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ईरान के पहलवी राजघराने में यहूदी दामाद, 2500 साल बाद हुआ ऐसा, प्रिंसेस ईमान ने की है जुईश बिजनेसमैन से शादी

Updated at : 12 Jan 2026 1:56 PM (IST)
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Iran Princess is Iman Pahlavi married to Jewish man 2500 years Old Purim story of Esther resurfaces.

ईरान की राजकुमारी इमान ने यहूदी बिजनेसमैन ब्रैडली शेरमैन से शादी की है. फोटो- इंस्टाग्राम और एक्स.

Iran Princess Iman Pahlavi married Jewish Man: ईरान में मौजूदा सरकार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं. दिसंबर के अंत में शुरू हुए आर्थिक विरोध प्रदर्शनों पर वे लगातार लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील कर रहे हैं. इस आंदोलन में उनकी बेटियां भी सोशल मीडिया के जरिए सक्रिय हैं. रजा पहलवी की तीन बेटियों में से दूसरी ईमान लाया अपने यहूदी कनेक्शन की वजह से चर्चा में हैं. उन्होंने जून 2025 में प्रिंसेस ईमान पहलवी ने अमेरिकी यहूदी कारोबारी ब्रैडली शेरमैन से विवाह किया. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद निर्वासन में रह रहे पहलवी परिवार में यह पहली पीढ़ीगत शादी थी, जिससे 2500 साल बाद किसी फारसी राजशाही से एक यहूदी परिवार जुड़ा.

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Iran Princess Iman Pahlavi married Jewish Man: ईरान में मौजूदा सरकार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं. वे पिछले साल 28 दिसंबर से आर्थिक मुद्दे पर शुरू हुए इस प्रदर्शन पर लगातार ईरानी लोगों से सड़क पर संघर्ष करने की मांग कर रहे हैं. न सिर्फ प्रिंस पहलवी बल्कि उनकी बेटियां भी इस आंदोलन में सोशल मीडिया के जरिए बढ़ चढ़कर भाग ले रही हैं. रजा पहलवी की तीन बेटियां हैं; नूर जहरा (जन्म 3 अप्रैल 1992), ईमान लाया (जन्म 12 सितंबर 1993) और फराह मित्रा (जन्म 17 जनवरी 2004) हैं. ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध में इजरायल सबसे बड़ी कड़ी है. इसी यहूदी देश के खिलाफ ईरान हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठनों को सहायता कर रहा है. ऐसे में प्रिंसेस ईमान पहलवी की शादी ईरान के पहलवी शाही परिवार को एक अलग पहचान दी थी. यह वही शादी थी, जिसके जरिए निर्वासित ईरानी राजघराने में 2500 साल बाद एक यहूदी सदस्य शामिल हुआ.

पिछले साल, जून 2025 में प्रिंसेस ईमान पहलवी ने अमेरिकी यहूदी कारोबारी ब्रैडली शेरमैन से पेरिस, फ्रांस में विवाह किया था. यह शादी इसलिए भी ऐतिहासिक मानी गई, क्योंकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद निर्वासन में रह रहे पहलवी परिवार में यह पहली पीढ़ीगत शादी थी और पहली बार किसी यहूदी परिवार का सदस्य इस वंश से जुड़ा. इस घटना पर जुईश न्यूज वेबसाइट ने कहा कि किसी फारसी राजशाही परिवार में यहूदी सदस्य का आने की घटना 2500 साल बाद हुई है. यह एस्थर की पुस्तक मेगिला (The Megillah Book of Esther) में वर्णित पुरीम की कथा फारसी साम्राज्य में बसे यहूदियों के चमत्कारी बचाव की कहानी है. इस कहानी के बारे में हम आपको आगे बताएंगे, पहले प्रिंसेस और उनके यहूदी पति के बारे में जान लेते हैं.

ईरानी राजघराने में यहूदी दामाद

31 वर्षीय प्रिंसेस की मुलाकात एरिजोना से ताल्लुक रखने वाले यहूदी कारोबारी शेरमैन से आपसी दोस्तों के जरिए हुई थी और उनकी सगाई की खबर 2023 में सामने आई थी. शिकागो में जन्मे ब्रैडली शेरमैन पेशे से बिजनेस डेवलपमेंट एक्सपर्ट हैं और अमेरिकी टेक सेक्टर से जुड़े रहे हैं. वहीं, ईमान पहलवी न्यूयॉर्क में अमेरिकन एक्सप्रेस में काम करती हैं और सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखती हैं. दोनों की मुलाकात 2017 में हुई थी और बाद में अमेरिका में ही उन्होंने जीवन बसाया. हांलाकि अब ईकान जरूर इस सत्ता के बदलाव में भागीदार बन रही हैं. अपने इंस्टाग्राम पोस्ट्स के माध्यम से वे लोगों को ईरान में चल रहे आंदोलन के बारे में लोगों को जागरूक कर रही हैं. 

