ePaper

ईरान के वाटर प्लांट पर US का हमला, विदेश मंत्री का आरोप; 30 गांवों का पानी रुका

Updated at : 08 Mar 2026 9:24 AM (IST)
विज्ञापन
Iran Desalination Plant Attacked

ईरान के विदेश मंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

US Attacks Iran Water Plant: ईरान ने अमेरिका पर पीने के पानी की व्यवस्था को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार शाम सोशल मीडिया पर कहा कि केश्म द्वीप पर स्थित पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट पर हमला कर अमेरिका ने एक खतरनाक और गलत उदाहरण पेश किया है.

विज्ञापन

US Attacks Iran Water Plant: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध में अब सिर्फ इमारतें और सैन्य ठिकाने ही निशाने पर नहीं हैं. ईरान के विदेश मंत्री ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर स्थित एक डीसेलिनेशन प्लांट (समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाली सुविधा) पर हमला किया है. उनके मुताबिक इस हमले के कारण आसपास के करीब 30 गांवों की पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है. अराघची ने शनिवार शाम सोशल मीडिया पर कहा कि पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट पर हमला करके अमेरिका ने एक खतरनाक और गलत मिसाल पेश की है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अमेरिका की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ने केश्म द्वीप पर स्थित मीठे पानी के विलवणीकरण संयंत्र पर हमला कर एक गंभीर और हताश अपराध किया है. इस हमले से 30 गांवों की जलापूर्ति बाधित हुई है. किसी देश के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बेहद खतरनाक कदम है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. यह खतरनाक मिसाल अमेरिका ने पेश की है, ईरान ने नहीं.’ इस आरोप को लेकर अमेरिका या इजरायल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

पानी की आपूर्ति पर हमले के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बाद में कहा कि यह हमला दक्षिण के एक पड़ोसी देश के एयरबेस के समर्थन से किया गया था. उन्होंने कहा कि जब तक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, तब तक देशों को शांति नहीं मिल सकती. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बहरीन के जुफैर एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी बलों को निशाना बनाया.

पानी पर संकट से फैलेगी अराजकता

यह हमला केश्म द्वीप पर स्थित मीठे पानी के विलवणीकरण संयंत्र (डीसेलिनेशन प्लांट) पर हुए हमले के जवाब में किया गया. अटलांटिक काउंसिल के वरिष्ठ सलाहकार हार्लन उलमैन ने अल जजीरा से कहा कि अगर पानी की आपूर्ति से जुड़े ठिकानों पर हमले बढ़े तो इससे खाड़ी क्षेत्र में ‘और ज्यादा अराजकता’ फैल सकती है. उन्होंने कहा, ‘खाड़ी क्षेत्र में लगभग 95 प्रतिशत पानी डीसेलिनेशन से आता है. अगर ईरान इन संयंत्रों और जल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाता है, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र ठप हो सकता है.’

युद्ध के बीच गहराता जल संकट

भले ही दुनिया इस समय युद्ध के कारण तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंतित हो, लेकिन ईरान के सामने पानी का संकट बेहद गंभीर है. यह देश पहले से ही दुनिया के सबसे अधिक जल संकट झेलने वाले देशों में गिना जाता है. यहां उपलब्ध लगभग सभी नवीकरणीय जल संसाधनों का उपयोग कृषि, उद्योग और घरेलू जरूरतों में पहले से ही हो रहा है. पानी की कमी की वजह से ईरान अपनी राजधानी बदलने पर भी विचार कर रहा है.

सितंबर 2025 में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने राजधानी बदलने की जरूरत पर जोर दिया था. उनका कहना है कि तेहरान गंभीर आर्थिक और पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है. यहां जल संकट, भू-धंसाव और तेजी से बढ़ती आबादी बड़ी समस्या बन चुकी है. तेहरान, करज और कज्विन जैसे इलाके पानी की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि राजधानी तेहरान में अब एक करोड़ से अधिक लोग रहते हैं और देश के कुल पानी का लगभग 25 प्रतिशत इस्तेमाल होता है.

ये भी पढ़ें:- मोटी चमड़ी और मांस कड़वा… हम आसान शिकार नहीं: ईरानी हमले पर पहली बार बोले UAE के राष्ट्रपति

मकरान में राजधानी बनाने का था प्लान

ईरान में उपलब्ध कुल पानी का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा खेती में इस्तेमाल होता है. वहीं पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और आर्थिक दबावों के कारण देश की सिंचाई व्यवस्था आधुनिक नहीं हो पाई है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी होती है. घटती बारिश, सूखते बांध और हर साल करीब 30 सेंटीमीटर जमीन धंसने जैसी स्थितियों के कारण सरकार विकास का रुख फारस की खाड़ी के तट पर स्थित मकरान क्षेत्र की ओर मोड़ने पर विचार कर रही थी. यहां चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह मौजूद हैं और इसे संभावित नई राजधानी के रूप में भी देखा जा रहा था. हालांकि फरवरी–मार्च 2026 के युद्ध ने ईरान की सुरक्षा स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है.

दूसरे सप्ताह में पहुंचा संघर्ष

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के पहले सप्ताह में अमेरिका और इजरायल के हमलों में 1300 से अधिक ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है. 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई, रक्षा मंत्री सहित कई वरिष्ठ नेता और लगभग 40 शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए थे.

ये भी पढ़ें:- ये ख्वाब कब्र तक ले जाएं ट्रंप… ईरानी राष्ट्रपति का ‘सरेंडर’ से इनकार, पड़ोसियों से मांगी माफी

ईरान के जवाबी हमले

ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. ईरानी हमलों में इजरायल के कई शहरों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं. इजरायल ने अब तक देश में 11 लोगों की मौत की पुष्टि की है. इसके अलावा ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए हैं. कुवैत में किए गए हमलों में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत होने की जानकारी सामने आई है.

विज्ञापन
Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola