जून में कब है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी? जानें पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

बालकृष्ण
Masik Krishna Janmashtami: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 8 जून 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और व्रत रखने का विशेष महत्व माना जाता है. यदि आप भी लड्डू गोपाल की कृपा प्राप्त करने के लिए यह व्रत रखने जा रहे हैं, तो पहले इसकी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम और अन्य आवश्यक जानकारियां अवश्य जान लें.
Masik Krishna Janmashtami: हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है. जून माह की यह मासिक कृष्ण जन्माष्टमी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इस बार यह ज्येष्ठ अधिक मास के दुर्लभ संयोग में पड़ रही है. अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और यह लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है.
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026: तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, जून 2026 में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की अष्टमी तिथि का प्रारंभ और समापन इस प्रकार होगा:
- व्रत की तिथि: 8 जून 2026, सोमवार
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 8 जून 2026 को प्रातः 03:24 बजे से
- अष्टमी तिथि समाप्त: 9 जून 2026 को प्रातः 03:23 बजे तक
चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए निशिता काल में पूजा के लिए 8 जून 2026 (सोमवार) को व्रत रखना और पूजन करना शास्त्रों के अनुसार सर्वमान्य एवं श्रेष्ठ माना जाएगा.
पूजा के शुभ मुहूर्त
8 जून 2026 को भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:40 बजे से 05:26 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:53 बजे तक
- निशिता काल (मुख्य पूजा समय): रात्रि 11:40 बजे से 12:20 बजे तक
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि
प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और बाल गोपाल के सिंहासन को फूलों, तोरण तथा मोरपंख से सजाएं.
लड्डू गोपाल का शुद्ध जल एवं गंगाजल से अभिषेक करें तथा उनके समक्ष दीपक प्रज्ज्वलित करें. दिनभर फलाहार, निराहार अथवा सात्विक आहार के साथ व्रत का पालन करें. इस दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करते रहें.
रात्रि के शुभ मुहूर्त में लड्डू गोपाल का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करें. उन्हें नए वस्त्र, मुकुट और बांसुरी अर्पित करें. इसके बाद कान्हा को माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी, तुलसी दल और मौसमी फलों का भोग लगाएं. अंत में धूप-दीप से भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद सभी भक्तों में वितरित करें.
भगवान कृष्ण के मंत्र
- ओम श्रीकृष्णाय नमः
- ओम नमो भगवते वासुदेवाय
- कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय नमः
- ओम गोविंदाय नमः
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By Neha Kumari
नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.
डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.
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