56 लाख में बिका 100 रुपये का 'हज नोट', जानें क्या है इसकी खासियत
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 08 Jan 2025 3:30 PM
लंदन की नीलामी में नीलाम किया जाने वाला सौ रुपये का पुराना नोट. फोटो साभार: सियासत डॉट कॉम
Indian Note Auction: भारत की मुद्रा का यह अनोखा हज नोट न केवल वित्तीय मूल्य रखता है, बल्कि यह भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है. इस तरह की नीलामियां यह दर्शाती हैं कि हमारी पुरानी मुद्राएं और सिक्के संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में कितने मूल्यवान हो सकते हैं. दुर्लभ नोटों में रुचि रखने वालों के लिए यह नीलामी एक प्रेरणा है.
Indian Note Auction: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा रुपया गिरावट की लगातार रिकॉर्ड बना रहा है. वहीं, भारतीय मुद्रा रुपया के पुराने नोट विदेश में पैसा और सुर्खियां दोनों बटोर रहे हैं. अभी हाल के दिनों में लंदन की एक अनोखी नीलामी के दौरान भारतीय 100 रुपये के एक दुर्लभ ‘हज नोट’ ने जमकर सुर्खियां बटोरी. इस नोट को 56,49,650 रुपये की भारी-भरकम कीमत में खरीदा गया. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस नोट को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1950 के दशक में खाड़ी देशों में हज यात्रियों के लिए जारी किया था.
क्या है हज नोट की खासियत
- यूनिक प्रीफिक्स: इस नोट की पहचान इसके अनूठे प्रीफिक्स ‘HA’ से होती थी. यह इसे दूसरे नोटों से अलग बनाता था.
- अलग रंग: हज नोट भारतीय मुद्रा के दूसरे स्टैंडर्ड नोटों से रंग में अलग थे.
- विशेष उपयोग: यह नोट भारत में वैध नहीं था, लेकिन इसे संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान जैसे खाड़ी देशों में इस्तेमाल किया जा सकता था.
- इतिहास: यह नोट हज यात्रियों को विशेष रूप से सोने की अवैध खरीदारी रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया था.
- दुर्लभता: 1970 के दशक में इन नोटों का प्रचलन समाप्त हो गया, जिससे यह आज दुर्लभ और संग्रहणीय बन गए हैं.
नीलामी की खास बातें
- विशेष सीरियल नंबर: इस 100 रुपये के हज नोट का सीरियल नंबर HA 078400 था.
- हज नोट का महत्व: नीलामी में इस नोट की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए बोली लगाई गई.
- दुर्लभता के कारण मांग: पुराने नोटों का संग्रह करने वालों के बीच यह दुर्लभ नोट अत्यधिक लोकप्रिय है.
दूसरे दुर्लभ नोट भी बने आकर्षण
इस नीलामी में 10 रुपये के दो और दुर्लभ नोट भी बेचे गए.
- 10 रुपये का नोट 6.90 लाख रुपये में बिका. यह 25 मई, 1918 को जारी किया गया था.
- इसकी ऐतिहासिक विशेषता प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश जहाज एसएस शिराला से जुड़ी है.
- 10 रुपये का दूसरे नोट 5.80 लाख रुपये में बिका.
- यह भी प्रथम विश्व युद्ध के समय का है.
- इन नोटों का संबंध जर्मन यू-बोट के हमले में डूबे जहाज के मलबे से है.
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हज नोट का ऐतिहासिक महत्व
हज नोट न केवल आर्थिक बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है. यह भारत के उन दिनों की झलक देता है, जब खाड़ी देशों में हज यात्रा पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की जाती थी.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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