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12 मार्च को समाप्त हो जाएगा ईरान युद्ध? ट्रंप के पोस्ट से मिला हिंट

Updated at : 07 Mar 2026 9:04 AM (IST)
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Iran Israel war Could end Donald Trump's Unconditional Surrender post Precedent.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स (WhiteHouse).

Iran Israel War: इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध 12 मार्च को समाप्त हो सकता है. हां! जाहिर तौर पर यह अंदेशा है, लेकिन कोरा नहीं. डोनाल्ड ट्रंप के एक पोस्ट से यह संकेत मिलता है कि ऐसा आने वाले दिनों में हो सकता है.

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Iran Israel War: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध 12 मार्च को समाप्त हो जाएगा. यह बात किसी रिपोर्ट या आधिकारिक बयानों से सामने नहीं आई है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से ऐसा लगता है. ट्रंप ने शुक्रवार (अमेरिका के स्थानीय समय) को ईरान से ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ (Unconditional Surrender) की मांग  की. उन्होंने जून 2025 में ऐसा ही पोस्ट किया था, जिसके सिर्फ छह दिन बाद युद्धविराम हो गया था. अब एक बार फिर इस तरह की पोस्ट से अंदेशा हो रहा है कि शायद युद्ध समाप्त हो जाएगा. 

13 जून 2025 को ईरान के ऊपर इजरायल ने हमला किया था. 17 जून को डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, Unconditional Surrender यानी ‘बिना शर्त सरेंडर’. ईरान नहीं माना.  इसके बाद 22 जून अमेरिका ने अपने बी-2 बॉम्बर से बम बरसाते हुए  ईरान के तीन परमाणु ठिकानों- इस्फहान, नतांज और फोर्दो पर बमबारी की थी. उस समय अमेरिका ने यह दावा किया  कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम नष्ट हो गया है.

12 दिन बाद हुआ था संघर्ष विराम

डोनाल्ड ट्रंप ने यह पोस्ट 17 जून को किया था और 23 जून को दोनों देश युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हो गए और उस संघर्ष का अंत हो गया. यानी पोस्ट के 6 दिन और युद्ध के 12 दिन बाद संघर्ष समाप्त हो गया. उस समय अमेरिका और कतर ने मिलकर इजरायल और ईरान के बीच मध्यस्ता कराई थी. अगर यही पैटर्न दोहराया जाता है तो 12 मार्च तक युद्धविराम की घोषणा हो सकती है.

इस युद्ध में ट्रंप ने फिर वही बात दोहराई है

अब एक बार फिर ट्रंप ने वही बात दोहराई है. अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने शुक्रवार, 6 मार्च को लिखा, ‘ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होगा, सिवाय बिना शर्त आत्मसमर्पण के! इसके बाद एक महान और स्वीकार्य नेता के चयन के बाद, हम और हमारे कई शानदार व बहादुर सहयोगी मिलकर ईरान को विनाश के कगार से वापस लाने के लिए अथक मेहनत करेंगे, ताकि वह आर्थिक रूप से पहले से कहीं बड़ा, बेहतर और मजबूत बन सके. ईरान का भविष्य शानदार होगा. मेक ईरान ग्रेट अगेन (MIGA).’

अगर सहमति बनी, तो यह युद्ध भी 12 दिन में समाप्त हो जाएगा

अगर यह होता है, तो न केवल बयान बल्कि दिनों के लिहाज से भी यह पुराने घटनाक्रम को ही दोहराएगा. 2025 में 13 जून को शुरू हुई लड़ाई 22 जून को समाप्त हो जाएगी. वहीं 2026 में यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था और 12 मार्च को यह समाप्त होता है, तो भी 12 दिन ही पूरे हो जाएंगे.

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2026 की यह जंग अलग है

हालांकि मौजूदा युद्ध और 2025 के संघर्ष में कई बड़े अंतर भी हैं. 2026 का युद्ध ट्वेल्व-डे वॉर की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ा हो गया है. इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई, उनके साथ कई और सैन्य नेतृत्व भी मारे गए. इससे ईरान में लीडरशिप का संकट पैदा हो गया है. पिछली बार अयातोल्लाह के होने की वजह से युद्ध को रोकने में मदद मिली थी, लेकिन इस बार कोई नहीं है.

मिडिल ईस्ट में फैल चुका है संघर्ष

ईरान की सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी इस बार अलग दिख रही है. यह एक दर्जन से अधिक देशों तक फैल चुका है. ईरान ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें कुवैत, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन, कतर के साथ कई अन्य देश भी शामिल हैं. इसमें कई अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है. इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र का ऊर्जा निर्यात भी अब बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.

एक और महत्वपूर्ण सवाल कतर को लेकर है. खाड़ी देश ने जून 2025 के समझौते में मध्यस्थता की थी, लेकिन फिलहाल वह खुद संकट से जूझ रहा है. ईरानी ड्रोन हमले में उसके रास लफान गैस संयंत्र को नुकसान पहुंचने के बाद उसने एलएनजी निर्यात पर संकट खड़ा हो गया है. ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या कतर इस बार भी उसी तरह मध्यस्थ की भूमिका निभा पाएगा या नहीं. 

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ईरान में मौतों का आंकड़ा दिल दहलाने वाला

ईरान में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ईरान के एक स्कूल में 160 से बच्चियों की मौत और श्रीलंका के पास एक कथित तौर पर निहत्थे जहाज पर हुए हमले में कम से कम 84 लोगों की मौत, सबसे हृदय विदारक लम्हे रहे हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि बीच बचाव करने वाले देशों को दबाव उन पर डालना चाहिए, जिन्होंने ईरान को कम आंकते हुए इस आग को भड़काया. फिलहाल 12 मार्च आने में ज्यादा दिन नहीं हैं. ऐसे में क्या इतिहास खुद को दोहराएगा!

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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