Film Review: बोरिंग है कपिल शर्मा की ''फिरंगी''
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Dec 2017 3:32 PM
II उर्मिला कोरी II फ़िल्म -फिरंगीनिर्माता – कपिल शर्मानिर्देशक- राजीव ढींगराकलाकार- कपिल शर्मा,इशिता दत्ता,अंजन श्रीवास्तव और अन्यरेटिंग- दो ‘कॉमेडी किंग’ के नाम से मशहूर कपिल शर्मा दो साल बाद रुपहले परदे पर फिर लौट आए हैं लेकिन सिर्फ कॉमेडी पर फोकस न कर वह फ़िल्म में और ज़्यादा कुछ परोसने के चक्कर में फ़िल्म को […]
II उर्मिला कोरी II
फ़िल्म -फिरंगी
निर्माता – कपिल शर्मा
निर्देशक- राजीव ढींगरा
कलाकार- कपिल शर्मा,इशिता दत्ता,अंजन श्रीवास्तव और अन्य
रेटिंग- दो
‘कॉमेडी किंग’ के नाम से मशहूर कपिल शर्मा दो साल बाद रुपहले परदे पर फिर लौट आए हैं लेकिन सिर्फ कॉमेडी पर फोकस न कर वह फ़िल्म में और ज़्यादा कुछ परोसने के चक्कर में फ़िल्म को एंटरटेनिंग के बजाय बोरिंग बना गए हैं. फ़िल्म की कहानी का बैकड्रॉप 1920 है जब भारत पर अंग्रेजों की हुकूमत थी. पंजाब के एक गाँव में भोला भाला मंगा (कपिल शर्मा) वह बेरोजगार हैं लेकिन उसकी एक खूबी है जिसकी वजह से अंग्रेजों के यहां उसे नौकरी मिल जाती है.
इसी बीच उसकी जिंदगी में सारगी(इशिता)आती है. वह सारगी से शादी करना चाहता है लेकिन गांधी भक्त सारगी के दादा अंग्रेजों के यहां काम करने वाले से अपनी पोती की शादी नहीं करना चाहते. कहानी में इस पेंच के साथ साथ एक पेंच और है कि अंग्रेज राजा के साथ मिलकर गाँव में शराब की फैक्ट्री लगवाना चाहते हैं. वह गांव को खाली करवाना चाहते हैं.
क्या मंगा इसमें अंग्रेजों की मदद करेगा. अंग्रेज़ और राजा के गंदे इरादे से वह अपने गाँव को किस तरह बचाता है और सारगी से उसकी शादी हो पाती है या नहीं इसके लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी. फ़िल्म की कहानी में नयापन नहीं है. फ़िल्म की रफ्तार बहुत धीमी है जिससे यह कुछ समय के बाद बोझिल लगने लगती है. फ़िल्म को लगान की सिर दर्द वाली कॉपी कहा जाए तो गलत न होगा.
कपिल की पहली फ़िल्म ‘किस किस को प्यार करूं’ पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म थी लेकिन इस बार कॉमेडी के साथ मेलोड्रामा और देशभक्ति भी डाल दी गयी है लेकिन ये मिलकर मज़ा किरकिरा करते हैं.
अभिनय की बात करें तो कॉमेडी में माहिर कपिल शर्मा को यह बात समझनी होगी कि अभिनय सिर्फ कॉमेडी का नाम नहीं है. उन्हें अपनी एक्टिंग स्किल पर काम करने की ज़रुरत है. अगर वह आगे भी एक्टिंग करना चाहते हैं. यह फ़िल्म पूरी तरह से कपिल शर्मा के कंधों पर थी और अभिनेता के तौर पर सबसे कमजोर उन्ही के कंधे साबित हुए. वह अपनी भूमिका में बिल्कुल सहज नहीं दिख रहे हैं. वे क्या कर रहे हैं जैसे उन्हें ही नहीं पता है.
इशिता दत्ता ठीक ठाक रही हैं. कुमुद मिश्रा जैसे मंझे अभिनेता लाउड रहे हैं. राजेश शर्मा सहित दूसरे किरदार भी औसत ही रह गए. फ़िल्म का गीत संगीत अति साधारण है. थिएटर से निकलने के बाद एक भी गीत याद नहीं रह जाते हैं. कॉमेडी किंग कपिल की मौजूदगी के बावजूद फ़िल्म के संवाद में अच्छे कॉमेडी पंचेस की कमी खलती है. फ़िल्म का प्रोडक्शन और दूसरे पहलू ठीक ठाक हैं. आखिर में अगर आप कपिल शर्मा के बहुत बड़े प्रसंशक हैं तो ही आप इस फ़िल्म को झेल सकते हैं.
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