पीएम मोदी को दिखाया 'सपेरा', नॉर्वे की 'फ्री प्रेस' पर रेसिज्म का आरोप, फूटा जनता का गुस्सा

Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 20 May 2026 10:36 AM

विज्ञापन

पीएम मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री प्रेस कांफ्रेंस के दौरान. इनसेट में कार्टून.

PM Modi Snake Charmer Cartoon: नॉर्वे के अखबार Aftenposten में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘स्नेक चार्मर’ यानी सपेरे के रूप में दिखाने वाले कार्टून पर विवाद छिड़ गया है. सोशल मीडिया पर इसे नस्लवादी और भारत विरोधी बताया जा रहा है.

विज्ञापन

PM Modi Snake Charmer Norway: नॉर्वे के एक प्रमुख अखबार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विवादित कार्टून प्रकाशित होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है. इस कार्टून में पीएम मोदी को स्नेक चार्मर यानी सांप सपेरा के रूप में दिखाया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे नस्लवादी और औपनिवेशिक मानसिकता से जुड़ा बताया. यह मामला ज्यादा चर्चा में तब आया है, जब नॉर्वे दौरे के दौरान पीएम मोदी से मीडिया के सवाल न लेने को लेकर एक पत्रकार ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए.

नॉर्वे के अखबार Aftenposten में छपे कार्टून में पीएम मोदी को हाथ में एक ऐसी पाइप पकड़े दिखाया गया, जो बीन जैसी लग रही है. वहीं सामने लकड़ी के बक्से में सांप जैसा दिखने वाला पेट्रोल स्टेशन वाला पाइप है. यह चित्र एक ओपिनियन आर्टिकल के साथ प्रकाशित हुआ था, जिसका शीर्षक ‘एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी’ था. कार्टून सामने आने के बाद इंटरनेट पर लोगों ने इसे भारत की पुरानी छवि से जोड़ने की कोशिश बताया.

सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी

कार्टून को लेकर सोशल मीडिया पर भारी गुस्सा देखने को मिला. कई यूजर्स ने कहा कि यह भारत को ‘सांप सपेरों का देश’ बताने वाली पुरानी पश्चिमी सोच को दोहराता है. एक यूजर ने एक्स पर लिखा कि यह कार्टून साफ तौर पर नस्लवादी है. उसने कहा कि पीएम मोदी खुद कई बार बता चुके हैं कि दुनिया पहले भारत को ‘सपेरों का देश’ मानती थी, लेकिन अब वही सोच फिर सामने लाई जा रही है. लोगों का मानना है कि यूरोप अब भी अपनी औपनिवेशिक कल्पनाओं से बाहर नहीं निकल पाया है. कई अन्य लोगों ने भी कहा कि पश्चिमी मीडिया के कुछ हिस्सों में आज भी औपनिवेशिक अहंकार मौजूद है.

तो ऐसी दिखती है दुनिया की फ्री प्रेस!

एक्सपर्ट बोले- कार्टून नॉर्वे की पत्रकारिता की सतही सोच

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस रिपोर्ट की तीखी आलोचना की. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ’56 लाख लोगों वाले एक आत्म-संतुष्ट देश का यह कार्टून काफी परेशान करने वाला है; इस देश के पास न तो कोई ऐतिहासिक या सभ्यतागत गहराई है, न ही जटिल और विविध समाजों को संभालने का अनुभव, और न ही उन चुनौतियों की गहराई का अंदाजा है जिनका सामना 140 करोड़ लोगों वाला देश करता है. इसमें भारत के बारे में ‘सपेरे’ वाली एक अपमानजनक रूढ़िवादी छवि का सहारा लिया गया है, जिसमें नस्लवादी झलक भी दिखाई देती है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘भारत को नॉर्वे के तेल की जरूरत नहीं है. उसके पड़ोस में ही तेल से समृद्ध कई विशाल देश मौजूद हैं. भारत को उन्हें लुभाने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत खुद एक बहुत बड़ा बाजार है और तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है. यह कार्टून नॉर्वे की पत्रकारिता की सतही सोच को दर्शाता है, क्योंकि यह उस देश का सबसे बड़ा समाचार पत्र है.’

नॉर्वे में प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद

यह विवाद उस समय बढ़ा है, जब नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम मोदी से पूछा कि उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गार स्टोर के साथ संयुक्त कार्यक्रम में दुनिया के नंबर 1 मीडिया के सवाल क्यों नहीं लिए. पत्रकार ने यह भी पूछा कि खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं हुई और भारत में प्रेस की स्वतंत्रता तथा मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई. इसी दौरान हेले लिंग ने कहा कि भारत प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 157 वें नंबर पर है, जबकि नॉर्वे पहले नंबर पर है. हालांकि पीएम मोदी ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया और वहां से चले गए. लिंग ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किया और यह अंतरराष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया.

ये भी पढ़ें:- ‘वेलकम टू रोम माय फ्रेंड’, इटली पहुंचे PM मोदी के साथ जॉर्जिया मेलोनी ने शेयर की सेल्फी, खास अंदाज में हुआ स्वागत

विदेश मंत्रालय ने दिया कड़ा जवाब

इस विवाद पर भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि कई लोग देश की वास्तविकता समझे बिना चुनिंदा रिपोर्ट्स के आधार पर राय बना लेते हैं. सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत बहुत बड़ा और विविधताओं वाला देश है. उनके अनुसार, सिर्फ दिल्ली में ही करीब 200 टीवी चैनल हैं, जो अंग्रेजी, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में लगातार खबरें प्रसारित करते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की आलोचना करने वाले लोग कुछ गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की रिपोर्ट पढ़कर सवाल उठाते हैं, जबकि उन्हें भारत के पैमाने और जटिलताओं की पूरी समझ नहीं होती. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है और किसी भी अधिकार के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराता है.

ये भी पढ़ें:- कौन हैं सिबी जॉर्ज, जिन्होंने नॉर्वे में भारत का पक्ष जोरदार तरीके से रखा

पहले भी हो चुका है ऐसा विवाद

यह पहली बार नहीं है जब भारत को लेकर इस तरह की प्रतीकात्मक छवि पर विवाद हुआ हो. साल 2022 में एक स्पेनिश अखबार ने भारत की आर्थिक प्रगति पर रिपोर्टिंग करते समय ‘सांप सपेरा’ वाली छवि का इस्तेमाल किया था, जिस पर काफी आलोचना हुई थी.

विज्ञापन
Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola