डाबर, ब्रिटानिया, टाटा और इमामी ने बदला अपना ठिकाना; होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से बचने के लिए उठाया कदम

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FMCG Companies : पश्चिम एशिया संकट का भारतीय कंपनियों पर बड़ा असर! होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से बचने के लिए डाबर, ब्रिटानिया, टाटा और इमामी ने बदला अपना ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई रूट.

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FMCG Companies : अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष के चलते दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ता ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) इस समय भारी नाकेबंदी और रुकावटों का सामना कर रहा है.

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इसका सीधा असर भारत की दिग्गज एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय बिजनेस पर पड़ा है. अपने कारोबार को सुरक्षित रखने के लिए डाबर, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज़, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और इमामी जैसी बड़ी कंपनियों ने पश्चिम एशिया से अपनी मैन्युफैक्चरिंग (उत्पादन) और सोर्सिंग (कच्चा माल मंगाना) को भारत और अन्य सुरक्षित देशों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है.

डाबर (Dabar): लागत बढ़ी, पर जोखिम से बचने के लिए बदला रूट : डाबर की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का एक बहुत बड़ा हिस्सा यूएई (UAE) के रास अल खैमाह में केंद्रित था. लेकिन होर्मुज संकट के बाद कंपनी ने अपने प्रोडक्शन का कुछ हिस्सा वहां से हटाकर भारत, मिस्र (Egypt) और तुर्की में ट्रांसफर कर दिया है.

इन वैकल्पिक जगहों से एक्सपोर्ट (निर्यात) करने में कंपनी की लॉजिस्टिक्स लागत (Cost) काफी बढ़ गई है, जिससे आने वाले समय में डाबर के मुनाफे (मार्जिन) पर थोड़ा दबाव देखा जा सकता है.

ब्रिटानिया (Britannia): ओमान से गुजरात के मुंद्रा में शिफ्ट किया प्रोडक्शन : ब्रिटानिया ने अपनी रणनीति में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल किया है. कंपनी ने पश्चिम एशिया और नॉर्थ अमेरिकी बाजारों के लिए अपनी मुख्य मैन्युफैक्चरिंग को ओमान और दुबई से हटाकर गुजरात के मुंद्रा (Mundra) स्थित अपनी फैक्ट्री में ट्रांसफर कर दिया है.

अब मुंद्रा से माल समुद्री रास्ते के जरिए सीधे अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में भेजा जा रहा है. पहले ब्रिटानिया ने कम टैरिफ (टैक्स) का फायदा उठाने के लिए अपना प्रोडक्शन मुंद्रा से ओमान भेजा था, लेकिन अब सुरक्षा कारणों से उसे वापस भारत लाना पड़ा है.

ब्रिटानिया के सीईओ रक्षित हरगवे ने विश्लेषकों को बताया, “हमने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि हमारी मौजूदा सप्लाई चेन होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर न रहे. हमें पूरा भरोसा है कि इस तिमाही में हमारा एक्सपोर्ट प्रदर्शन काफी बेहतर रहेगा.”

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स: कच्चे माल के लिए ‘प्लान-बी’ तैयार : टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) अपने घरेलू प्रॉडक्ट्स के लिए प्लास्टिक के ढक्कन और पेट (PET) मटीरियल का आयात खाड़ी देशों से करती थी.

लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद कंपनी ने अपनी सोर्सिंग के स्रोतों को डायवर्सिफाई (विविध) कर लिया है ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न रहे. कंपनी के ‘कैपिटल फूड्स’ बिजनेस (जिसके तहत चिंग्स सीक्रेट और स्मिथ एंड जोन्स जैसे ब्रांड आते हैं) को मार्च तिमाही में अमेरिका एक्सपोर्ट के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. हालांकि, कंपनी के एमडी सुनील डी’सूज़ा ने राहत देते हुए बताया कि अब शिपिंग की स्थिति में काफी सुधार हुआ है.

इमामी (Emami): इंटरनेशनल बिजनेस में 5% की गिरावट, पर रिकवरी शुरू : इमामी पश्चिम एशिया में बिकने वाले अपने कुल प्रोडक्ट्स का करीब 50% हिस्सा यूएई (UAE) के भीतर ही बनाती थी, जिसके लिए 30% कच्चा माल यूरोप से आता था.

इस संघर्ष के कारण सप्लाई चेन टूटने से मार्च तिमाही में इमामी के इंटरनेशनल बिजनेस में 5% की गिरावट दर्ज की गई थी. इमामी के इंटरनेशनल बिजनेस के चीफ एग्जीक्यूटिव विवेक धीर ने बताया कि कंपनी को पश्चिम एशिया में अपने लोकल प्रोडक्शन में कटौती करनी पड़ी है. हालांकि, अप्रैल में 2% की ग्रोथ के साथ कंपनी फिर से पटरी पर लौट आई है. कंपनी को उम्मीद है कि जून 2026 तक हालात पूरी तरह स्थिर हो जाएंगे और दूसरी तिमाही से कंपनी दो अंकों (Double-Digit) की ग्रोथ हासिल कर लेगी.

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