रक्षामंत्री ने कहा- 'प्रोजेक्ट कुशा' भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए होगा गेम-चेंजर

Published by : Satyendra Giri Updated At : 12 Jun 2026 6:56 PM

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह(स्रोत-एएनआई)

Rajnath Singh: हैदराबाद में केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ‘प्रोजेक्ट कुशा’ की प्रशंसा की. एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि आज मैं यह भविष्यवाणी करता हूं कि यह प्रोजेक्ट भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में गेम -चेंजर साबित होगा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई रक्षामंत्री राजनाथ सिंह […]

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Rajnath Singh: हैदराबाद में केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ‘प्रोजेक्ट कुशा’ की प्रशंसा की. एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि आज मैं यह भविष्यवाणी करता हूं कि यह प्रोजेक्ट भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में गेम -चेंजर साबित होगा.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि जब भारत की सीमाओं पर ड्रोन से लगातार हमले हो रहे थे.तब इस वर्ल्ड क्लास स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.उन्होंने कहा कि इसके लिए किसी और सबूत की जरूरत नहीं है.रक्षामंत्री ने कहा कि जिस प्रकार द्वापर युग में गोवर्धन पर्वत ने पूरे ब्रज क्षेत्र की रक्षा की थी, उसी तरह हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरे इलाके को छतरी की तरह सुरक्षा प्रदान किया था.

क्या है प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha)

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) द्वारा प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha) को विकसित किया जा रहा है. यह भारत की एक स्वदेशी और लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम है. इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मनों के लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को 400 किलोमीटर तक की दूरी पर हवा में ही मार गिराने की क्षमता है.

प्रोजेक्ट कुशा की क्या है विशेषता


प्रोजेक्ट कुशा को तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलों से लैस किया गया है, जिसमें कुशा-M1 150 किमी तक रेंज, कुशा-M2 250 किमी तक की रेंज और कुशा-M3 350-400 किलोमीटर तक की रेंज में मारक क्षमताओं के लिए डिजाइन किया गया है. इसे रूस की शक्तिशाली S-400 मिसाइल सिस्टम के स्वदेशी विकल्प के रूप में माना जा रहा है. इसका सोर्स कोड और सॉफ्टवेयर पूर्ण रूप से भारत के नियंत्रण में होगा. इस प्रोजेक्ट के माध्यम से भारतीय वायुसेना अपनी सुरक्षा को और अधिक मजबूत कर रही है. इसे 2028 से 2030 के बीच भारतीय सेना में शामिल किया जा सकता है.

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