महाराष्ट्र में ‘आदिवासी धर्मकोड’ की मांग को लेकर आदिवासियों ने भरी हुंकार, अब दिल्ली में होगा अगला महासंग्राम

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Adivasi Dharam Code

राष्ट्रीय आदिवासी धर्म महासम्मेलन में शामिल आदिवासी

Adivasi Dharam Code: महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी धर्म महासम्मेलन में झारखंड सहित कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन में 2027 की जनगणना में अलग आदिवासी धर्मकोड लागू करने, डिलिस्टिंग का विरोध करने और नई दिल्ली में अगला राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की रणनीति तैयार की गई. पूरी ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ें.

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Adivasi Dharam Code, रांची, (प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट): अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित करने को लेकर आदिवासियों के बीच अलग धर्म कोड की मांग जोर पकड़ने लगी है. इसी के तहत रविवार को जनगणना प्रपत्र में अलग ‘आदिवासी धर्मकोड’ (Tribal Religion Code) को शामिल करने के लिए झारखंड समेत देश के कई राज्यों के आदिवासी प्रतिनिधि महाराष्ट्र के नासिक में राष्ट्रीय आदिवासी धर्म महासम्मेलन में जमा हुए. अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद एवं अखिल भारतीय आदिवासी धर्म परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महासम्मेलन में धर्मकोड की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रखर और बुलंद करने के लिए एक ठोस एवं रणनीतिक रूपरेखा तैयार की गई.

राजनीतिक षड्यंत्र के तहत आदिवासियों को धर्मकोड से रखा जा रहा है दूर

लकी भाई जाधव की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में झारखंड से मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व मंत्री देव कुमार धान और प्रेमशाही मुंडा समेत कई वरिष्ठ प्रतिनिधि विशेष रूप से शामिल हुए. इस अवसर पर देश के कोने-कोने से आए प्रखर वक्ताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि आदिवासियों की विशिष्ट धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने के लिए अलग धर्मकोड प्राप्त करना उनका संवैधानिक अधिकार है. वक्ताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि देश के मूल निवासियों को अब तक धर्म कोड या अलग कॉलम में शामिल नहीं करना एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है.

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सम्मेलन में इन प्रमुख प्रस्तावों और बिंदुओं पर बनी सहमति

  • महासम्मेलन के दौरान आदिवासियों के अधिकारों और पहचान को लेकर कई महत्वपूर्ण वैचारिक प्रस्ताव पारित किए गए. इसमें प्रमुख रूप से आदिवासियों की अनूठी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए आगामी जनगणना प्रपत्र में ‘आदिवासी धर्म’ का कॉलम अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए.
  • इसके अलावा देश भर के आदिवासियों से आह्वान किया गया कि जब भी जातीय जनगणना हो, वे अपनी जाति, भाषा, संस्कृति और धर्म का नाम उसमें स्पष्ट रूप से दर्ज करें.
  • वर्ष 2027 में होने वाली आगामी राष्ट्रीय जनगणना को लेकर देश के सभी आदिवासियों से पुरजोर अपील की गई कि वे एकजुट होकर धर्म के कॉलम में केवल ‘आदिवासी धर्म’ ही अंकित कराएं.
  • सम्मेलन के मंच से महाराष्ट्र सरकार से राज्य में ‘आदिवासी धार्मिक न्यास बोर्ड’ का अविलंब गठन करने की पुरजोर मांग की गई.
  • धर्मकोड की मांग को जन-आंदोलन बनाने के लिए राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला और ग्रामीण स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ.

डिलिस्टिंग का विरोध और दिल्ली में राष्ट्रीय महासम्मेलन का फैसला

आदिवासी समाज की एकजुटता को तोड़ने के प्रयासों पर चिंता जताते हुए सम्मेलन में भाजपा और आरएसएस (RSS) की नीतियों की तीखी आलोचना की गई. वक्ताओं ने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्या और उनके अधिकारों को राजनीतिक रूप से समाप्त करने के लिए एक सोची-समझी साजिश के तहत ‘डिलिस्टिंग’ (Delisting) का राग अलापा जा रहा है, जिसका आदिवासी समाज पुरजोर विरोध करता है. इस आंदोलन को देशव्यापी धार देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत ‘कोर कमेटी’ का गठन करने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही, केंद्र सरकार पर सीधा दबाव बनाने के उद्देश्य से अगला विशाल राष्ट्रीय स्तर का आदिवासी धर्म सम्मेलन देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित करने का बड़ा फैसला लिया गया.

सम्मेलन में देश भर के दिग्गजों की रही मौजूदगी

इस ऐतिहासिक महासम्मेलन को सफल बनाने में विश्वनाथ वाकडे, भुवन कोराम, भगवान रावते, विनोद नागवंशी, गणेश गवली, हंसराज खेवरा, अभय भुंटकुंवर सहित झारखंड की महिला नेत्रियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं में सेलिना लकड़ा, शीला उरांव, जेनीता तिग्गा, अनीता लकड़ा, आशुतोष चेरो और अक्षय कुमार भोगता आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई और अपनी आवाज बुलंद की.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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