ePaper

भारतीय कम जर्मन ज्यादा

Updated at : 16 Sep 2015 9:18 AM (IST)
विज्ञापन
भारतीय कम जर्मन ज्यादा

बॉन में मेयर का चुनाव जीत कर श्रीधरन ने रचा इतिहास जर्मनी के शहर बॉन में मेयर का चुनाव जीत कर अशोक आलेक्सांडर श्रीधरन ने इतिहास तो रचा है, लेकिन इसलिए नहीं कि वह भारतीय मूल के हैं, बल्कि इसलिए कि पहली बार जर्मनी में किसी आप्रवासी ने यह पद संभाला है. आप्रवासियों के प्रति […]

विज्ञापन
बॉन में मेयर का चुनाव जीत कर श्रीधरन ने रचा इतिहास
जर्मनी के शहर बॉन में मेयर का चुनाव जीत कर अशोक आलेक्सांडर श्रीधरन ने इतिहास तो रचा है, लेकिन इसलिए नहीं कि वह भारतीय मूल के हैं, बल्कि इसलिए कि पहली बार जर्मनी में किसी आप्रवासी ने यह पद संभाला है. आप्रवासियों के प्रति बढ़ते असंतोष के माहौल में यह मायने रखता है.
जर्मनी की पूर्व राजधानी बॉन में 21 साल बाद सीडीयू पार्टी यानी क्रिस्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन ने जीत हासिल की है. अब तक यहां एसपीडी यानि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के ही उम्मीदवार मेयर के पद पर रहे हैं. सीडीयू चांसलर अंगेला मैर्केल की पार्टी है.
सीडीयू के अशोक आलेक्सांडर श्रीधरन को रविवार को हुए चुनावों में 50.06 प्रतिशत वोटों के साथ जीत हासिल हुई. एक भारतीय का जर्मनी में मेयर बनना काफी सुर्खियां बटोर रहा है. लेकिन भारतीय मीडिया के दावों के विपरीत श्रीधरन खुद को भारतीय कम और ज्यादा जर्मन मानते हैं.
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार में उनके भारतीय मूल का कोई महत्व नहीं रहा, “मेरे लिए यह कोई मायने नहीं रखता. मैंने इस बारे में सोचा तक नहीं क्योंकि चुनाव से इसका (भारतीय मूल) का कोई लेना देना
नहीं था.
यह अच्छी बात है कि भारत में लोग इस बात में रुचि दिखा रहे हैं कि किसने बॉन में मेयर का चुनाव जीता है. मुझे लगता है कि इस तरह से बॉन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा लोग पहचानने लगेंगे़ यह हमारे लिए अच्छा ही है.” श्रीधरन का कहना है कि क्योंकि बॉन में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हैं, इसलिए भारत में मिल रही प्रसिद्धि बॉन के लिए फायदेमंद साबित होगी.
बॉन की ब्रैंडिंग
चुनाव से पहले भी श्रीधरन बॉन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की बात करते रहे हैं. अब वे शहर की ब्रैंडिंग करने की तैयारी में हैं. कहते हैं- “हमें बॉन के लिए एक पहचान की जरूरत है और मैं बॉन को बेठोफेन की नगरी के रूप में दुनिया भर में मशहूर करना चाहता हूं.” जानेमाने संगीतकार लुडविष फान बेठोफेन का जन्म 18वीं सदी में बॉन में ही हुआ था.
श्रीधरन को यकीन है कि अपनी मेहनत के बल पर वे ऐसा कर पायेंगे. चुनाव में जीत के पीछे भी वे अपनी इसी लगन को देखते हैं, “मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए मुमकिन हो पाया क्योंकि मैं बहुत से सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूद रहा और जितना हो सका मैंने बॉन में लोगों को खुद को जानने का मौका दिया. जाहिर है, यह काम कर गया.”
कौन हैं श्रीधरन
अपने चुनाव प्रचार में उन्होंने खुद को ‘बॉन का बेटा’ कह कर प्रस्तुत किया. श्रीधरन के पिता भारतीय हैं और मां जर्मन. 1950 के दशक में उनके पिता भारतीय राजनयिक के पद पर जर्मनी आए. 1965 में अशोक श्रीधरन का जन्म हुआ. स्कूल और िव िव की शिक्षा भी उन्होंने बॉन ही में प्राप्त की. वह कैथोलिक ईसाई हैं, इसीलिए उनके नाम के बीच ईसाई नाम आलेक्सांडर मौजूद है.
(दोयचे वेले से साभार)
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola