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Bihar Election 2025: बिहार चुनाव से पहले अफसरशाही की सियासी एंट्री, कई पूर्व IAS-IPS मैदान में उतरने को तैयार

Updated at : 28 Jul 2025 11:45 AM (IST)
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ias ips of bihar| Bihar Election 2025: Many former IAS-IPS of Bihar will contest assembly elections

IPS शिवदीप लांडे, आईपीएस जय प्रकाश सिंह और आईएएस दिनेश कुमार राय की तस्वीर

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में रिटायर्ड अफसरों की सियासी एंट्री ने हलचल मचा दी है. कई पूर्व IAS और IPS अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इनमें कुछ नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं, तो कुछ प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के सहारे नई राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं.

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Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति में एक नई लहर देखी जा रही है, जहां रिटायर्ड IAS और IPS अधिकारी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. राज्य में विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं और इस बार की चुनावी तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है. कई पूर्व शीर्ष अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर सीधे जनता के बीच जाने की योजना बना चुके हैं.

इन अफसरों में ऐसे चेहरे भी शामिल हैं, जो प्रशासनिक सेवा में रहते हुए सीएम नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते थे. वहीं कुछ ने पहले ही राजनीतिक दलों की सदस्यता लेकर चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है.

नीतीश के पूर्व सचिव दिनेश कुमार राय मैदान में

सबसे चर्चित नामों में एक हैं बिहार सरकार के पूर्व सचिव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निजी राजनीतिक सचिव रह चुके आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार राय. उन्होंने VRS लेने के बाद करगहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर की है. कुर्मी समुदाय से आने वाले राय स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ रखते हैं और जमीनी राजनीति में उनकी पैठ बताई जा रही है.

ADG रह चुके IPS जय प्रकाश सिंह जन सुराज में शामिल

2000 बैच के आईपीएस अधिकारी जय प्रकाश सिंह, जो हिमाचल प्रदेश में एडीजी पद पर कार्यरत थे, VRS लेकर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में शामिल हो गए हैं. वे सारण जिले की छपरा विधानसभा सीट से किस्मत आजमाने वाले हैं. जन सुराज पार्टी उन ब्यूरोक्रेट्स के लिए आकर्षण का केंद्र बनती दिख रही है जो राजनीतिक दलों में अवसर की तलाश कर रहे हैं.

शिवदीप लांडे ने बनाई अपनी पार्टी

बिहार के ‘सिंघम’ कहे जाने वाले पूर्व आईपीएस शिवदीप लांडे ने भी सियासी पारी की शुरुआत कर दी है. VRS लेने के बाद उन्होंने ‘हिंद सेना पार्टी’ का गठन किया है और दावा किया है कि उनकी पार्टी बिहार की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

IPS आनंद मिश्रा भी राजनीति में, मगर सफर उतार-चढ़ाव वाला

असम-मेघालय कैडर के आईपीएस आनंद मिश्रा ने बक्सर से बीजेपी टिकट की उम्मीद में VRS लिया था. हालांकि टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने जन सुराज पार्टी जॉइन की और बाद में उसे भी छोड़ दिया.

अन्य अफसर भी तैयार कर रहे सियासी पिच

बिहार के पूर्व डीएम अरविंद कुमार सिंह, पूर्व संयुक्त सचिव गोपाल नारायण सिंह और नवादा के पूर्व डीएम लल्लन यादव भी जन सुराज के जरिए सियासी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. उधर ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा जेडीयू में शामिल होकर संगठन में महासचिव बनाए गए हैं और नालंदा से चुनाव लड़ सकते हैं.

बिहार की परंपरा रही है अफसरों की सियासी मौजूदगी

बिहार की राजनीति में अफसरों की एंट्री नई नहीं है. यशवंत सिन्हा, आर.के. सिंह, एन.के. सिंह, आरसीपी सिंह जैसे कई अधिकारी राजनीति में सफल हो चुके हैं. हालांकि कुछ उदाहरण ऐसे भी हैं जैसे गुप्तेश्वर पांडेय, जो टिकट न मिलने के बाद राजनीति से बाहर हो गए.

पूर्व केंद्रीय सचिवालय सेवा अधिकारी और बिहार विधान परिषद के MLC सर्वेश कुमार का मानना है, “अगर अफसर राजनीति में भी ‘बाबू’ बनकर रहेंगे, तो असफल हो जाएंगे. लेकिन जिन्हें जनसंपर्क और प्रशासनिक अनुभव है, उनके लिए राजनीति में संभावनाएं हैं.”

नीतीश और मोदी- दोनों का भरोसा अफसरों पर

ब्यूरोक्रेट्स पर भरोसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक जैसी सोच रखते हैं. मोदी सरकार में एस. जयशंकर, आर.के. सिंह, अश्विनी वैष्णव जैसे पूर्व अधिकारी मंत्री हैं, वहीं नीतीश कुमार ने अपने विश्वस्त अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद भी अहम पदों पर बनाए रखा है.

2019 में सेवानिवृत्त हुए 1984 बैच के आईएएस दीपक कुमार को नीतीश ने फिर से अपने प्रधान सचिव के रूप में पदस्थापित किया. इसके अलावा, चंचल कुमार और अतुल प्रसाद जैसे अफसरों के साथ उनका रिश्ता इतना गहरा है कि कई बार मंत्रियों को नाराज होकर इस्तीफा देना पड़ा. 2022 में समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी ने इसी वजह से इस्तीफा दिया था.

राजनीति में अफसरों की बढ़ती भूमिका

बिहार के आगामी चुनाव इस मायने में अलग हो सकते हैं क्योंकि यहां राजनीति का रुख अब सिर्फ परंपरागत नेताओं से नहीं, बल्कि अफसरशाही की दुनिया से आए चेहरों से भी तय हो सकता है. जिस तरह से VRS लेने वालों की संख्या बढ़ रही है और राजनीतिक दल उन्हें टिकट देने को तैयार हैं, यह साफ है कि चुनाव 2025 में नई शक्ल ले सकता है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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