पुतिन को जेलेंस्की का खुला पत्र, आमने-सामने बातचीत का दिया प्रस्ताव; रूस बोला- मॉस्को आइए

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जेलेंस्की के पत्र पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी है.

Zelenskyy Open Letter Putin: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को खुला पत्र लिखकर आमने-सामने बातचीत का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा कि यह वार्ता कीव या मॉस्को में नहीं बल्कि किसी तीसरे देश में होनी चाहिए. वहीं यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात का स्वागत किया है.

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Zelenskyy Open Letter Putin: रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से अधिक समय से युद्ध जारी है. दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिशें भी की गईं, लेकिन ईरान युद्ध की शुरुआत होते ही, वह कहीं पीछे छूट गईं. हालांकि इस संघर्ष में शांति प्रयासों ने एक नया मोड़ लिया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को खुला पत्र लिखकर आमने-सामने बैठक का प्रस्ताव दिया है. इस पर रूस की ओर से जेलेंस्की को मॉस्को आने का न्यौता दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात का समर्थन करते हुए कहा कि यदि यह बैठक होती है तो यह एक पॉजिटिव स्टेप होगा.

पत्र में क्या बोले जेलेंस्की?

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने पत्र में कहा कि युद्ध को समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत है. उन्होंने पुतिन को संबोधित करते हुए लिखा कि यूक्रेन इस युद्ध को प्रत्यक्ष बातचीत के जरिए समाप्त करना चाहता है और इसके लिए वह व्यक्तिगत मुलाकात का प्रस्ताव रख रहे हैं. 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से, जेलेंस्की पुतिन को बहुत कम संबोधित करते हैं. ऐसे में सीधा लेटर लिखना इस युद्ध को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम है. 

जेलेंस्की ने कहा कि इस बैठक के लिए एक निश्चित तारीख तय की जानी चाहिए. उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि यदि वार्ता शुरू होती है तो बातचीत की पूरी अवधि के दौरान यूक्रेन पूर्ण युद्धविराम लागू कर सकता है. उन्होंने कहा कि सभी युद्धबंदियों की ‘ऑल-फॉर-ऑल’ यानी सभी के बदले सभी की अदला-बदली शांति प्रक्रिया की शुरुआत का महत्वपूर्ण कदम बन सकती है. यूक्रेनी राष्ट्रपति पहले भी कई बार कह चुके हैं कि क्षेत्रीय विवादों और कब्जे वाले इलाकों से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल शीर्ष स्तर की सीधी बातचीत से ही संभव है. 

रूस ने क्या जवाब दिया?

जेलेंस्की का पत्र सार्वजनिक होने के बाद क्रेमलिन ने प्रतिक्रिया दी. रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि पुतिन को अभी यह पत्र नहीं दिखाया गया है, लेकिन यदि जेलेंस्की चाहें तो वह किसी भी समय मॉस्को आ सकते हैं.

हालांकि जेलेंस्की ने अपने पत्र में पहले ही संकेत दे दिया था कि वह इस तरह की शर्तों के तहत मॉस्को जाकर बातचीत करने के पक्ष में नहीं हैं. जेलेंस्की ने कहा कि मॉस्को या कीव में यह वार्ता नहीं हो सकती. उन्होंने इस समझौते के लिए स्विट्जरलैंड, तुर्किये और कुछ अरब देशों में बातचीत की संभावना जताई.

रूस लगातार यह कहता रहा है कि किसी अंतिम समझौते की रूपरेखा तैयार होने के बाद ही पुतिन और जेलेंस्की की मुलाकात होनी चाहिए. पुतिन पहले भी कह चुके हैं कि वह केवल ऐसे समझौते को अंतिम रूप देने के लिए जेलेंस्की से मिलेंगे जिस पर पहले से सहमति बन चुकी हो.

