अमेरिकी नौसेना के हमले में 3 भारतीयों की मौत से भारत नाराज, अमेरिकी दूतावास के प्रभारी को तलब कर जताया विरोध

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 12 Jun 2026 6:11 PM

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सेटेबेलो

Ministry of External Affairs : होर्मुज स्ट्रेट के पास सेटेबेलो जहाज पर हुए हमले में 3 भारतीयों की मौत पर भारत ने यह कहा है कि चाहे क्षेत्रीय संघर्ष कुछ भी हो, व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. अमेरिकी नौसेना द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमले का भारत ने कड़ा विरोध भी किया है.

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Ministry of External Affairs : भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिकी दूतावास के प्रभारी जेसन मीक्स को तलब किया और ओमान तट के पास कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के हमलों के खिलाफ विरोध जताया. अमेरिकी नौसेना के इस हमले में तीन भारतीयों को मौत हुई है. भारत ने इस सप्ताह दूसरी बार अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को तलब किया है.

तीन भारतीयों की हुई है मौत

सरकार ने 11 जून को यह जानकारी दी थी कि ओमान तट के पास 10 जून को तेल टैंकर सेटेबेलो (Settebello) पर हमला हुआ था. उस जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे. इनमें से 21 नाविकों को बचा लिया गया था, जबकि तीन लापता थे. इन तीनों के लापता होने के बाद अमेरिकी दूतावास के प्रभारी जेसन मीक्स को तलब कर भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था. भारत ने कहा कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. यह पहली बार था जब भारत ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले जहाजों को निशाना बनाया था. तीनों लापता नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है.

सेटेबेलो, मैरीवेक्स और जलवीर पर अमेरिकी नौसेना ने किया हमला

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि मैरीवेक्स ,सेटेबेलो और जलवीर पर हमले अमेरिकी नौसेना की ओर से किए गए थे. मैरीवेक्स पर हमला 8 जून 2026 को हुआ था. इस जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य थे. इसपर अमेरिकी नौसेना ने हमले की कार्रवाई की थी, भारत ने उस समय चिंता जताई, लेकिन मामला ज्यादा नहीं बढ़ा. उसके बाद 10 जून 2026 को ओमान तट के पास तेल टैंकर सेटेबेलो पर हमला हुआ. इस जहाज पर भी 24 भारतीय थे, जिनमें से 21 सुरक्षित बचे और 3 की मौत हो गई. 11-12 जून 2026 की रात को जलवीर पर हमला हुआ. यह हमला भी ओमान तट पर हुआ. जहाज पर 20 भारतीय थे और सभी सुरक्षित हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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