क्या 73 साल के व्लादिमीर पुतिन लडे़ंगे 2030 का चुनाव? रूसी राष्ट्रपति बोले- ईश्वर ही जानता है कि कल, परसों…
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 05 Jun 2026 10:21 AM
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. फोटो- एक्स (MFA Russia).
Vladimir Putin 2030 Election Russia:रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2030 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चल रही अटकलों को समय से पहले बताया है. उन्होंने कहा कि फिलहाल रूस के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है. साथ ही उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर उठ रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी.
Vladimir Putin 2030 Election Russia: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 1999 से रूस की सत्ता के केंद्र में हैं. इस दौरान वह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों पदों पर रह चुके हैं. 7 अक्तूबर 1952 को जन्मे पुतिन फिलहाल 73 वर्ष के हैं. ऐसे में अब उनके अगला चुनाव लड़ने या न लड़ने को लेकर चर्चाएं होने लगी हैं. हालांकि, पुतिन ने 2030 के राष्ट्रपति चुनाव और अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर जारी चर्चाओं को फिलहाल गैरजरूरी बताया है. उनका कहना है कि देश के सामने इस समय कई महत्वपूर्ण और तात्कालिक चुनौतियां हैं, इसलिए आने वाले चुनावों और संभावित कार्यकाल पर चर्चा करना अभी जल्दबाजी होगी.
गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन से पूछा गया कि क्या वह 2036 तक सत्ता में बने रहने की योजना बना रहे हैं और क्या उनकी हेल्थ और एनर्जी इतनी है कि वह इतना लंबा कार्यकाल निभा सकेंगे. इस पर रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि भविष्य के बारे में कोई निश्चित बात नहीं कही जा सकती. रूस का संविधान उन्हें 2030 में फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की अनुमति देता है. यदि वह चुनाव जीतते हैं तो उनका कार्यकाल 2036 तक बढ़ सकता है.
पुतिन ने साफ कहा कि फिलहाल वह इस संभावना पर विचार भी नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह केवल ईश्वर ही जानता है कि कल, परसों या उससे आगे तक किसके पास कितना स्वास्थ्य और शक्ति होगी. पुतिन ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रूस जिन लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है, उन पर ध्यान केंद्रित किया जाए.
स्वास्थ्य को लेकर वर्षों से चल रही हैं अटकलें
केजीबी के पूर्व जासूस, 73 वर्षीय पुतिन के स्वास्थ्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर लंबे समय से तरह-तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं. पिछले कुछ वर्षों में कई साजिश सिद्धांत सामने आए, जिनमें दावा किया गया कि पुतिन गंभीर रूप से बीमार हैं, काम करने में सक्षम नहीं रहे या सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी जगह हमशक्ल लोगों का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि इन दावों के समर्थन में कभी कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया.
हाल के महीनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी पुतिन की सेहत को लेकर चर्चाएं तेज हुईं. कुछ उपयोगकर्ताओं ने ऐसे वीडियो साझा किए, जिनमें उनके पैरों में कंपन दिखाई देने या बैठकों के दौरान मेज को मजबूती से पकड़ने जैसी बातों का हवाला देकर पार्किंसन रोग की अटकलें लगाईं. हालांकि क्रेमलिन ने कभी भी ऐसी किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की है और अब तक कोई विश्वसनीय सबूत भी सामने नहीं आया है जो इन दावों को सही साबित करता हो.
पुतिन का आभा मंडल हेल्थ से बरकरार
पिछले साल दिसंबर में उन्होंने भारत का दौरा किया था. इस दौरान भी वे पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दे रहे थे. पुतिन की राजनीति और गवर्नेंस स्टाइल में उनके चारों ओर खड़ा किया गया औरा (आभा मंडल) भी बड़ी भूमिका निभाता है. इस औरा में उनकी हेल्थ ही सबसे बड़ी पहचान है. सोशल मीडिया पर वे कभी कुश्ती करते दिखाई देते हैं, कभी कबूतर उन्हें सलामी देता है और कभी घोड़े पर सवार उनकी शर्टलेस तस्वीरें. राजनीति में 73 साल की उम्र इतनी भी बड़ी नहीं मानी जाती. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 79 साल के हैं, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र 75 वर्ष से ज्यादा है. ऐसे में पुतिन अभी शायद ही रूस की राजनीति से दूर होंगे.
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लंबी उम्र बढ़ाने वाली तकनीकों पर रूस का बड़ा दांव
स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं के बीच हाल ही में एक नई रिपोर्ट ने भी ध्यान आकर्षित किया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन एक बड़े सरकारी कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य मानव जीवन की अवधि बढ़ाने से जुड़ी आधुनिक जैव-चिकित्सीय तकनीकों पर शोध को बढ़ावा देना है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस परियोजना का आकार करीब 26 अरब डॉलर का है और इसमें उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों पर काम किया जा रहा है. इन तकनीकों में मानव ऊतकों की थ्री-डी बायोप्रिंटिंग और ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन का मतलब जानवरों के अंगों को इंसानों में प्रत्यारोपित करना है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिक जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअरों के शरीर में ट्रांसप्लांट करने लायक मानव अंग विकसित करने की संभावनाओं पर भी रिसर्च कर रहे हैं. इसके लिए सरकारी फाइनेंस, वैज्ञानिक संस्थानों और प्राइवेट रिसर्च नेटवर्क को एक साथ जोड़ा जा रहा है. इस पहल का उद्देश्य जीवन विस्तार और पुनर्योजी चिकित्सा (रेजेनरेटिव मेडिसिन) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में रूस को दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करना है.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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