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सुप्रीम कोर्ट का सरकार को निर्देशः रोहिंग्या मुसलमानों को अगली सुनवार्इ तक वापस न भेजा जाये

Updated at : 13 Oct 2017 3:52 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट का सरकार को निर्देशः रोहिंग्या मुसलमानों को अगली सुनवार्इ तक वापस न भेजा जाये

नयी दिल्लीः रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार वापस भेजने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें अगली सुनवार्इ तक वापस न भेजा जाये. शीर्ष अदालत ने कहा अगली सुनवार्इ की तारीख 21 नवंबर तय किया है. अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को अपने तर्क तैयार […]

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नयी दिल्लीः रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार वापस भेजने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें अगली सुनवार्इ तक वापस न भेजा जाये. शीर्ष अदालत ने कहा अगली सुनवार्इ की तारीख 21 नवंबर तय किया है. अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को अपने तर्क तैयार करने भी निर्देश दिया हे. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मानवीय मूल्य हमारे संविधान का आधार है. देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा जरूरी है, लेकिन पीड़ित महिलाओं और बच्चों की अनदेखी नहीं की जा सकती.

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अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह अगली सुनवाई तक इन्हें वापस भेजने का फैसला न ले. रोहिंग्या शरणार्थियों ने केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें भारत से वापस भेजने को कहा गया है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा सहित तीन जजों की पीठ रोहिंग्या शरणार्थियों की याचिका पर सुनवाई कर रही है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के अलावा, पीठ में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं. पीठ ने कहा कि वह इस मामले में विभिन्न पहलुओं पर सुनवाई करेगी.

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है कि यह मामला कार्यपालिका का है और सर्वोच्च न्यायालय इसमें हस्तक्षेप न करे. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार अगली सुनवाई तक इन्हें वापस भेजने का फैसला न ले. सरकार ने अपने हलफनामे में रोहिंग्या शरणार्थियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा है कि ये भारत में नहीं रह सकते. सरकार ने कहा है कि उसे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ रोहिंग्या आतंकी संगठनों के प्रभाव में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में दलीलें भावनात्मक पहलुओं पर नहीं, बल्कि कानूनी बिंदुओं पर आधारित होनी चाहिए.

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