मालदा कांड में NIA का महा-एक्शन! रात भर छापेमारी के बाद 15 उपद्रवी गिरफ्तार, अब तक 68 गिरफ्तारियां

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 26 May 2026 4:22 PM

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NIA Action in Bengal: मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और परेशान करने के मामले में NIA ने बड़ी कार्रवाई की है. मतदाता सूची विवाद में 1 अप्रैल को हुई हिंसा और जजों को बंधक बनाने के मामले में 14 लोगों की गिरफ्तारी की गयी है. अब तक इस मामले में 68 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

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NIA Action in Bengal: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव 2026 से पहले एसआईआर का काम निबटा रहे न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को बंधक बनाने और उनके साथ दुर्व्यवहार के मामले के साथ-साथ सड़क जाम करने के मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने मंगलवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक प्रेस रिलीज जारी कर यह जानकारी दी है. कहा है कि बंगाल चुनाव से पहले हुए 2 मामलों में कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

कालियाचक और मोथाबाड़ी में रात भर चली छापेमारी

सोमवार की पूरी रात कालियाचक और मोथाबाड़ी के अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर एनआईए ने इन दोनों मामलों के 15 आरोपियों को धर दबोचा. जजों को बंधक बनाने के हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 68 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच एजेंसी ने कहा है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा.

हिंसा में सीधे तौर पर शामिल थे गिरफ्तार 14 लोग

एनआईए की टीम ने मालदा के कालियाचक और मोथाबाड़ी थाना क्षेत्रों से जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, वे सीधे तौर पर हिंसा में शामिल थे. एनआईए के अनुसार, ये सभी लोग उस हिंसक घटना में सीधे शामिल थे, जहां जजों को बंधक बनाया गया था. पहले से गिरफ्तार आरोपियों, जिनमें ISF नेता शामिल हैं, से पूछताछ और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद इन लोगों की पहचान की गयी.

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9 घंटे तक बंधक रहे थे 7 जज

घटना 1 अप्रैल की है, जब मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर)के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों पर भीड़ ने हमला बोल दिया था. मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ अचानक उग्र हो गयी थी. हिंसक भीड़ ने 7 न्यायिक अधिकारियों को मोथाबाड़ी के बीडीओ (BDO) कार्यालय के भीतर बंधक बना लिया था.

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एक जज 9 घंटे तक गाड़ी में रहे कैद

आठवें न्यायिक अधिकारी को करीब 9 घंटे तक एक वाहन के भीतर कैद रखा गया. इस दौरान भीड़ ने वाहनों में तोड़फोड़ की और पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया. सुरक्षा बलों ने बड़ी मशक्कत के बाद देर रात इन अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला था.

राजनीतिक गलियारों में मचा था हड़कंप

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी. इस मामले में पहले ही इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के मोथाबाड़ी उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली कादरी और नेता गुलाम रब्बानी की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की एक संगठित साजिश थी.

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NIA की रडार पर अभी और कई बड़े चेहरे

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनआईए अभी भी कई महत्वपूर्ण सुरागों पर काम कर रही है. गिरफ्तार किये गये उपद्रवियों से पूछताछ में कुछ नये नाम सामने आये हैं, जो इस हिंसा के मास्टरमाइंड हो सकते हैं. आने वाले दिनों में मालदा के अन्य इलाकों में भी ऐसी ही छापेमारी देखने को मिल सकती है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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