Rice Beer: चावल से ऐसे बनाएं झारखंड का फेमस राइस बीयर, कई बीमारियों के लिए है रामबाण दवाई

Published by : Sameer Oraon Updated At : 03 May 2025 6:13 PM

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हड़िया, PIc Credit- Face Book

Rice Beer: हड़िया झारखंड का एक प्रसिद्ध पेय पदार्थ है. आदिवासी समुदाय के लोग अपने पूजा पाठ के रस्म में भी इसे चढ़ाते हैं. चावल को सड़ा कर इसे तैयार किया जाता है.

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Rice Beer: देश के हर राज्य का कुछ न कुछ यूनिक खाने पीने की चीजें रहती ही है, जो सबसे अलग होती है. वह भले ही बाहर के लोगों के लिए अटपटा लगे लेकिन उस राज्य में वह बेहद प्रसिद्ध रहता है. ऐसी ही एक पेय पदार्थ है हड़िया जिसे झारखंड के लोग बेहद चाव से पीते हैं. यह एक ऐसा पेय पदार्थ है जो यहां के आदिवासी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. आदिवासी समुदाय के लोग अपने पूजा पाठ के रस्म में इसे चढ़ाते हैं. हालांकि यह पदार्थ थोड़ा नशीला है. लेकिन कई लोगों का मानना है कि अगर इसे सीमित मात्रा में लिया जाए तो यह कई बीमारियों में कारगर सिद्द होता है. प्रोफसर सागर मिंज ने इस संबंध में प्रभात खबर को बताया था कि हाड़िया में इस्तेमाल होने वाला रानू कई बीमारियों के लिए कारगर है. इसे बॉटनी ने भी सिद्द किया है. सीमित मात्रा में इसका इस्तेमाल अच्छा है. जबकि कई लोगों का मानना है कि यह पाचन क्रिया को अच्छा करने में मदद करता है. हड़िया को झारखंड में लोग राइस बीयर के नाम से भी जानते हैं. जिसे चावल सड़ा करके बनाया जाता है. आदिवासियों के हर पर्व त्योहार में यह अनिवार्य तौर पर बनता है.

क्या है बनाने की विधि

हड़िया बनाने के सबसे पहले चावल को अच्छी तरह से पकाते हैं. फिर इसे ठंडा होने के लिए एक बर्तन में रख देते हैं. फिर इस चावल को सूखने के लिए रख देते हैं. तीन से चार दिन तक इसे इसी तरह से सूखाते हैं. फिर इसमें एक जंगली जड़ी रानू को पीस कर मिला देते हैं. रानू को जंगली जड़ी चैली कंदा की जड़ से निकाला जाता है. इस पूरी प्रक्रिया को फर्मेंटेशन कहते हैं. हालांकि गर्मी और सर्दी के दिनों में इसे सड़ाने के लिए अलग दिन निर्धारित होता है, गर्मियों में यह जहां 2 दिन में तैयार हो जाता है तो सर्दियों में इसे तैयार होने में 3 से 4 दिनों का समय लग जाता है. हालांकि करनी चावल से बना हड़िया लोगों द्वारा काफी पसंद किया जाता है.

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कैसे सेवन किया जाता है

हड़िया के तैयार होने के बाद जब लोगों को इसे परोसा जाता है तो उस चावल में पीने का पानी को मिलाया जाता है. आवश्यकता अनुसार ही पानी को डाला जाता है. फिर इसे एक हिलाया जाता है. हिलाते हिलाते यह पूरी तरह सफेद हो जाता है. इसके बाद इसे छलनी से छानकर ग्लास या फिर कटोरी में परोसा जाता है. हालांकि इसका अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

Disclaimer: यह एक मादक पेय पदार्थ है. प्रभात खबर कभी इस तरह के पेय पदार्थ को बढ़ावा नहीं देता. कृपया इसका सेवन न करें.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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