फालता उपचुनाव में हार के बाद बढ़ी जहांगीर खान की मुसीबत, हाईकोर्ट ने छीना सुरक्षा कवच, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 26 May 2026 5:10 PM
Calcutta High Court Order on Jahangir Khan: कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी नेता जहांगीर खान को मिली अंतरिम राहत रद्द कर दी है. फालता उपचुनाव में हार और पार्टी से गद्दारी के आरोपों के बीच जहांगीर खान पर अब गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.
खास बातें
Calcutta High Court Order on Jahangir Khan: पश्चिम बंगाल के फालता विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त और पार्टी के भीतर ‘गद्दारी’ के आरोपों का सामना कर रहे नेता जहांगीर खान को कानूनी मोर्चे पर भी बड़ा झटका लगा है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए जहांगीर खान को दंडात्मक कार्रवाई से दी गयी अंतरिम राहत (Interim Relief) को रद्द कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद जहांगीर खान की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है.
कोर्ट से सुरक्षा कवच खत्म, कानूनी फंदा तैयार
जहांगीर खान के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों में उन्हें अब तक अदालत से गिरफ्तारी के खिलाफ सुरक्षा मिली हुई थी. मंगलवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उनकी दंडात्मक राहत को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि जांच के हित में अब आरोपी को दी गयी राहत जारी नहीं रखी जा सकती.
पुलिस को मिली छूट, जहांगीर पर दोहरी मार
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब स्थानीय पुलिस या राज्य की जांच एजेंसियां किसी भी पुराने या लंबित मामले में जहांगीर खान को हिरासत में ले सकती हैं. एक तरफ फालता उपचुनाव में महज 7,783 वोट पाकर चौथे नंबर पर खिसकना और दूसरी तरफ कोर्ट का यह सख्त रुख, जहांगीर खान के राजनीतिक भविष्य पर काले बादल मंडरा रहे हैं. जहांगीर पर दोहरी मार पड़ी है.
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हार के बाद टीएमसी के निशाने पर हैं जहांगीर
फालता उपचुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने जहांगीर खान पर ‘मैच फिक्सिंग’ और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से हाथ मिलाने का गंभीर आरोप लगाया था. टीएमसी का मानना है कि जहांगीर खान ने जान-बूझकर चुनाव के बीच में ‘सरेंडर’ किया, जिससे बीजेपी उम्मीदवार को 1 लाख से अधिक की लीड मिली.
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Calcutta High Court Order on Jahangir Khan: अगला कदम क्या?
गिरफ्तारी के डर से जहांगीर खान अब कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं, ताकि इस आदेश के खिलाफ उच्च पीठ या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सके. हालांकि, फिलहाल पुलिस उन पर लगे आरोपों और दर्ज एफआईआर (FIR) के आधार पर एक्शन लेने की तैयारी में जुट गयी है.
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