नहीं चला राहुल का 72 हजार भारी पड़ा मोदी का चौकीदार

Updated at : 24 May 2019 6:08 AM (IST)
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नहीं चला राहुल का 72 हजार भारी पड़ा मोदी का चौकीदार

नयी दिल्ली : कांग्रेस ‘गरीबी पर वार, 72 हजार’ के नारे के साथ इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देने की रणनीति के साथ उतरी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘चौकीदार’ अभियान, एयर स्ट्राइक, राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के आक्रामक प्रचार के आगे ढेर हो गयी. इस चुनाव में मुख्य […]

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नयी दिल्ली : कांग्रेस ‘गरीबी पर वार, 72 हजार’ के नारे के साथ इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देने की रणनीति के साथ उतरी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘चौकीदार’ अभियान, एयर स्ट्राइक, राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के आक्रामक प्रचार के आगे ढेर हो गयी.

इस चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की स्थिति यह है कि वह 2014 के अपने 44 सीटों के आंकड़ों में महज कुछ सीटें ही जोड़ पायी हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी ने कोई करिश्मा नहीं दिखा पायी.
चुनाव के दौरान कई जानकारों का कहना था कि अगर कांग्रेस सीटों का शतक भी लगा लेती है, तो वह उसके और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी लिए सहज स्थिति होगी. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ. राहुल के नेतृत्व में समूची पार्टी ने प्रचार अभियान प्रधानमंत्री मोदी पर केंद्रित रखा और राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ‘चौकीदार चोर है’ का प्रचार अभियान चलाया, जिसके जवाब में मोदी और भाजपा ने ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान शुरू किया.
राहुल ने राफेल मुद्दे के अलावा ‘न्यूनतम आय गारंटी’ (न्याय) योजना को मास्टरस्ट्रोक के तौर पर पेश किया. पार्टी को उम्मीद थी कि गरीबों को सालाना 72 हजार रुपये देने का उसका वादा भाजपा के राष्ट्रवाद वाले विमर्श की धार को कुंद कर देगा, जबकि हकीकत में ऐसा नहीं हुआ.वहीं, प्रियंका गांधी वॉड्रा के सक्रिय राजनीति में आने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि इस लोकसभा चुनाव में उनका जादू चलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और प्रियंका का सियासी आगाज बेअसर साबित हुआ.
कांग्रेस ने पंजाब-केरल से बढ़ायीं सीटें
इस लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दलों में सबसे ज्यादा फायदा द्रमुक और बसपा को मिला है. 2014 लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियां खाता तक नहीं खोल पायी थीं. इस बार द्रमुक तमिलनाडु की 38 में से द्रमुक 22 सीटें, जबकि बसपा यूपी की 80 में से 12 सीटें जीत ली हैं. उधर, कांग्रेस पंजाब और केरल में अपनी सीटें बढ़ाने में कामयाब रही है.
हिंदीभाषी प्रदेशों से आगे निकली भाजपा
मोदी लहर सिर्फ हिंदी भाषी प्रदेशों और गुजरात में ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी रही. केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को यह छू नहीं सकी. तेलंगाना में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है. आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी हार गयी, जबकि वाइएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी सरकार बना रहे हैं.
भाजपा: वोट शेयर में छलांग
मोदी लहर पर सवार भाजपा ने करीब तीन सौ से अधिक सीटों पर जीत हािसल कर अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ िदया. कांग्रेस ने अपनी सीटों में थोड़ा इजाफा किया है. भाजपा के वोट शेयर में 18 ‍फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है.
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