ओडिशा में कमर्शियल गैस की किल्लत, रेस्टोरेंट के मेन्यू में कटौती; लौटा कोयला-लकड़ी का दौर
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 23 Mar 2026 9:59 PM
एलपीजी सिलेंडर, फोटो पीटीआई
Commercial Gas Crisis: ओडिशा में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण सड़क किनारे सैकड़ों ढाबे और छोटे रेस्तरां को अपने मेन्यू में कटौती करना पड़ा है. गैस की कमी के कारण कोयला और लकड़ी का भी सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
Commercial Gas Crisis: भुवनेश्वर के एक शाकाहारी रेस्तरां के ऑनर प्रशांत कुमार भट्ट ने कहा- संकट के चलते उन्हें अपने मेन्यू में भारी कटौती करनी पड़ी है. पहले हम ग्राहकों को 180 व्यंजन परोसते थे, लेकिन अब पर्याप्त सिलेंडर नहीं मिलने के कारण इसे घटाकर 18 कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि अब कई व्यंजन इंडक्शन पर तैयार किए जा रहे हैं.
गैस की कमी के कारण लकड़ी का इस्तेमाल करने को मजबूर
कई रेस्तरां पुराने दौर में लौट आए हैं और खाना बनाने के लिए कोयला और लकड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं. किशोर मटन होटल भी गैस की कमी के कारण अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल कर रहा है. होटल के मालिक ने कहा, पर्याप्त सिलेंडर नहीं मिलने के कारण हमने रात का खाना परोसना बंद कर दिया है.
स्ट्रीट फूड की दुकानें बंद
गैस की किल्लत के कारण कई स्ट्रीट फूड की दुकानें बंद हो गई हैं. खाओगली क्षेत्र के कई स्ट्रीट फूड विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद कर दी हैं, जबकि अन्य ने खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए हैं. इडली, वडा और पूड़ी जैसे व्यंजन, जो पहले 5 रुपये प्रति नग मिलते थे, अब सात रुपये में बिक रहे हैं, जबकि उपमा 10 और डोसे की कीमत 30 रुपये से बढ़ाकर 15 और 40 रुपये कर दी गई हैं.
कामगार भी प्रभावित
कटक में एक होटल मालिक ने बताया कि इस स्थिति से इस व्यवसाय पर निर्भर कई कामगार भी प्रभावित हुए हैं. मेरे साथ-साथ रसोइयों और आपूर्तिकर्ताओं सहित कई लोग इस होटल पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं. इसलिए हमने लकड़ी का इस्तेमाल शुरू किया है.
छात्र भी प्रभावित
एलपीजी की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी भी परेशानी झेल रहे हैं. जो आमतौर पर मेस में खाना खाते है या छोटे सिलेंडरों पर खुद खाना पकाते हैं.
सरकार ने कहा- वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त भंडार
ओडिशा के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री के सी पात्रा ने कहा कि राज्य में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल 14,000 वाणिज्यिक सिलेंडर उपलब्ध हैं, जबकि दैनिक मांग करीब 2,000 है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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