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मिडिल ईस्ट में US के सबसे बड़े एयरबेस पर हमला, ईरान ने कतर के अल उदैद पर दागी मिसाइल

Updated at : 04 Mar 2026 9:05 AM (IST)
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Iran Attacks US Largest Air Base in Middle East Al-Udeid Qatar hit by Ballistic Missile.

हवा में मिसाइल हमले का दृश्य. फोटो- एक्स

Iran Attacks US Al-Udeid Qatar: ईरान ने अमेरिका के मिडिल ईस्ट के सबसे बड़े एयरबेस पर दो बैलिस्टिक मिसाइल दागी थीं, जिनमें से एक को इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन एक अपने टारगेट पर जा लगी.

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Iran Attacks US Al-Udeid Qatar: ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लगातार निशाना बना रहा है. जंग के शुरुआती दिन उसने क्षेत्र के लगभग 14 यूएस सैन्य अड्डे को टारगेट किया था. वहीं मंगलवार (3 मार्च 2026) को उसकी एक बैलिस्टिक मिसाइल ने कतर स्थित अमेरिका के अल-उदीद सैन्य अड्डे को निशाना बनाया. कतर के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कतर की ओर दो मिसाइलें दागी गई थीं. मिनिस्ट्री ने कहा कि हवाई रक्षा प्रणाली ने एक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया, जबकि दूसरी मिसाइल अल-उदीद कतरी बेस पर गिरी, लेकिन किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

इसके साथ ही मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात कतर ने घोषणा की कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े दो जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. कतर की आधिकारिक समाचार एजेंसी के मुताबिक, ‘कड़ी निगरानी के बाद 10 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया. इनमें से सात को देश के महत्वपूर्ण और सैन्य ढांचे से जुड़ी जानकारी जुटाने का काम सौंपा गया था, जबकि तीन को तोड़फोड़ की कार्रवाई अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई थी.’ एजेंसी ने यह भी बताया कि जांच के दौरान आरोपियों ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से अपने संबंध स्वीकार किए और यह कबूल किया कि उन्हें जासूसी और तोड़फोड़ की गतिविधियां अंजाम देने के निर्देश मिले थे.

अल उदैद क्यों है खास?

अल उदैद एयरबेस कतर में स्थित अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है और यह दोहा के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. इस बेस को अबू नखला हवाई अड्डा भी कहा जाता है. यह कतर की अल रेयान नगरपालिका क्षेत्र में स्थित है.  वर्ष 2026 तक यहां करीब 10,000 अमेरिकी सैन्यकर्मी तैनात थे. इसे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वायु अभियानों का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यह अड्डा यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) और अमेरिकी वायुसेना की अग्रिम कमान के लिए महत्वपूर्ण हब है. अल उदैद एयरबेस में लंबा रनवे, उन्नत कमांड-एंड-कंट्रोल सुविधाएं और बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की क्षमता मौजूद है, जिससे यह खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक मौजूदगी का अहम केंद्र बनता है. यहां से अमेरिकी वायुसेना और सहयोगी देश इराक, सीरिया और अफगानिस्तान सहित क्षेत्रीय अभियानों का संचालन करते रहे हैं. ऐसे में यहां पर हमला करके ईरान अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई को सीधा चुनौती दे रहा है. 

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कतर ने ईरानी हमलों के आंकड़े किए जारी

कतर के रक्षा मंत्रालय ने ईरानी हमलों की शुरुआत यानी 28 फरवरी से लेकर मंगलवार, 3 मार्च 2026 की सुबह तक पकड़े गए और रोके गए हमलों के लेटेस्ट आंकड़े जारी किए हैं. मंत्रालय के अनुसार, इस अवधि में 3 क्रूज मिसाइलें, 101 बैलिस्टिक मिसाइलें, 39 ड्रोन और 2 SU-24 लड़ाकू विमानों का पता लगाया गया. इनमें से 3 क्रूज मिसाइलें, 98 बैलिस्टिक मिसाइलें, 24 ड्रोन और दोनों लड़ाकू विमानों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया गया. 

कतर ने स्पष्ट किया कि उसकी सशस्त्र सेनाएं देश की संप्रभुता और सुरक्षा की हिफाजत करने में पूरी तरह सक्षम हैं तथा किसी भी बाहरी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं. सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे शांति और संयम बनाए रखें तथा अफवाहों पर भरोसा न करें. 

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इसके साथ ही कतर के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता और प्रधानमंत्री के सलाहकार माजेद अल अंसारी ने कहा कि कतर ईरान को निशाना बनाने वाले अभियान का हिस्सा नहीं रहा है. हम आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं और अपने देश के खिलाफ ईरानी हमलों को रोकने का प्रयास कर रहे हैं.

ईरान मिडिल ईस्ट में US को पहुचा रहा बड़ा नुकसान

The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते और इस सप्ताह सोमवार को किए गए ईरानी हमलों में मध्य पूर्व में स्थित कम से कम सात अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर संचार और रडार प्रणालियों से जुड़े या उनके पास मौजूद ढांचों को नुकसान पहुंचा. बैलिस्टिक मिसाइलों की निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाली रडार प्रणालियों, सैटेलाइट डिश और रेडोम (संवेदनशील उपकरणों की सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले मौसमरोधी कवर) के पास या उनकी क्षति हुई है. इन प्रणालियों का उपयोग सैन्य बल लंबी दूरी तक संचार और समन्वय के लिए करते हैं.

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अमेरिकी सैन्य संचार ढांचा अत्यंत गोपनीय होता है, इसलिए यह तय करना मुश्किल है कि कौन-सी विशिष्ट प्रणालियां प्रभावित हुईं. हालांकि, जिन स्थानों को निशाना बनाया गया, उनसे संकेत मिलता है कि ईरान का उद्देश्य अमेरिकी सेना की संचार और समन्वय क्षमता को बाधित करना था. ईरान इससे पहले भी अमेरिकी सैन्य संचार क्षमता पर हमला कर चुका है. पिछले जून में उसने कतर के एक अड्डे को निशाना बनाया था, जिसे उसने इस बार फिर से टारगेट किया. रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रणालियों को प्रभावित करने वाले हमले बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य ठिकानों पर भी हुए.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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