Swiggy-Zomato पर ग्राहकों को नहीं मिल रहा पसंदीदा खाना, LPG की किल्लत का असर

गैस संकट से Swiggy-Zomato के ऑर्डर भी घटे (फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया )
LPG Crisis: LPG की किल्लत का असर अब फूड डिलीवरी पर भी दिखने लगा है. गैस की कमी से कई रेस्टोरेंट ने मेन्यू छोटा कर दिया है, जिससे Swiggy-Zomato पर मनपसंद खाना मिलना मुश्किल हो गया है.
LPG Crisis: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है. कई शहरों में कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कमी हो गई है, जिसका सीधा असर रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन पर पड़ रहा है. गैस की सप्लाई कम होने से कई रेस्टोरेंट अपना पूरा मेन्यू नहीं चला पा रहे हैं.
इसका असर फूड डिलीवरी ऐप्स पर भी दिख रहा है और ऑर्डर कम होने लगे हैं. डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर्स का कहना है कि पहले जहां उन्हें दिन में करीब 30 ऑर्डर मिल जाते थे, अब वही घटकर 5 से 10 ऑर्डर रह गए हैं. कई रेस्टोरेंट ने गैस बचाने के लिए अपने मेन्यू से रोटी, डोसा और पूरी जैसे ज्यादा गैस में बनने वाले खाने हटा दिए हैं. इससे ग्राहक भी मनपसंद खाना ऑर्डर नहीं कर पा रहे हैं.
50-60% तक ऑर्डर कैंसल
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन का कहना है कि गैस की कमी के कारण स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर 50-60% तक ऑर्डर कैंसल हो रहे हैं. इसकी वजह से डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर भी बड़ा असर पड़ा है. जो लोग पहले दिन में कई डिलीवरी करके अच्छी कमाई कर लेते थे, अब उन्हें मुश्किल से 4-5 डिलीवरी ही मिल पा रही हैं.
गिग वर्कर्स ने सरकार से की 4 मांगें
इस स्थिति को देखते हुए यूनियन ने सरकार के सामने 4 मांगें रखी हैं.
- प्रभावित गिग वर्कर्स को तुरंत ₹10,000 की आर्थिक मदद दी जाए.
- स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर आईडी डिएक्टिवेशन पर कम से कम 3 महीने की रोक लगाई जाए.
- इस दौरान डिलीवरी पार्टनर्स के लिए न्यूनतम आय या इंसेंटिव तय किया जाए.
- गैस की कमी से प्रभावित डिलीवरी पार्टनर्स, क्लाउड किचन स्टाफ और छोटे फूड कारोबारियों के लिए राहत पैकेज दिया जाए.
रेस्टोरेंट किचन LPG पर काफी निर्भर
जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज के मुताबिक देश की बड़ी क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) चेन में करीब 60 से 65% खाना LPG से ही पकाया जाता है. आम तौर पर इनके पास सिर्फ एक या दो हफ्ते का गैस स्टॉक ही होता है. रेस्टोरेंट किचन में लगभग 80% खाना एलपीजी सिलेंडर से बनता है, जबकि बाकी के लिए पाइपलाइन गैस जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं.
इसलिए अगर गैस की सप्लाई थोड़ी भी रुकती है तो कुछ ही दिनों में किचन का काम प्रभावित होने लगता है. मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेक्टर देश की कुल LPG खपत का करीब 8 से 10% हिस्सा इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में गैस की कमी का असर सीधे फूड इंडस्ट्री और उससे जुड़े लाखों लोगों की कमाई पर पड़ रहा है.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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