बांग्लादेश को मिले तुर्की के खतरनाक रॉकेट सिस्टम, क्या भारत के लिए बढ़ी चुनौती?

इस तस्वीर में तुर्की का रॉकेट सिस्टम दिखाया गया है
Bangladesh Wil Display Turkey Rocket System: 26 मार्च को बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय दिवस पर तुर्की से खरीदे गए आधुनिक TRG-230 और TRG-300 रॉकेट सिस्टम का प्रदर्शन करेगा. 'फोर्सेस गोल 2030' के तहत बढ़ाई गई यह सैन्य ताकत भारत के लिए क्या संकेत है और क्यों एक्सपर्ट्स इसे एक रूटीन आधुनिकीकरण (मॉडर्नाइजेशन) मान रहे हैं?
Bangladesh Wil Display Turkey Rocket System: बांग्लादेश अपनी आजादी और राष्ट्रीय दिवस के मौके पर 26 मार्च को एक भव्य सैन्य परेड आयोजित करने जा रहा है. इस दौरान बांग्लादेशी सेना अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करेगी, जिसमें तुर्की से खरीदे गए आधुनिक रॉकेट सिस्टम मुख्य आकर्षण होंगे. यह कदम बांग्लादेश के उस रक्षा आधुनिकीकरण प्लान का हिस्सा है, जिसे ‘फोर्सेस गोल 2030’ के नाम से जाना जाता है.
क्या हैं इन रॉकेट सिस्टम की खासियत?
रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश ने तुर्की की मशहूर डिफेंस कंपनी ‘रोकेटसन’ (Roketsan) से TRG-230 और TRG-300 गाइडेड रॉकेट सिस्टम खरीदे हैं.
TRG-300: यह काफी शक्तिशाली सिस्टम है, जो 120 किलोमीटर दूर तक के टारगेट को सटीक तरीके से निशाना बना सकता है. इसका इस्तेमाल दुश्मन के कमांड सेंटर या बख्तरबंद गाड़ियों को तबाह करने के लिए किया जा सकता है.
TRG-230: यह एक टैक्टिकल हथियार है, जिसकी रेंज 20 से 70 किलोमीटर के बीच है. इसे युद्ध के मैदान में तेजी से कहीं भी तैनात किया जा सकता है.
मोबिलिटी: ये रॉकेट सिस्टम कामज (KamAZ) 6×6 ट्रकों पर लगे हैं. इससे सेना इन्हें बहुत कम समय में एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकती है, जो इसे आधुनिक युद्ध के लिए बहुत कारगर बनाता है.
कितने हथियार खरीदे गए?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश ने साल 2024 और 2025 के दौरान 18 से ज्यादा TRG-230 और TRG-300 सिस्टम हासिल किए हैं. ये हथियार न केवल बांग्लादेश की आर्टिलरी पावर को बढ़ाते हैं, बल्कि देश की सीमाओं, खासकर म्यांमार के पास के इलाकों की सुरक्षा को भी मजबूत करते हैं.
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भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
भारतीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की इस नई खरीदारी को तुरंत खतरे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. इसके पीछे मुख्य कारण ये हैं: भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध स्थिर हैं और दोनों देश सुरक्षा और व्यापार में सहयोग कर रहे हैं.
यह खरीदारी ‘फोर्सेस गोल 2030’ के तहत अपनी रक्षा क्षमताओं को बेहतर बनाने की एक सामान्य प्रक्रिया है. बांग्लादेश अब हथियारों के लिए किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया भर से तकनीक ले रहा है, जैसे कि तुर्की से ड्रोन और अन्य रक्षा उपकरण लेना.
हालांकि, सुरक्षा जानकारों का यह भी कहना है कि दक्षिण एशिया में हथियारों की यह नई खेप क्षेत्र के बदलते रक्षा परिदृश्य को दिखाती है. नई दिल्ली के लिए यह एक संकेत है कि उसे क्षेत्र में पड़ोसी देशों की बदलती सैन्य शक्ति पर बारीकी से नजर रखनी होगी. कुल मिलाकर, 26 मार्च की परेड बांग्लादेश के लिए अपनी आत्मनिर्भरता और बढ़ती ताकत को दुनिया के सामने रखने का एक बड़ा मंच होगी.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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