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CAA का विरोध कर रहे मद्रास विवि के छात्रों के समर्थन में आये कमल हासन

Updated at : 18 Dec 2019 10:30 PM (IST)
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CAA का विरोध कर रहे मद्रास विवि के छात्रों के समर्थन में आये कमल हासन

चेन्नई : मक्कल नीधि मय्यम के प्रमुख कमल हासन ने बुधवार को यहां मद्रास विश्वविद्यालय का दौरा किया और संशोधित नागरिकता कानून का विरोध कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया. उन्होंने कानून को निरंकुश और निर्दयी बताया. हालांकि, हासन को मुख्य परिसर में घुसने की अनुमति नहीं दी गई और उन्होंने विरोध […]

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चेन्नई : मक्कल नीधि मय्यम के प्रमुख कमल हासन ने बुधवार को यहां मद्रास विश्वविद्यालय का दौरा किया और संशोधित नागरिकता कानून का विरोध कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया.

उन्होंने कानून को निरंकुश और निर्दयी बताया. हालांकि, हासन को मुख्य परिसर में घुसने की अनुमति नहीं दी गई और उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के पीछे से ही बात की.

हासन ने कहा कि वह विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ एकजुटता का भाव दिखाने के लिए गए थे. छात्रों के विरोध प्रदर्शन का बुधवार को तीसरा दिन था. हासन ने कहा कि वह विश्वविद्यालय में छात्रों के ‘रक्षक’ बन कर गए थे. उन्होंने कहा, उन्होंने मुझे भीतर नहीं घुसने दिया. वह कह सकते हैं कि तुम्हें भीतर जाने का क्या अधिकार है.

अभिनेता से नेता बने हासन ने कहा कि वह संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में आवाज बुलंद करते रहेंगे और छात्रों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करना उनकी प्रतिबद्धता है. उन्होंने कहा, पूरे भारत में इस प्रकार की आवाज ऊंची हो रही है और आप उन्हें चुप नहीं करा सकते.

उन्होंने सीएए को निरंकुश और निर्दयी बताते हुए उसे वापस लेने की मांग की. हासन ने कहा, अगर वे कहते हैं कि यह नहीं हो सकता तो यह एक ऐसा राष्ट्र है जिसने ब्रिटिश को बाहर किया. अगर कानून लोगों के उपयोग के लिए नहीं होगा तो उसे बदलना होगा.

सीएए का समर्थन करने पर आल इंडिया अन्ना द्रमुक की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, वह अपने मालिकों की आज्ञा का पालन करते हैं. जब पुलिस से हासन को विश्वविद्यालय परिसर में न घुसने देने पर सवाल किया गया तो एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि किसी को प्रवेश देने या न देने में उनका कोई हाथ नहीं था.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, द्वार की चाबियां विश्वविद्यालय अधिकारियों के पास हैं. उनसे जाकर पूछिए. विश्वविद्यालय अधिकारी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे.

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