रिपोर्ट का दावा: ईरान का मिसाइल भंडार हो रहा खाली, हमलों की रफ्तार भी हुई सुस्त; क्या तेहरान अब घुटने टेकने वाला है? 

Updated at : 31 Mar 2026 2:00 PM (IST)
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Iran Missile Stock Declines us war update

एक ईरानी मिसाइल की तस्वीर. इमेज सोर्स- एक्स.

Iran Missile Stock Declines: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ अब नया वॉर जोन बन गया है. जहां ट्रंप युद्ध खत्म करने के लिए 6 हफ्ते का डेडलाइन सेट कर रहे हैं, वहीं तेहरान ने विदेशी जहाजों से 'टोल टैक्स' वसूलने और अमेरिकी एंट्री बैन करने का दांव चलकर पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है.

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Iran Missile Stock Declines: रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना है कि ईरान की मिसाइलों का केवल एक-तिहाई हिस्सा ही पूरी तरह तबाह हुआ है. बाकी का एक-तिहाई हिस्सा या तो डैमेज है या फिर जमीन के नीचे बने सिक्रेट ठिकानों में छिपाकर रखा गया है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि युद्ध से पहले ईरान के पास करीब 2,500 से 6,000 तक बैलिस्टिक मिसाइलें थीं. 

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, भारी नुकसान के बावजूद ईरान अभी भी मिसाइलें दाग रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास अभी भी लगभग 30% मिसाइल क्षमता बची है, जो उसने पहाड़ों के नीचे बने ‘मिसाइल शहरों’ में सुरक्षित रखी है.

जमीन के नीचे छिपे ‘मिसाइल सिटी’ से मिल रही ताकत

द ऑस्ट्रेलियन की रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने दशकों से पहाड़ों के अंदर टनल और बंकरों का जाल बिछाया है. ये ठिकाने इतने गहरे हैं कि हवाई हमलों से भी सुरक्षित रहते हैं. रॉयटर्स के एनालिसिस के अनुसार, ईरान ‘शूट एंड स्कूट’ तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. इसमें ट्रकों पर लदी मोबाइल लॉन्चर्स से मिसाइल दागकर तुरंत जगह बदल ली जाती है, जिससे जवाबी हमले में उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है. ईरान के ‘मिसाइल सिटी’ का वीडियो नीचे देख सकते हैं. यह वीडियो 25 मार्च, 2025 को एक्स पर शेयर किया गया था.

हमलों की रफ्तार कम होने का मतलब

मिलिट्री एक्सपर्ट्स ने ध्यान दिया है कि शुरुआती दिनों के मुकाबले अब ईरान कम मिसाइलें छोड़ रहा है. डेटा के मुताबिक, पहले ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें और हजारों ड्रोन दागे थे, लेकिन अब वह छोटे और सटीक हमले कर रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ईरान की स्ट्रैटेजी है ताकि वह अपने बचे हुए हथियारों को लंबे समय तक चला सके और अपनी ताकत बचाकर रखे.

यह इंफोग्राफिक्स गूगल के एआई से बनाया गया है.

होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) बना ईरान का बड़ा हथियार

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ईरान के पास ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को बंद करने की ताकत है, जहां से दुनिया का बहुत सारा तेल गुजरता है. अगर ईरान इसे रोकता है, तो तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. भले ही ईरान की सेना कमजोर हो जाए, लेकिन वह इस रास्ते को रोककर दुनिया पर आर्थिक दबाव डाल सकता है. वर्तमान में ईरान ने यहां ट्रैफिक पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं.

सस्ते ड्रोन और लंबी जंग की तैयारी

अटलांटिक काउंसिल जैसे थिंक टैंक का कहना है कि ईरान का मकसद जीतना नहीं, बल्कि टिके रहना है. वह महंगे मिसाइलों के बजाय सस्ते ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहा है. ये ड्रोन दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को उलझा देते हैं और उन्हें महंगे डिफेंसिव हथियारों को खर्च करने पर मजबूर कर देते हैं. ईरान चाहता है कि युद्ध इतना लंबा खिंचे कि उसके दुश्मनों के लिए यह आर्थिक और राजनीतिक रूप से बहुत महंगा साबित हो.

ट्रंप का 4 से 6 हफ्ते में युद्ध खत्म करने का प्लान

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सैन्य अभियान को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने अपने सहयोगियों को संकेत दिए हैं कि वे 4 से 6 हफ्ते के भीतर इसे समेटना चाहते हैं. ट्रंप का मानना है कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमता को काफी हद तक कमजोर करके अपने मुख्य लक्ष्य पूरे कर लिए हैं. ट्रंप ने कहा कि होर्मुज का रास्ता बंद होना एशिया और यूरोप के लिए बड़ी समस्या है, क्योंकि वहां का 84% तेल एशिया जाता है और अमेरिका अब मध्य पूर्व के तेल पर उतना निर्भर नहीं है.

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डिप्लोमेसी और नए टैक्स का खेल

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, ट्रंप की डायरेक्ट और इनडायरेक्ट बातचीत की वजह से ईरान अब कुछ तेल टैंकरों को जाने दे रहा है. ट्रंप ने इसे ईरान की ओर से ‘सम्मान का संकेत’ बताया है. दूसरी ओर, ईरान की संसद ने होर्मुज के लिए एक नया मैनेजमेंट प्लान पास किया है. ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (IRIB) के अनुसार, अब ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स (टोल) वसूलेगा. साथ ही, अमेरिका और इजरायल के जहाजों के वहां से गुजरने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है.

शांति की बातों के बीच सेना की तैनाती

एक तरफ ट्रंप युद्ध खत्म करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ रही है. ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, यूएसएस त्रिपोली और 31वीं मरीन (3,500) एक्सपेडिशनरी यूनिट वहां पहुंच चुकी है.

इसके अलावा 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को भेजने पर भी विचार चल रहा है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर रास्ता नहीं खुला तो वह ईरान के ग्रिड को निशाना बना सकते हैं, जबकि दूसरी तरफ वे इस युद्ध को एक ‘छोटा दौरा’ बता रहे हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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