बंगाल चुनाव 2026 : NIA करेगी मालदा कांड की जांच, इलेक्शन कमीशन ने लिखी चिट्ठी
Malda Judicial Officers Hostage Case Nia Probe Eci Supreme Court West Bengal Election 2026
Malda Judicial Officers Hostage Case NIA Probe: पश्चिम बंगाल में मालदा जिले के कालियाचक में 7 जजों को बंधक बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इलेक्शन कमीशन ने NIA को चिट्ठी लिखकर मामले की जांच करने का आग्रह किया है. चुनाव आयोग ने कहा है कि जांच की रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को भेंजे. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अब 6 अप्रैल को होगी.
Malda Judicial Officers Hostage Case NIA Probe: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा के कालियाचक में 7 न्यायिक अधिकारियों (जजों) को बंधक बनाने के मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) करेगी. इलेक्शन कमीशन ने एनआईए के डायरेक्टर जनरल को इस संबंध में एक चिट्ठी लिखी है. चुनाव आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने इस चिट्ठी की कॉपी पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर और पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी को भी भेज दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिये थे एनआईए या सीबीआई जांच के आदेश
इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के सचिव ने एनआईए के डीजी से कहा है कि बंगाल में SIR की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैनात किये गये जजों के घेराव का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एनआईए या सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिये हैं. इसलिए आपसे आग्रह है कि मामले की जांच करें और इसकी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को दें.
मालदा कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मालदा कांड को ‘अक्षम्य अपराध’ और ‘लोकतंत्र को सीधी चुनौती’ करार दिया. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि यह हमला जजों का मनोबल तोड़ने की सुनियोजित साजिश थी.
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Malda Judicial Officers Hostage Case NIA Probe: चुनाव आयोग का एक्शन
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के कुछ ही घंटों के भीतर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने NIA के महानिदेशक को आधिकारिक पत्र लिखकर जांच करने और उसकी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपने का आग्रह किया.
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 बड़ी बातें
- NIA जांच का आदेश : सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि कल की घटना की जांच CBI या NIA जैसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए NIA अब इसकी जांच करेगी.
- सुनियोजित साजिश : कोर्ट ने माना कि यह घटना कोई सामान्य विरोध नहीं, बल्कि जजों को डराने और चुनावी प्रक्रिया (SIR) में बाधा डालने का एक ‘कैलकुलेटेड’ और ‘वेल-प्लान्ड’ था.
- प्रशासनिक विफलता : मालदा के डीएम, एसपी और राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव के रवैये को कोर्ट ने ‘अत्यंत निंदनीय’ बताया.
- रेस्क्यू के बाद भी हमला : कोर्ट ने नोट किया कि आधी रात को जब जजों को छुड़ाकर ले जाया जा रहा था, तब भी उनकी गाड़ियों पर पत्थर, बांस और ईंटों से हमले किये गये.
- बिना दाना-पानी के बंधक बनाया : जजों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाये रखा गया. उन्हें भोजन-पानी तक नहीं दिया गया.
- आपराधिक अवमानना : कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के काम में बाधा डालना ‘आपराधिक अवमानना’ (Criminal Contempt) के दायरे में आता है.
- जजों को सुरक्षा कवच : कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि जहां भी जज ड्यूटी पर हैं, वहां तत्काल केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Forces) की तैनाती की जाये.
- 5 लोगों से ज्यादा की एंट्री बैन : सुनवाई केंद्रों पर एक समय में 5 से ज्यादा लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है.
- मुख्य सचिव को नोटिस : कोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी और मालदा के डीएम-एसपी को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाये.
- 6 अप्रैल को अगली सुनवाई : सभी संबंधित अधिकारियों को 6 अप्रैल को वर्चुअली कोर्ट के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है.
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