भानु सप्तमी 2026: सूर्य देव को अर्घ्य देते समय इन बातों को न करें नजरअंदाज, वरना हो सकते हैं नुकसान
Published by : Neha Kumari Updated At : 05 Jun 2026 9:24 AM
सूर्य देव को अर्घ्य देते हुए श्रद्धालु की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
Bhanu Saptami 2026: भानु सप्तमी पर सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन गलत समय पर जल अर्पित करना, अर्घ्य के लिए अनुचित पात्र का उपयोग करना या अन्य छोटी-छोटी गलतियां करना पूजा के शुभ फल को प्रभावित कर सकता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन भूलों से सूर्य देव के अप्रसन्न होने की आशंका भी रहती है. आइए जानते हैं कि भानु सप्तमी पर सूर्य देव को अर्घ्य देते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
Bhanu Saptami 2026: भानु सप्तमी का पावन पर्व 7 जून, रविवार को मनाया जाएगा. जब भी शुक्ल या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे भानु सप्तमी कहा जाता है. यह पर्व सूर्यदेव को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से आरोग्य, सुख-समृद्धि तथा मान-सम्मान की प्राप्ति होती है. हालांकि, सूर्य देव को अर्घ्य देते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. आइए इन नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं.
1. गलत समय पर अर्घ्य देना
अक्सर लोग सुबह उठने के काफी देर बाद, जब धूप तेज हो जाती है, तब सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं. शास्त्रों के अनुसार, तेज धूप में अर्घ्य देने से वह आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता, जो सूर्योदय के समय प्राप्त होता है. सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय के एक घंटे के भीतर माना गया है. सुबह की हल्की और लालिमा युक्त किरणों के सामने दिया गया अर्घ्य सबसे फलदायी माना जाता है.
2. पैरों पर जल की बूंदें गिरना
अर्घ्य देते समय सबसे आम गलती यह होती है कि लोटे से गिरने वाला जल साधक के पैरों पर गिर जाता है. सूर्य देव को अर्पित किया गया जल अत्यंत पवित्र माना जाता है, इसलिए उसका पैरों पर गिरना उचित नहीं माना जाता. अर्घ्य देते समय तांबे के पात्र को सिर या छाती के स्तर तक ऊंचा रखें. साथ ही, अपने पैरों के आगे कोई गमला, साफ बर्तन या तुलसी का पौधा रख लें, ताकि जल उसी में गिरे. बाद में उस जल को किसी पेड़-पौधे की जड़ में अर्पित कर दें.
3. गलत धातु के पात्र का उपयोग करना
कई लोग जल अर्पित करने के लिए स्टील, शीशे या लोहे के बर्तनों का उपयोग कर लेते हैं. सूर्य देव की पूजा में इन धातुओं का प्रयोग शुभ नहीं माना जाता. सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए तांबे के लोटे का ही उपयोग करना चाहिए. तांबे को सूर्य की धातु माना गया है और इससे अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने की मान्यता है.
4. आंखें बंद करके जल अर्पित करना
अर्घ्य देते समय कई लोग अपनी आंखें बंद कर लेते हैं या इधर-उधर देखने लगते हैं. धार्मिक दृष्टि से इसे उचित नहीं माना जाता. सही नियम यह है कि जब आप लोटे से जल अर्पित कर रहे हों, तब आपकी नजर जल की गिरती हुई धारा पर होनी चाहिए. जल की धारा के बीच से सूर्य देव के दर्शन करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से सूर्य की किरणें जल से छनकर आंखों और शरीर पर पड़ती हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल की प्राप्ति होती है.
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