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FasTag Rules Change: फास्टैग नियमों में हो गया बदलाव, 1 अप्रैल से होगा लागू

Updated at : 08 Jan 2025 2:31 PM (IST)
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FASTag Annual Pass

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FasTag Rules Change: महाराष्ट्र सरकार ने डिजिटल युग की ओर बढ़ने की दिशा में फास्टैग नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इससे वाहन चालकों को राहत मिलेगी और टोल संग्रह में पारदर्शिता आएगी.

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FasTag Rules Change: महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने ट्रैफिक नियमों को आसान बनाने के लिए फास्टैग नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है. फास्टैग से जुड़े नये नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू हो जाएंगे. सरकार के नए नियमों के तहत सभी वाहनों पर फास्टैग लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. सरकार का यह कदम ईंधन और समय की बचत के साथ-साथ टोल कलेक्शन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का प्रयास है.

फास्टैग का फायदा

फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली है, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक का इस्तेमाल करती है. वाहन पर फास्टैग लगाने से टोल प्लाजा पर बिना रुके टोल का भुगतान किया जा सकता है. इससे नकद लेन-देन की आवश्यकता समाप्त होती है और वाहनों की लंबी कतारों से बचा जा सकता है.

फास्टैग का नया नियम और जुर्माना

महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन वाहनों पर फास्टैग नहीं होगा, उन्हें टोल का दोगुना भुगतान करना पड़ेगा. यह प्रावधान सुनिश्चित करेगा कि वाहन चालक समय रहते फास्टैग का उपयोग करना शुरू करें. यह नियम सभी निजी और व्यावसायिक वाहनों पर लागू होगा.

नए नियम के पीछे सरकार का उद्देश्य

महाराष्ट्र सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम को कम करना, ईंधन की खपत को नियंत्रित करना और टोल कंट्रोल में पारदर्शिता लाना है. इसके साथ ही, महाराष्ट्र सरकार डिजिटल इंडिया अभियान के तहत डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह नियम न केवल डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देगा, बल्कि राज्य के राजस्व संग्रह को भी अधिक सटीक बनाएगा. टीवी9 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम महाराष्ट्र सरकार के स्मार्ट और डिजिटल टोल प्लाजा के उद्देश्य को साकार करेगा.

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फास्टैग के नए नियम की चुनौतियां

महाराष्ट्र सरकार का यह निर्णय टोल प्लाजा पर यातायात को व्यवस्थित करने, कागजी लेन-देन की आवश्यकता समाप्त करने और समय की बचत में सहायक होगा. हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और फास्टैग खरीदने की प्रक्रिया में चुनौतियां आ सकती हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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