ट्रंप ने दोनों पक्षों से समझौते की अपील की

जेलेंस्की के प्रस्ताव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि दोनों नेता आमने-सामने बैठते हैं तो यह स्वागत योग्य कदम होगा. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की कोशिशों ने भी दोनों पक्षों को बातचीत की दिशा में आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है. व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि रूस और यूक्रेन दोनों को कुछ समझौते करने होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने दोनों पक्षों को ऐसे सुझाव दिए हैं जो समाधान की दिशा में मदद कर सकते हैं.

कई दौर की वार्ताओं के बावजूद नहीं निकला समाधान

हाल के महीनों में अमेरिका की मध्यस्ता से इस्तांबुल, अबू धाबी और जेनेवा में कई चरणों की बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. मुख्य विवादित मुद्दे क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी और युद्ध के बाद की व्यवस्था से जुड़े रहे हैं. जमीनी मोर्चे पर रूस को सीमित सफलता मिलने के बाद उसने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए यूक्रेनी शहरों और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाना बढ़ा दिया है. इसके जवाब में यूक्रेन ने भी रूस के अंदर गहराई तक हमले तेज किए हैं और सैन्य प्रतिष्ठानों तथा ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाया है.

जेलेंस्की की वैधता पर फिर उठाए सवाल

सेंट पीटर्सबर्ग में विदेशी पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने एक बार फिर जेलेंस्की की राजनीतिक वैधता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह विषय विश्लेषण का विषय है कि जेलेंस्की अभी भी यूक्रेन के वैध राष्ट्रपति हैं या नहीं. दरअसल, जेलेंस्की का पहला पांच वर्षीय कार्यकाल 2024 में समाप्त हो चुका है. हालांकि यूक्रेन में लागू मार्शल लॉ के कारण युद्धकाल में चुनाव नहीं कराए जा सकते. जेलेंस्की पहले कह चुके हैं कि यदि पूर्ण युद्धविराम लागू हो जाता है तो अंतिम शांति समझौते पर मतदान या जनमत संग्रह कराया जा सकता है.

युद्ध के मैदान में क्या है स्थिति?

रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला शुरू किया था. शांति वार्ता की शर्त के रूप में मॉस्को अब भी मांग कर रहा है कि यूक्रेन अपने पूर्वी डोनबास क्षेत्र से सेना हटा ले. इस इलाके के लगभग 85 प्रतिशत हिस्से पर रूस का नियंत्रण है. वहीं डोनेट्स्क में रूस ने लगभग 80 प्रतिशत भू-भाग पर नियंत्रण रखा है. पुतिन ने दावा किया कि उनकी सेना पूरे मोर्चे पर आगे बढ़ रही है. हालांकि, रूस शांतिपूर्ण समाधान के लिए भी तैयार है. 

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यूक्रेन भी कर रहा हमले

जेलेंस्की का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले यूक्रेन ने सेंट पीटर्सबर्ग में तेल टर्मिनल और नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले किए थे. उसी दौरान रूस के इस प्रमुख शहर में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच का आयोजन भी चल रहा था. इसे अक्सर रूस का ‘दावोस’ भी कहा जाता है.

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में हाल के महीनों में लंबी दूरी के हमले तेजी से बढ़े हैं. यूक्रेन का कहना है कि वह रूसी ऊर्जा और सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रहा है, जबकि रूस लगातार यूक्रेनी शहरों पर हमले करता रहा है. 

अमेरिका का ध्यान अब यूक्रेन से हट रहा?

नए शांति प्रस्ताव के बीच जेलेंस्की ने यह चिंता भी जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर अमेरिका का ध्यान अब पहले की तुलना में यूक्रेन युद्ध पर कम हो गया है. नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने कहा कि फिलहाल दुनिया का फोकस यूक्रेन पर नहीं है. उनके अनुसार, अमेरिका के लिए इस समय ईरान सबसे बड़ा मुद्दा है और उसके बाद यूक्रेन का सवाल आता है.

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अनन्त नारायण शुक्ल

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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