तेल के दामों में फिर लगी आग, जानिए क्यों अचानक बढ़ गए रेट?
Published by : Soumya Shahdeo Updated At : 01 Jun 2026 9:20 AM
Crude Oil Price (Photo: Canva)
Crude Oil Price: क्रूड ऑयल की कीमतें फिर बढ़ीं. जानिए अमेरिका-ईरान बातचीत और होर्मुज संकट के बीच क्या अब सस्ते होंगे तेल के दाम या बढ़ेगा मिडिल ईस्ट का तनाव.
Crude Oil Price: सोमवार को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर बढ़ गईं. पिछले हफ्ते शुक्रवार को कीमतें करीब डेढ़ महीने (छह हफ्ते) के सबसे निचले स्तर पर बंद हुई थीं. लेकिन शनिवार और रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कुछ नया मोड़ आने से बाजारों में हलचल बढ़ गई और इन्वेस्टर्स ने नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है. फिलहाल ब्रेंट क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टैक्सस इंटरमीडिएट (WTI) 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है.
क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुलेगा?
इस समय पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज के रास्ते पर टिकी हैं, जो समुद्री रास्ते से होने वाले तेल व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है. अमेरिका (वाशिंगटन) और ईरान (तेहरान) के बीच एक ड्राफ्ट एग्रीमेंट को लेकर बातचीत चल रही है. वीकेंड पर दोनों देशों ने एक-दूसरे को कुछ सुधार (Amendments) सुझाए हैं. इसका मकसद मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाना और इस समुद्री रास्ते को दोबारा खोलना है. हालांकि, बातचीत तो चल रही है, लेकिन अभी तक किसी फाइनल समझौते की पक्की खबर सामने नहीं आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद कहा कि उन्हें ईरान के साथ मौजूदा शांति समझौते के आगे बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, उन्होंने यह शर्त भी दोहराई कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम रोकना होगा और इस समुद्री रास्ते को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पहले की तरह सुरक्षित बनाना होगा.
तेल के दाम अचानक क्यों घटने-बढ़ने लगे?
बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से भारी अनिश्चितता है. जब भी शांति की उम्मीद जगती है, तो कीमतें नीचे आती हैं. इसी उम्मीद के चलते इस साल पहली बार तेल की कीमतों में मासिक गिरावट (Monthly Decline) दर्ज की गई थी. इसके बावजूद, फरवरी के अंत में शुरू हुए इस विवाद से पहले तेल के जो दाम थे, उसके मुकाबले ब्रेंट क्रूड आज भी 25% से ज्यादा महंगा बिक रहा है. होर्मुज का रास्ता लगभग पूरी तरह बंद होने की वजह से दुनिया भर में तेल की सप्लाई चेन टूट गई है, जिससे कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है.
क्या खाड़ी देशों का तनाव कम हो रहा है?
हालात सुधरने के कुछ छोटे संकेत जरूर मिले हैं. जब यह विवाद शुरू हुआ था, तब फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में कई बड़े तेल टैंकर फंस गए थे. राहत की बात यह है कि इनमें से करीब एक-चौथाई (25%) गैर-ईरानी टैंकर अब वहां से सुरक्षित निकल चुके हैं. अगर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ती है, तो सप्लाई की यह रुकावट धीरे-धीरे खत्म हो सकती है. लेकिन इसी बीच एक और चिंता बढ़ गई है. बीते वीकेंड पर इजराइल ने लेबनान में अपना सैन्य अभियान तेज कर दिया है, क्योंकि हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल पर हमले बढ़ा दिए थे. हालांकि इजराइल इस समय अमेरिका-ईरान की सीधी बातचीत का हिस्सा नहीं है, लेकिन मिडिल ईस्ट का यह बढ़ता तनाव तेल की सप्लाई के लिए नया खतरा बना हुआ है.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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