई सुख-दुख और बड़े अवसर इसी घर से जुड़े रहे हैं. यही कारण है कि इसे छोड़ना आसान नहीं माना जा रहा.

राजनीतिक संदेश देने की कोशिश

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राजद इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर भी उठाना चाहता है. पार्टी इसे विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई और राजनीतिक दबाव के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है. राजद नेताओं का मानना है कि बंगला खाली कराने का फैसला राजनीतिक कारणों से लिया गया है.

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बंगला विवाद बना सियासी मुद्दा

10 सर्कुलर रोड का मामला अब केवल आवास आवंटन तक सीमित नहीं रह गया है. इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बयानबाजी जारी है. एक ओर सरकार नियमों के अनुसार आवास खाली करने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर राजद इसे राजनीतिक विवाद का रूप दे रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गर्मा सकता है.

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Paritosh Shahi

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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