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भाजपा के हो गये ‘बड़े भैया’

Updated at : 11 Nov 2014 7:31 AM (IST)
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भाजपा के हो गये ‘बड़े भैया’

।।अनुराग कश्यप।। ‘बड़े भैया ’ हर दल, हर मुख्यमंत्री के चहेते रहे हैं. उनके बारे में कहावत है कि जैसे दामोदर नदी कोयला खदानों तक पहुंचती है, वैसे ही बड़े भैया पुलिस की अपनी पोस्टिंग में कोयलांचल में बड़ी जगह पाते रहे हैं. इन दिनों भाजपा की हवा है, इसलिए भाजपा का टिकट पाने को […]

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।।अनुराग कश्यप।।

‘बड़े भैया ’ हर दल, हर मुख्यमंत्री के चहेते रहे हैं. उनके बारे में कहावत है कि जैसे दामोदर नदी कोयला खदानों तक पहुंचती है, वैसे ही बड़े भैया पुलिस की अपनी पोस्टिंग में कोयलांचल में बड़ी जगह पाते रहे हैं. इन दिनों भाजपा की हवा है, इसलिए भाजपा का टिकट पाने को बेचैन थे. भाजपा में एक वर्ग ने विरोध में आवाज उठायी, तो पता चला कि वह दूसरे दलों के संपर्क में भी हैं.
हर दल का बड़ा नेता बड़े भैया से कई मामलों में उपकृत होता रहा है. अंतत: भाजपा के शीर्ष नेताओं को समझा कर टिकट लेने में कामयाब हो गये बड़े भैया. टिकट बांटने के पहले यह बात उड़ी थी कि भाजपा सिर्फ स्वच्छ छवि वालों को ही टिकट देगी. इससे लगा था कि बड़े भैया को इस बार भी भाजपा किनारे करेगी. लेकिन उनकी उम्मीद उस दिन बढ़ गयी जब उनके जैसे ही एक और बड़े भैया को भाजपा ने मैदान में उतार दिया. इससे उनका रास्ता खुल गया. यह मत पूछिए कि ये बड़े भैया हैं कौन? खुद अंदाजा लगा लीजिए.
यह सही है कि हर किसी को चुनाव लड़ने का हक है. इसलिए तो बड़े-बड़े अधिकारी भी इस्तीफा देकर, वीआरएस लेकर टिकट के लिए दौड़ते रहे. लोकसभा में भी कुछ को टिकट मिला था. यह किसी एक दल में नहीं, बल्किहर दल में चल रहा है. हाल ही में कई आला अफसर धड़ाधड़ अपनी बची-खुची नौकरी छोड़ भाजपा में आये. एक आइएएस भी थे जिन्हें पार्टी ने टिकट दिया. बड़े भैया ने भी नौकरी छोड़ी. वह पहले ही नौकरी छोड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट की गारंटी नहीं मिली थी. लोकसभा चुनाव में उन पर भाजपा के एक समर्पित नेता भारी पड़े और उनका टिकट कट गया था. पर बड़े भैया ने हिम्मत नहीं हारी. उम्मीद नहीं छोड़ी. उन्हें कई झारखंड नामधारी पार्टियों ने टिकट का खुला ऑफर दे रखा था, मगर वह कोई खतरा नहीं चाहते थे. वे ‘नमो लहर’ पर सवार होकर विधानसभा पहुंचने की तैयारी में जुटे रहे. इसके लिए लगातार दिल्ली में कैंप किये रहे. अंतत: कामयाबी मिली.
यह जान लें कि बड़े भैया के एक छोटे भाई भी हैं. सगे भले न हों, लेकिन इनमें भाई जैसा प्यार है, दोस्ती है. इन्हें छोटे भैया कह सकते हैं. दोनों नौकरी में थे. इनकी दोस्ती का उदाहरण दिया जाता था. एक भाई की पृष्ठभूमि बिहार है, तो दूसरे की झारखंड. बड़े भैया बाजी मार ले गये. छोटे भैया को निराशा हाथ लगी. बड़े भैया नौकरी के दौरान भी छोटे भैया का ख्याल रखते थे. पोस्टिंग के दौरान दिक्कत न हो, खराब जगह न ठेल दिया जाये, इसका पूरा ख्याल रखते थे. कोयला क्षेत्र में पोस्टिंग
के दौरान बड़े भैया पर गंभीर आरोप भी लगे. लेकिन नेताओं से गहरे और करीबी संबंध होने के नाते उनका कुछ नहीं बिगड़ा. अब तो वे प्रत्याशी भी बन गये हैं. बड़े भैया के सत्ता में बैठे नेताओं से तगड़े संबंध थे. पुलिस महकमे में चर्चा होती थी कि जुगाड़ हो तो बड़े भैया जैसा. प्रमोशन हो या पोस्टिंग, उनकी जम कर चलती थी, उनका ख्याल रखा जाता था. वह बिहार की एक ऊंची जाति से आते हैं. अविभाजित बिहार के जमाने में जब सरकार व शासन तंत्र में ऊंची जाति के ऑफिसर शंटिंग में थे, तब भी उनकी पोस्टिंग जिले में होती थी, कोयलांचल में होती थी. कोई समझ नहीं सका कि बड़े भैया के साथ कौन खड़ा रहता था. जब बिहार का बंटवारा हो गया, झारखंड राज्य बन गया, तो बड़े भैया ने बिहार नहीं, बल्किझारखंड कैडर चुना. इसे कहते हैं दूरदृष्टि. उनके निर्णय पर लोग आश्चर्य में पड़ गये थे, लेकिन अब उनकी दूरदर्शिता पर दाद दे रहे हैं.
झारखंड के नेताओं पर भी उनका जादू चला. झारखंडी नामधारी पार्टियों से लेकर राष्ट्रीय पार्टियों तक के, सूबे के बड़े नेताओं तक उनकी पहुंच है. यही वजह है कि झारखंड गठन के बीते 14 वर्षो के दौरान नौ मुख्यमंत्री बदले और तीन बार राष्ट्रपति शासन लगा, मगर बड़े भैया हर शासन में जिले में अपनी पोस्टिंग कराने में कामयाब रहे. यही नहीं सूबे के कोयला क्षेत्र में एक वरीय अधिकारी की पोस्ट चार महीने तक इसलिए खाली रखी गयी, ताकिप्रोन्नति देकर उन्हें वहां बैठाया जा सके. हरा झंडा हो, लाल झंडा हो या फिर भगवा, बड़े भैया सारे झंडे उठाने में उस्ताद हैं.
आरोप है कि सरकारी सेवा में रहते हुए बड़े भैया ने कई ऐसे कार्य किये, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला. उनके कार्यकाल में कोयला क्षेत्र में कोयले का अवैध कारोबार बढ़ा. आरोप तो यह भी है कि उनके कार्यकाल में 300 से अधिक कुआंनुमा अवैध कोयला खदानें खुलीं. कोयले का अवैध धंधा करनेवालों से उनकी नजदीकी होने के भी आरोप लगे. उनके विरोधियों ने भाजपा के शीर्ष नेताओं तक इन बातों को पहुंचाया भी, लेकिन भाजपा नेताओं पर इसका असर नहीं पड़ा. अब बड़े भैया विधानसभा जाने की तैयारी में जुट गये हैं.
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