मालदा में आधी रात को हाई-वोल्टेज ड्रामा, 3 महिला जजों समेत 7 लीगल अफसर को भीड़ ने घेरा, लाठीचार्ज के बाद हुआ रेस्क्यू

Judicial Officers Hostage Malda West Bengal: मालदा के कालियाचक में वोटर लिस्ट विवाद पर भारी बवाल हुआ. प्रदर्शनकारियों ने 3 महिला जजों समेत 7 न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ के दफ्तर में घेर लिया. आधी रात को पुलिस रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी कहानी यहां पढ़ें.
Judicial Officers Hostage: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा जिले का कालियाचक इलाका बुधवार की रात रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. वोटर लिस्ट (SIR) से नाम काटे जाने के विरोध में उग्र प्रदर्शनकारियों ने कालियाचक-2 बीडीओ कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया. इसमें 3 महिला जज समेत 7 न्यायिक अधिकारी करीब 9 घंटे तक फंसे रहे. स्थिति इतनी बिगड़ गयी कि आधी रात के बाद भारी पुलिस बल पहुंची और लाठीचार्ज कर अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा.
दोपहर 3:30 बजे से शुरू हुआ बंधक बनाने का खेल
घटना की शुरुआत बुधवार को दोपहर करीब 3:30 बजे हुई. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत उनके नाम जान-बूझकर मतदाता सूची से हटाये जा रहे हैं. जब जजों ने प्रदर्शनकारियों से मिलने से इनकार कर दिया, तो भीड़ उग्र हो गयी और बीडीओ कार्यालय से बाहर निकलने के सभी दरवाजे बंद कर दिये.
कोलकाता-सिलीगुड़ी NH-12 को कर दिया जाम
प्रदर्शनकारियों ने कोलकाता-सिलीगुड़ी NH-12 को ठप कर दिया. बंधक बनाये गये अधिकारियों में तीन महिलाएं थीं, जो घंटों तक बिना उचित सुरक्षा के उग्र भीड़ के बीच घिरी रहीं.
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आधी रात को सर्जिकल स्ट्राइक जैसा रेस्क्यू
कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के हस्तक्षेप के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों की एक बड़ी टुकड़ी आधी रात के बाद मौके पर पहुंची. अधिकारियों को बाहर निकाले जाते समय प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बांस के खंभे लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की और जजों की गाड़ियों पर पथराव किया. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुसिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. अफरा-तफरी में कुछ प्रदर्शनकारी घायल हो गये.
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ADM के आश्वासन पर थमा बवाल
तनावपूर्ण स्थिति तब शांत हुई, जब देर रात अपर जिलाधिकारी (ADM) मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लिखित आश्वासन दिया कि जितने भी योग्य मतदाता हैं, उनके नाम 4 दिनों के भीतर सूची में जोड़ दिये जायेंगे. इस भरोसे के बाद नेशनल हाई-वे से नाकाबंदी हटायी गयी.
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चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट
इस घटना ने चुनाव आयोग (ECI) की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गयी है. आयोग जांच कर रहा है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई. दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को फटकार लगायी है. एनआईए या सीबीआई से मामले की जांच कराने की बात कही है.
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By Mithilesh Jha
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