Jammu Kashmir Politics: राशिद इंजीनियर सलाखों के बाहर, चढ़ा राजनीतिक पारा, जानें क्यों टेंशन में आए महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला

Jammu Kashmir Politics : जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के पहले बारामुल्ला के सांसद राशिद इंजीनियर जेल से बाहर आ चुके हैं. इसकी वजह से महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला की परेशानी बढ़ गई है.
Jammu Kashmir Politics : जम्मू-कश्मीर में करीब 10 साल बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहा है. इससे पहले बारामुल्ला के सांसद राशिद इंजीनियर जेल से बाहर आ गए हैं जिसकी वजह से राजनीतिक पारा चढ़ गया है. एनआईए की विशेष अदालत द्वारा आतंकी फंडिंग के मामले में जमानत मिलने के बाद तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया और कहा- नरेंद्र मोदी का ‘नया कश्मीर’ का सपना कभी पूरा नहीं होगा. मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं कि सत्य की जीत होगी. मुझे न्याय की उम्मीद है. इस बार का चुनाव महत्वपूर्ण है. यहां के लोग एकजुट हैं और न्याय के लिए सफलतापूर्वक लड़ेंगे.
महबूबा मुफ्ती राशिद की पार्टी से खफा
महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और राशिद की पार्टी के बीच इस चुनाव में बात नहीं बनती नजर आ रही है. पिछले दिनों महबूबा ने कहा था कि केवल उनकी ही पार्टी कश्मीर मुद्दे के समाधान की पैरवी करती है. ‘जेलों में निरूद्ध’ युवकों की बात करती हैं. उन्होंने उस वक्त जेल में बंद राशिद की आवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी, AIP) पर निशाना साधा था, और कहा था कि जेल में बंद एक व्यक्ति चुनाव लड़ रहा है, जबकि गरीब व्यक्ति के परिवार को जेल में बंद अपने परिजनों से मिलने की अनुमति नहीं है.

क्यों बढ़ी उमर अब्दुल्ला की टेंशन?
दिल्ली की एक अदालत ने राशिद इंजीनियर को आतंकवाद वित्त पोषण के एक मामले में गत मंगलवार को 2 अक्टूबर तक के लिए जमानत दी ताकि वह जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में प्रचार कर पायें. विधानसभा चुनाव में आवामी इत्तेहाद पार्टी पर सभी की खास नजर है. पार्टी के नेता राशिद के जेल से बाहर आने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की टेंशन बढ़ गई है. राशिद वही शख्स हैं जिसने जेल में बंद रहने के बाद भी लोकसभा चुनाव 2024 में अब्दुल्ला को बारामूला लोकसभा सीट से हराया था.
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इंजीनियर राशिद क्यों रहते हैं चर्चा में?
दरअसल, इंजीनियर राशिद लंबे समय से सलाखों के पीछे हैं? यही वजह है कि जनता की सहानुभूति वे बटोरने में कामयाब होते हैं. विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणापत्र में एआईपी ने कैदियों की रिहाई और PSA और USPA को रद्द करने का वादा किया है. राशिद के भाई खुर्शीद अहमद शेख सरकारी टीचर थे, जिन्होंने चुनाव लड़ने के लिए नौकरी छोड़ दी. पार्टी की ओर से कहा गया है कि विधानसभा चुनाव में घाटी की करीब 20 सीटों पर उसे जीत मिलेगी. यदि ऐसा होता है तो एआईपी जम्मू-कश्मीर की एक बड़ी राजनीतिक शक्ति बनकर उभरेगी. जबकि, जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के लिए यह बड़े झटके की तरह होगा.
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By अमिताभ कुमार
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