Gopalganj News: सत्र लेट होने से बीएड प्रवेश परीक्षा से वंचित हुए हजारों छात्र

Published by : Vivek Pandey Updated At : 25 May 2026 11:01 AM

विज्ञापन

Gopalganj News: जेपीयू के अधीन कॉलेजों में परीक्षा और रिजल्ट में देरी से शिक्षक बनने का सपना अधूरा

विज्ञापन

Gopalganj News:(विकाश दुबे) जयप्रकाश विश्वविद्यालय के अधीन चल रहे गोपालगंज जिले के छह डिग्री कॉलेजों में लगातार लेट चल रहे स्नातक सत्र का असर अब सीधे छात्रों के भविष्य पर दिखने लगा है. पढ़ाई, परीक्षा और रिजल्ट में देरी के कारण हजारों छात्र-छात्राएं इस बार बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीइटी-बीएड)-2026 में आवेदन करने से वंचित रह गये हैं. जिले में ही करीब 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों के प्रभावित होने की बात सामने आ रही है. वहीं, जेपीयू के सभी कॉलेजों में ऐसे छात्रों की संख्या करीब एक लाख से अधिक बतायी जा रही है.

सबसे अधिक परेशानी सत्र 2023-27 के विद्यार्थियों को हो रही है. नई शिक्षा नीति के तहत सीबीसीएस पाठ्यक्रम आधारित चार वर्षीय स्नातक कोर्स लागू होने के बाद छात्रों को उम्मीद थी कि अब पढ़ाई और परीक्षा समय पर होगी, लेकिन हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं. स्थिति यह है कि जिन विद्यार्थियों को इस समय तक छठे सेमेस्टर में पहुंच जाना चाहिए था, उनकी अभी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा ही खत्म हुई है. इसी कारण बड़ी संख्या में छात्र बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए जरूरी योग्यता पूरी नहीं कर सके.

बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा सात जून को प्रस्तावित है. आवेदन की प्रक्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी है. लेकिन विश्वविद्यालयों में सत्र लेट होने के कारण हजारों छात्र आवेदन नहीं कर सके. इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय की लापरवाही की सजा उन्हें भुगतनी पड़ रही है.

तीन साल की पढ़ाई पूरी नहीं होने से फंसा मामला

नई शिक्षा नीति के अनुसार चार वर्षीय स्नातक कोर्स में छह सेमेस्टर यानी तीन साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थियों को ऑनर्स डिग्री मिलती है. इसके बाद छात्र बीएड, प्रतियोगी परीक्षा और अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में आवेदन कर सकते हैं. लेकिन जेपीयू विश्वविद्यालयों में परीक्षा समय पर नहीं होने के कारण पूरा सत्र पीछे चल रहा है.

अप्रैल और मई तक जहां छठे सेमेस्टर की परीक्षा हो जानी चाहिए थी, वहीं छात्र अभी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा देकर निकले हैं. ऐसे में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों छात्र आवेदन की शर्त पूरी नहीं कर सके.


कई विद्यार्थियों ने बताया कि वे महीनों से बीएड प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. लेकिन जब आवेदन की तारीख आयी, तब तक उनका सत्र निर्धारित स्तर तक नहीं पहुंच पाया. इस कारण उनका आवेदन नहीं हो सका. अब उन्हें अगले साल तक इंतजार करना पड़ सकता है.

रिजल्ट में देरी से और बढ़ी परेशानी

छात्रों की परेशानी सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं है. विश्वविद्यालयों में रिजल्ट जारी होने में भी कई महीनों का समय लग रहा है. स्थिति यह है कि पिछले सत्र की विशेष परीक्षा का रिजल्ट तक अब तक जारी नहीं हो पाया है. इससे छात्र लगातार कॉलेज और विश्वविद्यालय का चक्कर काट रहे हैं.
विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा देर से होती है और रिजल्ट उससे भी ज्यादा देर से आता है. ऐसे में आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है. समय पर डिग्री नहीं मिलने के कारण नौकरी और अन्य कोर्स में आवेदन करने में भी दिक्कत हो रही है.

जिले के छह डिग्री कॉलेजों के छात्र-छात्राएं है प्रभावित

जिले के छह डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं में सबसे अधिक चिंता देखी जा रही है. कॉलेजों में नियमित रूप से कक्षाएं नहीं चलने और परीक्षा कार्यक्रम में लगातार देरी होने से विद्यार्थियों का मनोबल टूट रहा है. छात्रों का कहना है कि नामांकन के समय उन्हें बताया गया था कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद सत्र नियमित रहेगा. लेकिन अब भी पुरानी व्यवस्था ही चल रही है. कई छात्रों ने कहा कि उनका एक-एक साल खराब हो रहा है, जबकि दूसरे राज्यों के छात्र समय पर डिग्री लेकर आगे बढ़ रहे हैं.

अभिभावकों की भी बढ़ रही है चिंता

सत्र लेट होने से अभिभावक भी परेशान हैं. उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई पर हर साल हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन समय पर परीक्षा और रिजल्ट नहीं होने से छात्रों का भविष्य अटक गया है. कई अभिभावकों ने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के छात्र-छात्राएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे परिवार चाहते हैं कि बच्चे जल्द पढ़ाई पूरी कर नौकरी करें, लेकिन विश्वविद्यालयों की धीमी व्यवस्था के कारण छात्रों का समय लगातार बर्बाद हो रहा है.

शिक्षा विभाग के निर्देश का नहीं दिख रहा असर

शिक्षा विभाग और राजभवन की ओर से लगातार विश्वविद्यालयों को सत्र नियमित करने का निर्देश दिया जा रहा है. समय पर परीक्षा और रिजल्ट जारी करने के लिए कई बार आदेश भी दिये गये हैं. इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है. छात्रों का कहना है कि सिर्फ निर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा. विश्वविद्यालयों को तय समय पर परीक्षा, कॉपी जांच और रिजल्ट जारी करने की व्यवस्था करनी होगी. जब तक सत्र नियमित नहीं होगा, तब तक छात्रों की परेशानी कम नहीं होगी.

भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

बीएड प्रवेश परीक्षा से वंचित होने के बाद अब हजारों छात्र भविष्य को लेकर चिंतित हैं. कई विद्यार्थी लंबे समय से शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन आवेदन नहीं कर पाने से उनका सपना फिलहाल अधूरा रह गया है.


छात्रों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द लंबित रिजल्ट जारी करे और सत्र को पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाये. साथ ही बीएड प्रवेश परीक्षा से वंचित छात्रों के लिए सरकार को भी विशेष पहल करनी चाहिए. विद्यार्थियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में और अधिक छात्र प्रभावित होंगे. फिलहाल विश्वविद्यालयों की सुस्त व्यवस्था का खामियाजा हजारों छात्र-छात्राएं भुगत रहे हैं और उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है.

Also Read: तीन राज्यों की कनेक्टिविटी पर संकट! औरंगाबाद के पुल में बड़ी दरार

विज्ञापन
Vivek Pandey

लेखक के बारे में

By Vivek Pandey

विवेक पाण्डेय टीवी चैनल के माध्यम से पिछले 7 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हूं . करियर की शुरुआत Network 10 National News Channel से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहा हूं. देश और राज्य की राजनीति, कृषि और शिक्षा में रुचि रखता हूं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन