हाजिम अल बबलावी मिस्र के नए प्रधानमंत्री नियुक्त

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Jul 2013 11:45 PM

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काहिरा: मिस्र में चल रहे संकट को खत्म करने के प्रयास के तहत आज अंतरिम राष्ट्रपति अदली मंसूर ने देश में अगले साल की शुरुआत में ताजा चुनाव कराने का वादा किया. दूसरी ओर उदारवादी अर्थशास्त्री हाजिम अल बबलावी को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है. इस बीच, अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के […]

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काहिरा: मिस्र में चल रहे संकट को खत्म करने के प्रयास के तहत आज अंतरिम राष्ट्रपति अदली मंसूर ने देश में अगले साल की शुरुआत में ताजा चुनाव कराने का वादा किया. दूसरी ओर उदारवादी अर्थशास्त्री हाजिम अल बबलावी को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है.


इस
बीच, अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों और सैनिकों के बीच भीषण संघर्ष में 51 लोगों की मौत हो गई. राष्ट्रपति के प्रचक्ता अहमद अल मुसलमानी ने बताया कि अदली मंसूर ने देश के पूर्व वित्त मंत्री बबलावी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है.


आईएईए
के पूर्व प्रमुख मोहम्मद अल बरदई को विदेश मामलों के लिए उप राष्ट्रपति बनाया गया है. अदली मंसूर ने कल रात एक संवैधानिक अधिघोषणा जारी की, जिसमें उन्होंने खुद को कानून बनाने की सीमित शक्तियां दीं तथा संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव के लिये एक समय सारणी की रुपरेखा पेश की.

मंसूर की यह अपेक्षित अधिघोषणा मौजूदा संक्रमण काल के अंत तक प्रभावी रहेगी. संक्रमण काल कल रात को हुई संवैधानिक घोषणा के बाद से शुरु हो गया और राष्ट्रपति चुनाव के बाद समाप्त होगा.


आदेश
में कहा गया है कि संसदीय चुनाव संक्रमणकाल के दौरान होगे और राष्ट्रपति चुनाव से पहले होंगे. इसका अर्थ है कि फरवरी महीने की शुरुआत में यह चुनाव हो सकता है. अंतरिम राष्ट्रपति का यह कदम स्पष्ट रुप से विद्रोह के समर्थकों से अपील के लिये था लेकिन शायद ही यह मुर्सी समर्थकों को रास आये.

पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक द्वारा 2011 में सत्ता छोड़ने के बाद काहिरा में कल का दिन सबसे खून खराबे वाला था, जब विद्रोहियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष में 51 व्यक्तियों की मौत हुई और 435 अन्य घायल हुए.


मिस्र
में सेना का समर्थन करने वाली परंपरावादी इस्लामी पार्टी अल नूर ने नरसंहारके विरोध में कहा है कि वह नई सरकार बनाने के लिये हो रही बातचीत से खुद को अलग कर रही है. अहराम ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक कल रात से प्रभावी हुई घोषणा में 33 अनुच्छेद हैं. यह घोषणा निलंबित संविधान की जगह लेगा.

अस्थायी चार्टर के मुताबिक राष्ट्रपति, कैबिनेट के साथ विधायी अधिकार रखते हैं जिसकी एक अनिवार्य सलाहकार की भूमिका होगी.विधायी अधिकार संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को स्थानांतरित किया जायेगा जिसे अभी चुना जाना बाकी है.

अधिघोषणा के अनुसार राष्ट्रपति राज्य नीति और बजट को स्वीकृत करने के हकदार होगे. मुस्लिम ब्रदरहुड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस घोषणा की निंदा की है.

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