Panchayati Raj: आदिवासी परंपरा के पालन से ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या से मिल सकती है मुक्ति

Published by : Vinay Tiwari Updated At : 04 Apr 2025 7:46 PM

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आदिवासियों की संस्कृति, उनकी भाषा, संगीत, खानपान, परंपरा को सहेजना काफी जरूरी है. आदिवासियों की लोक भाषा, वेशभूषा, भोजन और संगीत का दस्तावेजीकरण करना भावी पीढ़ी को देश की विरासत के बारे में जानने के लिए अहम है. अगर आम लोग भी आदिवासियों की तरह प्रकृति का सम्मान करें तो ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्या का समाधान हो सकता है.

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Panchayati Raj: भारत के आदिवासियों की विरासत को समझने के लिए सरहुल महोत्सव के उपलक्ष्य में ‘हमारी परंपरा, हमारी विरासत’ का विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय और झारखंड सरकार के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में हुआ. इस दौरान झारखंड में आदिवासियों की कला, संस्कृति और विरासत को बचाने के पहलुओं पर विचार किया गया. 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय पंचायती राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति, उनकी भाषा, संगीत, खानपान, परंपरा को सहेजना काफी जरूरी है. आदिवासियों की लोक भाषा, भूषा, भोजन और संगीत का दस्तावेजीकरण करना भावी पीढ़ी को देश की विरासत के बारे में जानने के लिए अहम है. भगवान बिरसा मुंडा और आदिवासी समुदाय का ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है. जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष को कभी भुला नहीं जा सकता है.

पर्यावरण संरक्षण में आदिवासी समुदाय का विशेष योगदान

पर्यावरण संरक्षण में आदिवासी समुदाय का अहम योगदान रहा है. आदिवासी पर्यावरण संरक्षण का काम सिर्फ विरासत के तौर पर नहीं कर रहे हैं, यह भूमि  के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है. जमीन और पर्यावरण से आदिवासियों के लगाव के कारण ही पीढ़ियों से प्राकृतिक संसाधन बचा हुआ है. अगर आम लोग भी आदिवासियों की तरह प्रकृति का सम्मान करें तो ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्या का समाधान हो सकता है. केंद्रीय मंत्री ने आदिवासियों से बच्चों की शिक्षा पर जोर देने का आग्रह किया ताकि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके. 


भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष भावी पीढ़ी के लिए है प्रेरणा


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने भगवान बिरसा मुंडा की विरासत का जिक्र करते हुए झारखंड के आदिवासी समुदाय के सांस्कृतिक जागरूकता की प्रशंसा की. देश के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में झारखंड के आदिवासियों का अहम योगदान है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरासत को विकास से जोड़ने की बात करते है. इस विचार को आगे बढ़ाने के लिए सरहुल महोत्सव का आयोजन दिल्ली में किया गया. इस आयोजन का मकसद देश के लोगों को जल, जंगल और जमीन को बचाने का संदेश देना है. देश की संस्कृति को बचाने में आदिवासी समुदाय का अहम योगदान रहा है. सरहुल यह संदेश देता है कि हम प्रकृति से जितने करीब होंगे, जीवन उतना ही उल्लास और खुशी से भरा होगा. 

झारखंड के आदिवासी प्रतिनिधियों ने की शिरकत


पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि देश के विविध परंपरा में आदिवासी सांस्कृतिक विरासत का अहम रोल है. आदिवासी संगीत, गाने, लोकगीत और परंपरा देश की अमूल्य धरोहर है. अगर इसकी सुरक्षा नहीं की गयी तो यह खत्म हो जायेगा. भावी पीढ़ी के लिए भी इस विरासत को बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. झारखंड के 3 हजार गांवों ने ‘हमारी परंपरा, हमारी विरासत’ अभियान में शामिल होने की प्रतिबद्धता जतायी है. आदिवासी संस्कृति और विरासत का संरक्षण कर झारखंड दूसरे राज्यों के लिए मॉडल पेश कर सकता है. इस कार्यक्रम में  झारखंड के आदिवासी समूहों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया और ग्राम सभा को सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श हुआ. कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी के अलावा झारखंड के 560 आदिवासी प्रतिनिधि शामिल हुए. 

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