ताइवान के चुनावी पोस्टर में लगा भारत-विरोधी बिलबोर्ड, झंडे और पगड़ी का इस्तेमाल, खुलेआम नस्लवाद के आरोप
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 20 May 2026 6:48 AM
ताइवान में चुनावी उम्मीदवार का पोस्टर. फोटो- स्क्रीनग्रैब.
Taiwan Election Anti India: ताइवान में भारतीय प्रवासी मजदूरों को लेकर विवाद गहरा गया है. स्थानीय चुनाव उम्मीदवार ली होंग-यी के पोस्टर में भारतीय झंडे और पगड़ी वाले व्यक्ति की तस्वीर पर ‘नो’ का निशान लगाने से नस्लभेद के आरोप लगे हैं. जानिए भारत-ताइवान माइग्रेंट वर्कर समझौते पर क्यों हो रहा विरोध.
Taiwan Election Anti India: ताइवान में भारतीय प्रवासी मजदूरों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. दक्षिणी ताइवान में स्थानीय चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार ने ऐसा चुनावी पोस्टर लगवाया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और पगड़ी पहने एक व्यक्ति की तस्वीर पर ‘नो’ का निशान बनाया गया था. इस पोस्टर को सोशल मीडिया पर नस्लीय भेदभाव और सांस्कृतिक अपमान के रूप में देखा जा रहा है.
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब ताइवान भारत से मजदूरों को बुलाने की तैयारी कर रहा है. दोनों देशों के बीच 2024 में प्रवासी श्रमिकों को लेकर एक समझौता (MoU) भी हुआ था. हालांकि, ताइवान की विपक्षी पार्टी KMT लगातार इस योजना का विरोध कर रही है और भारतीय मजदूरों को लेकर डर का माहौल बना रही है.
कौन है पोस्टर लगाने वाला उम्मीदवार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पोस्टर काओशुंग सिटी के सियाओगांग डिस्ट्रिक्ट के बरो वार्डन और स्वतंत्र उम्मीदवार ली होंग-यी ने लगवाया था. वह आने वाले सिटी काउंसिल चुनाव लड़ रहे हैं. पोस्टर में भारतीय झंडे और पगड़ी पहने व्यक्ति की तस्वीर पर लाल रंग का प्रतिबंध वाला निशान लगाया गया था. ली होंग-यी ने कहा कि उनका मकसद भारत से मजदूर बुलाने की ताइवान की योजना का विरोध करना था. हालांकि, पोस्टर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई. कई लोगों ने इसे सीधे तौर पर नस्लीय भेदभाव बताया.
भारतीय समुदाय ने जताई नाराजगी
ताइवान में करीब 7,000 भारतीय रहते हैं और ज्यादातर हाई-टेक इंडस्ट्री में काम करते हैं. इनमें Realtek, Foxconn और TSMC जैसी कंपनियों से जुड़े लोग शामिल हैं. ताइवान में रहने वाले एक भारतीय नागरिक ने इस पोस्टर को ‘खुला और सीधा नस्लीय भेदभाव’ बताया.
सोशल मीडिया पर लिखे अपने संदेश में उन्होंने कहा कि किसी सरकारी नीति से असहमति होना अलग बात है, लेकिन किसी समुदाय की पहचान और सांस्कृतिक प्रतीकों को निशाना बनाना गलत है. उन्होंने कहा कि पोस्टर में लोगों की शारीरिक पहचान और सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर एक खास समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश दिखाई देती है.
स्थानीय नेताओं ने भी किया विरोध
न्यू पावर पार्टी के काओशुंग चैप्टर प्रमुख वांग यी-हेंग ने भी ली होंग-यी के पोस्टर की आलोचना की. उन्होंने कहा कि भारतीय झंडे और पगड़ी पर प्रतिबंध का निशान लगाना बेहद अज्ञानतापूर्ण कदम है. वांग ने कहा कि पगड़ी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि सम्मान, आस्था और पहचान का प्रतीक है. ऐसे प्रतीकों को निशाना बनाना सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देता है. लेकिन काओशुंग में लगाए गए इस पोस्टर ने अब बहस को सीधे नस्लभेद और सांस्कृतिक सम्मान के मुद्दे तक पहुंचा दिया है.
ताइवान की सरकार का क्या है रुख
ताइवान और भारत के बीच 2024 में प्रवासी श्रमिकों को लेकर समझौता हुआ था. इसके तहत भारत से मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और केयरगिविंग सेक्टर में मजदूरों की भर्ती की जानी है. ताइवान के श्रम मंत्री हंग सुन-हान ने संसद में कहा था कि शुरुआती चरण में 2026 में करीब 1,000 भारतीय मजदूरों को ताइवान लाया जा सकता है.
फिलहाल दोनों देश दस्तावेजों की जांच, हेल्थ स्क्रीनिंग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर काम कर रहे हैं. ताइवान सरकार का कहना है कि देश में घटती जनसंख्या और बुजुर्ग आबादी बढ़ने के कारण कई सेक्टर में कर्मचारियों की कमी हो रही है. ऐसे में विदेशी श्रमिकों की जरूरत बढ़ गई है.
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विपक्षी KMT क्यों कर रही विरोध?
विपक्षी पार्टी KMT लगातार इस योजना पर सवाल उठा रही है. पार्टी के कुछ नेताओं ने दावा किया कि भारतीय मजदूर अपराध बढ़ा सकते हैं और ‘भाग’ सकते हैं. उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी बयान दिए गए.
भारतीय अपराध आंकड़ों का हवाला देकर डर फैलाने की कोशिश
ताइवान की संसद में KMT विधायक हुआंग चिएन-पिन ने भारत के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि भारत में 2022 में महिलाओं के खिलाफ 4,45,256 अपराध दर्ज हुए, जिनमें 31,000 से ज्यादा रेप केस शामिल थे.
हुआंग ने दावा किया कि ये आंकड़े भारतीय मजदूरों को ताइवान लाने को लेकर चिंता पैदा करते हैं और सरकार को ज्यादा सख्त निगरानी करनी चाहिए. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि भारत की विशाल आबादी और भौगोलिक आकार की तुलना ताइवान जैसे छोटे देश से करना सही नहीं है.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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