आज जब ईरान में आर्थिक संकट और राजनीतिक दमन के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं, रजा पहलवी खुद को एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं. ऐसे समय में उनकी बेटी की यह शादी और यहूदी दामाद का पहलवी परिवार में शामिल होना, मौजूदा इस्लामिक रिपब्लिक की विचारधारा के बिल्कुल उलट प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है. रजा पहलवी के ऑफिस की ओर से इसकी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की गई थी. 

पहलवी परिवार का इजरायल के प्रति खुला समर्थन

पहलवी परिवार इजरायल के प्रति खुले समर्थन के लिए जाना जाता है, जबकि तेहरान की मौजूदा सरकार का रुख इसके ठीक विपरीत है. ऐसे में ईमान पहलवी और ब्रैडली शेरमैन की शादी अब सिर्फ एक शाही समारोह नहीं, बल्कि ईरान के भविष्य को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में एक सांकेतिक घटना के तौर पर भी देखी गई थी. माना जा रहा है कि यह विवाह किसी धार्मिक रस्म के तहत नहीं हुआ ऐसा कोई संकेत नहीं है कि प्रिंसेस ईमान यहूदी धर्म अपनाएंगी. हालांकि पेरिस में हुए समारोह के दौरान पारंपरिक यहूदी ‘चेयर डांस’ किए जाने की खबर जरूर सामने आई थी.

पहलवी वंश ने 1925 से 1979 तक ईरान पर शासन किया था, जिसे बाद में खुमैनीवादी इस्लामी क्रांति के दौरान सत्ता से बेदखल कर दिया गया. इसके बाद शाही परिवार अमेरिका में निर्वासन में चला गया, जहां प्रिंसेस ईमान का जन्म हुआ और वहीं उनका पालन-पोषण हुआ. शादी समारोह में पूरे पहलवी परिवार ने शिरकत की, जिनमें ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी की पत्नी और महारानी फराह भी शामिल थीं.

2500 साल पहले की वो कहानी, जब फारसी राजघराने में पहुंची थी यहूदी महिला

एस्थर की पुस्तक को हिब्रू में मेगिलात एस्थर कहा जाता है, जिसका मतलब होता है “एस्थर की स्क्रॉल”. यह हिब्रू बाइबिल के तीसरे हिस्से, केतुविम (लेख) की एक महत्वपूर्ण किताब है. यह पाँच खास ग्रंथों में से एक है, जिन्हें मेगिलॉट कहा जाता है. बाद में इसे ईसाई धर्म के ओल्ड टेस्टामेंट में भी इसे शामिल किया गया. इस पुस्तक में एक यहूदी महिला की कहानी बताई गई है, जिसका असली नाम हदास्सा था और जिसे बाद में एस्थर के नाम से जाना गया. वह फारस (ईरान) में रहती थी और आगे चलकर फारस की रानी बनती है. एस्थर अपनी समझदारी और साहस से अपने लोगों पर आने वाले बड़े खतरे को टाल देती है और यहूदियों के नरसंहार को रोकने में सफल होती है. यह कहानी साहस, बुद्धिमानी और सही समय पर सही कदम उठाने का संदेश देती है. जुईश न्यूज ने इस शादी पर इसी घटना को बहुत महत्ता दी है. तो इस कहानी में क्या है?

एस्थर की पुस्तक मेगिला में पुरीम की कथा कही गई है. उस समय फारस के राजा अहश्वेरोश ने अपनी पत्नी रानी वश्ती को अवज्ञा के कारण पद से हटा दिया और एक यहूदी अनाथ युवती एस्थर को नई रानी बनाया, जिसने अपनी पहचान गुप्त रखी. इसी दरबार में प्रधानमंत्री हामान सत्ता के नशे में चूर था और तब क्रोधित हो उठा, जब एस्थर के चचेरे भाई मोर्दखै ने उसके सामने झुकने से इनकार कर दिया. बदले की भावना में हामान ने राजा को बहला-फुसलाकर पूरे साम्राज्य के यहूदियों के संहार का फरमान जारी करवा दिया और ‘पुरीम’ यानी चिट्ठी डालकर नरसंहार के लिए अदार महीने की 13 तारीख तय की.

एस्थर के साहस ने बचाई यहूदियों की जान

नाजुक घड़ी में मोर्दखै ने एस्थर को साहस दिखाने के लिए प्रेरित किया. अपने प्राणों को जोखिम में डालते हुए एस्थर राजा के सामने गईं और न सिर्फ हामान की साजिश का पर्दाफाश किया, बल्कि अपनी यहूदी पहचान भी उजागर कर दी. सच सामने आते ही क्रोधित राजा ने उसी फांसी के फंदे पर हामान को लटकाने का आदेश दिया, जो उसने मोर्दखै के लिए बनवाया था. इसके बाद यहूदियों को आत्मरक्षा की अनुमति मिली और जिस दिन उनके विनाश की योजना थी, उसी दिन वे विजयी हुए. यही मुक्ति की स्मृति पुरीम पर्व के रूप में मनाई जाती है. यह उत्सव, आनंद, उपहारों का आदान-प्रदान, दान और मेगिला (एस्तेर की पुस्तक) के पाठ के साथ मनाया जाता है, जो ईश्वर की अदृश्य कृपा और साहस की विजय का प्रतीक है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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