Cyber Crime: साइबर अपराधियों को नकेल लगाने लिए एजेंसियों के बीच समन्वय और तकनीक पर फोकस

अब तक साइबर अपराध से जुड़े मामलों में बैंक, सिम कार्ड कंपनियां और पुलिस के अलग तरीके से काम करने के कारण अपराधी का बचाना आसान हो जाता था. इस समस्या को दूर करने के लिए आई4सी की ओर से एस4सी डैशबोर्ड शुरू किया है. इस डैशबोर्ड के शुरू होने से रियल-टाइम ट्रैकिंग होगी.
Cyber Crime: डिजिटल लेन देन बढ़ने के साथ ही साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. साइबर अपराध से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे है. साइबर अपराध से निपटने के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर(आई4सी) का गठन किया गया है. वैसे पुलिस और कानून-व्यवस्था संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत राज्य का विषय है. साइबर और अन्य अपराध को रोकने, पता लगाने, जांच और कार्रवाई करने का अधिकार राज्यों के पास है. केंद्र सरकार साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्यों को दिशा निर्देश और वित्तीय मदद मुहैया कराने का काम करती है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आई4सी का गठन देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए किया है. इस संस्था के अधीन साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों करने के लिए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल बनाया गया है. आम लोग इस पोर्टल पर साइबर अपराध के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं. महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध को विशेष प्राथमिकता दी गयी है. वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए आई4सी के तहत वर्ष 2021 में सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया गया. गृह मंत्रालय के अनुसार इस सिस्टम पर पिछले साल के दिसंबर तक वित्तीय धोखाधड़ी की 23.61 लाख शिकायत मिली और आम लोगों का 8189 करोड़ रुपये ठगों से बचाने में मदद मिली. राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने यह जानकारी दी.
साइबर अपराधियों पर सख्ती से निपटने की तैयारी
अब तक साइबर अपराध से जुड़े मामलों में बैंक, सिम कार्ड कंपनियां और पुलिस के अलग तरीके से काम करने के कारण अपराधी का बचाना आसान हो जाता था. इस समस्या को दूर करने के लिए आई4सी की ओर से एस4सी डैशबोर्ड शुरू किया है. इस डैशबोर्ड के शुरू होने से रियल-टाइम ट्रैकिंग होगी. जैसे ही साइबर अपराध की शिकायत मिलेगी बैंक और पुलिस तुरंत उस लेनदेन को ट्रैक कर सकेंगे और यह पता लगा सकेंगे कि साइबर अपराध के लिए किस सिम का उपयोग किया और किस बैंक खाते में पैसे भेजे गयी. यह जानकारी साइबर अपराध से जुड़ी सभी एजेंसियों को एक साथ मिलेगी. इससे जांच और साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने की गति तेज होगी और साक्ष्य जुटाने में भी मदद मिलेगी.
यह डैशबोर्ड फर्जी बैंक खातों और मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम, फर्जी सिम कार्ड और ई-सिम के दुरुपयोग को रोकने, साइबर धोखाधड़ी और और मानव तस्करी के जरिए चलाए जा रहे गिरोह की पहचान करने का काम करेगा. एस4सी डैशबोर्ड के साथ सीबीआई की नयी साइबर क्राइम ब्रांच भी साइबर अपराधियों पर नकेल लगाने का काम करेगी. सरकार के पहल से अब सीबीआई, एनआईए, प्रवर्तन निदेशालय और राज्यों की पुलिस के बीच संवाद हीनता नहीं होगी. साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा एनालिटिक्स के प्रयोग से अपराधी के लोकेशन और नेटवर्क का पता तत्काल लगाया जा सकेगा.
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