क्या है डेमोग्राफिक चेंज? 3 प्वाइंट में समझें, संभल हिंसा पर सौंपी गई रिपोर्ट में इसपर क्यों हुई है चर्चा

Edited by Rajneesh Anand
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क्या है डेमोग्राफिक चेंज

Demographic Change : डेमोग्राफी का अर्थ होता है जनसांख्यिकी यानी जनसंख्या का पूर्ण विवरण. इसके जरिए सरकार अपनी नीतियां बनाती हैं और देश को विकास की ओर लेकर जाती हैं. यह तो हुई आदर्श स्थिति, वर्तमान में डेमोग्राफी का इस्तेमाल राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए करते हैं, क्योंकि उन्हें डेमोग्राफी के आधार पर ही अपने वोटबैंक की जानकारी मिलती है और उनका शासन में आना या ना आना तय होता है. इतिहास की बात करें तो 19वीं सदी में बोहेमिया और मोराविया के यहूदियों के बीच डेमोग्राफी चेंज सबसे पहले देखा गया था. वे बेहतर जीवन जीते थे यानी वे स्वच्छता का पालन करते थे और उनके पास स्वास्थ्य सुविधाएं भी थीं, जिसकी वजह से उनमें मृत्यु दर घटा और उन्होंने अपने प्रजनन दर को कम रखा, जिससे यहूदियों की संख्या घटने लगी, जबकि उनके आसपास रहने वाले अन्य ईसाइयों की संख्या बढ़ती जा रही थी.

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Demographic Change : 2024 में हुई संभल हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक पैनल ने अपनी 450 पेजों की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है. सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस रिपोर्ट में संभल में हो रहे डेमोग्राफिक चेंज पर व्यापक चर्चा की गई है. संभल हिंसा की जांच के लिए सरकार ने 28 नवंबर 2024 को न्यायिक आयोग का गठन किया था. इस आयोग ने कई बार संभल का दौरा किया और पीड़ितों से बातचीत के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है. खैर ये तो हुई संभल हिंसा पर तैयार रिपोर्ट की बात, यहां गौर करने वाली बात यह है कि संभल हिंसा में डेमोग्राफिक चेंज की बात कही गई है. डेमोग्राफिक चेंज की बात पिछले कुछ वर्षों से देश में खासा चर्चा का विषय बना हुआ है? आइए समझते हैं क्या है डेमोग्राफी चेंज और इसका देश की राजनीति पर क्या पड़ता है प्रभाव?

क्या है डेमोग्राफी?

डेमोग्राफी का अर्थ होता है किसी खास क्षेत्र, देश या राज्य की जनसंख्या का वैज्ञानिक अध्ययन. इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि उस खास क्षेत्र में रहने वालों की जनसंख्या कितनी है, वे कहां रहते हैं, उनकी उम्र कितनी है? इसके साथ ही डेमोग्राफी के जरिए निवासियों की जाति, धर्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रवास और जन्म-मृत्यु जैसी चीजों की जानकारी भी एकत्र की जाती है और उसका अध्ययन किया जाता है. डेमोग्राफी में किए जाने वाले अध्ययन इस प्रकार हैं-

  • जनसंख्या की गिनती (Size of Population) – कुल लोग कितने लोग हैं.
  • जनसंख्या का वितरण (Distribution) – आबादी कहां-कहां रहती है, जैसे शहर, गांव, पहाड़, मैदान.
  • जनसंख्या की संरचना (Structure) – उम्र, लिंग, धर्म, भाषा, शिक्षा, रोजगार .
  • जनसंख्या की गति (Dynamics) – जन्म दर, मृत्यु दर, प्रवास, प्रजनन दर.
  • जनसंख्या का रुझान (Trends) – जनसंख्या में हो रहे बदलाव की जानकारी जैसे आबादी में युवा बढ़ रहे हैं या वृद्ध.

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डेमोग्राफी का महत्व क्या है?

सरकार जनगणना इसलिए कराती है कि उसे यह पता चले कि देश की जनसंख्या का उसे पता चले. इसकी वजह यह है कि सरकार जनसंख्या के आधार पर नीतियों का निर्माण करती है. अगर जनसंख्या में युवाओं की जनसंख्या अधिक होगी, तो सरकार को रोजगार केंद्रित और शिक्षा आधारित नीतियों की जरूरत होगी, लेकिन अगर वृद्ध ज्यादा होंगे, तो स्वास्थ्य और पेंशन पर फोकस करना होगा. आबादी में युवाओं का अधिक होना देश के लिए अच्छा होता है क्योंकि इससे वर्कफोर्स बढ़ता है. समाज और राजनीति पर भी डेमोग्राफी का असर दिखता है, क्योंकि जिस समुदाय या वर्ग का प्रतिनिधित्व अधिक होगा, देश और समाज का चेहरा भी उसी के अनुसार बदलता रहेगा. राजनीति पर भी इसका व्यापक असर होता है क्योंकि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में संख्याबल का महत्व बहुत अधिक है.

डेमोग्राफी चेंज का अर्थ?

Demographic Change
डेमोग्राफिक चेंज

डेमोग्राफी में बदलाव स्वाभाविक है, क्योंकि समय के साथ देश की जनसंख्या में बदलाव होगा ही. जन्मदर-मृत्यु और जीवन प्रत्याशा के असर से किसी क्षेत्र में आबादी बढ़ती,घटती रहती है. सरकार अगर शिक्षा पर जोर देगी तो जनसंख्या शिक्षित होगी, उनका स्वास्थ्य बेहतर होगा. जन्म-मृत्यु दर के प्रभाव से युवाओं और वृद्धों की संख्या में बदलाव होता रहता है. कहने का आशय यह है कि यह सामान्य बातें हैं, लेकिन विगत कुछ समय से जिस डेमोग्राफी चेंज की बात हो रही है, वह एक खास समुदाय की जनसंख्या बढ़ने और दूसरे की घटने को लेकर है. असम, बिहार, झारखंड, बंगाल और यूपी जैसे राज्यों में इसी तरह की डेमोग्राफी चेंज की बात हो रही है. कहा यह जा रहा है कि सीमाई इलाकों में बांग्लादेशी मुसलमान हमारे देश में प्रवेश कर रहे हैं और यहां के स्थानीय लोगों से विवाह कर उनका धर्म परिवर्तन करा रहे हैं और अपनी संख्या में वृद्धि कर रहे हैं. उनकी इस हरकत से खास क्षेत्रों में डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव आया है, जिसने वहां के समाज और राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाला है. जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को मुसलमानों द्वारा दरकिनार किए जाने के मसले पर भी वो ध्यान दिलाते हैं और कहते हैं कि डेमोग्राफी चेंज की वजह से राजनीति प्रभावित है. वे डेमोग्राफी में इस बदलाव को सुनियोजित कहना चाहते हैं. जैसे कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि 1951 में प्रदेश में मुस्लिम आबादी सिर्फ 12% थी, जो अब 40% हो गई है. इसी तरह बंगाल और अन्य राज्यों के लिए भी कहा जा रहा है.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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