अमेरिकी नौसेना के हमले में 3 भारतीयों की मौत से भारत नाराज, अमेरिकी दूतावास के प्रभारी को तलब कर जताया विरोध

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सेटेबेलो

Ministry of External Affairs : होर्मुज स्ट्रेट के पास सेटेबेलो जहाज पर हुए हमले में 3 भारतीयों की मौत पर भारत ने यह कहा है कि चाहे क्षेत्रीय संघर्ष कुछ भी हो, व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. अमेरिकी नौसेना द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमले का भारत ने कड़ा विरोध भी किया है.

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Ministry of External Affairs : भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिकी दूतावास के प्रभारी जेसन मीक्स को तलब किया और ओमान तट के पास कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के हमलों के खिलाफ विरोध जताया. अमेरिकी नौसेना के इस हमले में तीन भारतीयों को मौत हुई है. भारत ने इस सप्ताह दूसरी बार अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को तलब किया है.

तीन भारतीयों की हुई है मौत

सरकार ने 11 जून को यह जानकारी दी थी कि ओमान तट के पास 10 जून को तेल टैंकर सेटेबेलो (Settebello) पर हमला हुआ था. उस जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे. इनमें से 21 नाविकों को बचा लिया गया था, जबकि तीन लापता थे. इन तीनों के लापता होने के बाद अमेरिकी दूतावास के प्रभारी जेसन मीक्स को तलब कर भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था. भारत ने कहा कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. यह पहली बार था जब भारत ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले जहाजों को निशाना बनाया था. तीनों लापता नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है.

सेटेबेलो, मैरीवेक्स और जलवीर पर अमेरिकी नौसेना ने किया हमला

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि मैरीवेक्स ,सेटेबेलो और जलवीर पर हमले अमेरिकी नौसेना की ओर से किए गए थे. मैरीवेक्स पर हमला 8 जून 2026 को हुआ था. इस जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य थे. इसपर अमेरिकी नौसेना ने हमले की कार्रवाई की थी, भारत ने उस समय चिंता जताई, लेकिन मामला ज्यादा नहीं बढ़ा. उसके बाद 10 जून 2026 को ओमान तट के पास तेल टैंकर सेटेबेलो पर हमला हुआ. इस जहाज पर भी 24 भारतीय थे, जिनमें से 21 सुरक्षित बचे और 3 की मौत हो गई. 11-12 जून 2026 की रात को जलवीर पर हमला हुआ. यह हमला भी ओमान तट पर हुआ. जहाज पर 20 भारतीय थे और सभी सुरक्षित हैं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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