'पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 1,00,00,000 लोगों को गरीब बना सकती है कोरोना महामारी'
Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 31 Mar 2020 4:54 PM
कोरोना वायरस महामारी वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है. वहीं, इसका आम जनजीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ने वाला है.
वाशिंगटन : कोरोना वायरस महामारी वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है. वहीं, इसका आम जनजीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ने वाला है. विश्वबैंक ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में लगभग 1.1 करोड़ लोग गरीबी के जाल में फंस सकते हैं. इस बीमारी से दुनिया भर में 7.80 लाख लोग संक्रमित हैं और 37,000 से अधिक की मौत हो चुकी है.
विश्वबैंक की सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि इससे पहले अनुमान लगाया गया था कि 2020 में पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के करीब 3.5 करोड़ लोग गरीबी से उबर जाएंगे. रिपोर्ट में कहा गया कि यदि आर्थिक स्थिति और अधिक बिगड़ती, तो सबसे बुरी दशाओं में गरीबों की संख्या करीब 1.1 करोड़ बढ़ जाएगी.
बैंक ने कहा है कि विकासशील पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में वृद्धि दर के धीमी होकर 2.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि सबसे बुरी दशा में यह नकारात्मक 0.5 फीसदी हो सकती है. इस क्षेत्र की 2019 में अनुमानति वृद्धि दर 5.8 फीसदी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुमान के मुताबिक चीन की वृद्धि दर 2019 के 6.1 फीसदी से घटकर 0.1 फीसदी से 2.3 फीसदी के बीच रह सकती है.
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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