7 मेडिकल कॉलेज ने इंटर्न को स्टाइपेंड नहीं दिया, NMC ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 05 Jun 2026 12:31 PM

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MBBS डॉक्टर की सांकेतिक तस्वीर (PC-Freepik)

MBBS Stipend: NMC ने सुप्रीम कोर्ट को मेडिकल कॉलेज में मिलने वाले स्टाइपेंड को लेकर बताया कि देश में केवल 7 कॉलेज ही ऐसे हैं जो स्टाइपेंड नहीं दे रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अब NMC ने पूरी रिपोर्ट मांगी है.

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MBBS Stipend: मेडिकल कॉलेज में इंटर्न्स के स्टाइपेंड को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया कि देश के 756 मेडिकल कॉलेज में से केवल 7 मेडिकल कॉलेज ऐसे हैं जो अपने इंटर्न्स को स्टाइपेंड नहीं दे रहे हैं. NMC ने बताया कि उसने इन सभी मेडकिल कॉलेज को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जवाब मिलने पर उस अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

573 कॉलेज में आसानी से मिल रहे हैं स्टाइपेंड

सुनवाई के दौरान NMC ने अदालत को बताया कि 573 अंडरग्रेजुएट मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड को लेकर कोई विवाद नहीं है. साथ ही यह भी कहा गया कि 176 कॉलेज नए खोले गए हैं. अदालत को यह भी बताया गया कि एक मेडिकल कॉलेज बंद है और वहां कोई इंटर्न नहीं है, जबकि दो कॉलेज जो PG Course चला रहे हैं, वहां फिलहाल कोई इंटर्न मौजूद नहीं है, इसलिए वहां स्टाइपेंड भुगतान का सवाल ही नहीं उठता. NMC के अनुसार, कुल 562 पोस्टग्रेजुएट कोर्स चलाने वाले कॉलेजों में से ज्यादातर कॉलेज सही तरीके से स्टाइपेंड का भुगतान कर रहे हैं.

मेडिकल छात्रों में को मिलने वाला स्टाइपेंड क्यों जरूरी है?

मेडिकल इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को अस्पतालों में काम करना होता है, जिसके बदले उन्हें स्टाइपेंड दिया जाता है. सुप्रीम कोर्ट पहले भी कहा है कि इंटर्न्स को स्टाइपेंड मिलना अनिवार्य है. मेडिकल कॉलेज इस नियम का उल्लंघन नहीं कर सकते हैं.

NMC की कार्रवाई

NMC ने कहा कि नियमों का पालन न करने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी. कुछ मामलों में पहले भी कॉलेजों पर जुर्माना और अलर्ट जारी किया गया है. पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कॉलेजों को वेबसाइट पर स्टाइपेंड डिटेल्स दिखाने के निर्देश दिए गए हैं.

आगे क्या होगा?

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाया है और NMC से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. यदि कॉलेज नियमों का पालन नहीं करते हैं तो सख्त प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है. साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है या फिर एडमिशन पर ही प्रतिबंध लग सकता है.

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By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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