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जीडीपी ग्रोथ रेट में गिरावट के बाद पीएम मोदी लेंगे वित्त मंत्री समेत अफसरों की क्लास

Updated at : 18 Sep 2017 10:38 PM (IST)
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जीडीपी ग्रोथ रेट में गिरावट के बाद पीएम मोदी लेंगे वित्त मंत्री समेत अफसरों की क्लास

नयी दिल्लीः अर्थव्यवस्था में नरमी को लेकर चिंतित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थिति का जायजा लेने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के उपायों पर चर्चा के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ मंगलवार को बैठक करेंगे. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मोदी आर्थिक स्थिति से संबद्ध विभिन्न पहलुओं के बारे […]

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नयी दिल्लीः अर्थव्यवस्था में नरमी को लेकर चिंतित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थिति का जायजा लेने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के उपायों पर चर्चा के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ मंगलवार को बैठक करेंगे. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मोदी आर्थिक स्थिति से संबद्ध विभिन्न पहलुओं के बारे में जेटली और वित्त मंत्रालय के सचिवों के साथ चर्चा करेंगे तथा अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उपाय तलाशेंगे.

इसे भी पढ़ेंः नोटबंदी के बाद चालू वित्त वर्ष पहली ही तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 0.4 फीसदी फिसली

हाल ही में जारी पहली तिमाही के जीडीपी वृद्धि आंकड़े आने के बाद यह बैठक हो रही है. वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि 5.7 प्रतिशत रही, जो तीन साल का न्यूनतम स्तर है. इससे पूर्व वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 7.9 प्रतिशत तथा पिछली तिमाही जनवरी-मार्च तिमाही में 6.1 प्रतिशत रही थी. सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगातर छठी तिमाही में घटी है.

आर्थिक समीक्षा-दो में यह अनुमान जताया गया है कि अपस्फीति दबाव के कारण चालू वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करना संभव नहीं होगा. निर्यात के समक्ष भी चुनौतियां हैं और औद्योगिक वृद्धि दर पांच साल में न्यूनतम स्तर पर आ गयी है. अप्रैल-जून तिमाही में चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर जीडीपी का 2.4 प्रतिशत या 14.3 अरब डालर पहुंच गया. मुख्य रूप से व्यापार घाटा बढने से कैड बढ़ा है.

इसके साथ ही, बताया यह भी जा रहा है कि बैठक में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने के साथ हो रही कठिनाइयों, नोटबंदी के बाद के प्रभाव और राजकोषीय गुंजाइश जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. इसमें प्रत्यक्ष एवं परोक्ष कर संग्रह के साथ-साथ साल के अनुमान को भी प्रधानमंत्री के समक्ष पेश किया जा सकता है.

सरकार के वित्त के बारे में पूरी तस्वीर पेश करने के लिए विनिवेश राशि के बारे में भी प्रधानमंत्री को जानकारी दी जा सकती है. सूत्रों के अनुसार, बैठक में आर्थिक वृद्धि को गति देने, रोजगार सृजन और निजी निवेश को पटरी पर लाने के उपायों पर चर्चा की जा सकती है.

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