Rajiv Gandhi : मुंबई में जन्म श्रीपेरंबदूर में हत्या, राजीव गांधी के जीवन से जुड़ी इन 6 बातों को जानिए
राजीव गांधी की 81वीं जयंती
Rajiv Gandhi : राजीव गांधी कांग्रेस पार्टी के संभवत: अंतिम ऐसे नेता थे, जिनके प्रति जनता में आकर्षण था. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले राजीव गांधी भी आतंकवाद के शिकार बन गए थे. हालांकि वे राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखते थे, लेकिन उनकी नियति उन्हें राजनीति में खींच लाई और संजय गांधी की सीट अमेठी से सांसद बनने के बाद वे 1984 में देश के प्रधानमंत्री भी बने. 20 अगस्त उनका जन्मदिवस है, इस अवसर पर उनके जीवन की कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में पढ़ें.
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Rajiv Gandhi : राजीव गांधी भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे, उन्होंने महज 40 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री का पद संभाला था. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी, हालांकि उनकी रुचि राजनीति में नहीं थी और वे एक तरह से बेमन से ही राजनीति में आए थे. सोनिया गांधी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया है कि मैं नहीं चाहती थी कि राजीव गांधी राजनीति में आएं, तब उन्होंने यह कहा था कि मैं इच्छा से नहीं देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने के लिए राजनीति में आया हूं. ऐसे प्रधानमंत्री की 20 अगस्त को जयंती है, वे अगर जीवित होते तो अपना 81वां जन्मदिवस मनाते, लेकिन यह दुर्भाग्य ही है कि सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाला यह शख्स महज 47 साल की उम्र में आतंकवादी षडयंत्र का निशाना बना और इस दुनिया से विदा हो गया.
राजीव गांधी का जन्म मुंबई में हुआ था
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाती राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को तब हुआ था जब उनके पिता फिरोज गांधी और नाना जवाहरलाल नेहरू दोनों ही जेल में थे. वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में बताया कि राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त, 1944 को बंबई के कुम्बाला हिल अस्पताल में हुआ था. उस वक्त इंदिरा गांधी के साथ उनकी बुआ कृष्णा नेहरू हठीसिंह थी, जो जवाहरलाल नेहरू की छोटी बहन थीं. हालांकि फिरोज गांधी राजीव गांधी के जन्म से पहले जेल से रिहा हो गए थे, लेकिन राजीव का जन्म मुंबई में ही हुआ था. पंडित नेहरू जो अपने नाती के जन्म से बहुत खुश थे, क्योंकि उनके परिवार में एक नया सदस्य आया था वो लगभग 10 महीने तक अपने बच्चे से नहीं मिल पाए थे.
पंडित नेहरू ने कमला नेहरू की याद में नाती को दिया था राजीव नाम

राजीव गांधी की जन्म से पहले उनकी नानी कमला नेहरू का निधन हो गया था. जब इंदिरा गांधी ने पुत्र को जन्म दिया, तो पंडित नेहरू ने उसे नाम दिया-राजीव. राजीव का अर्थ होता है कमल. कमला नेहरू को ध्यान में रखते हुए ही पंडित नेहरू ने राजीव को यह नाम दिया था. उन्होंने राजीव गांधी का पूरा नाम रखा था राजीव रत्न, रत्न और जवाहर का अर्थ एक ही होता है. इस तरह से यह कहा जा सकता है कि राजीव गांधी को उनका नाम अपने नाना-नानी के नाम पर मिला था. पंडित नेहरू ने राजीव को एक और नाम दिया था-बिरजीस जो फारसी भाषा से था.बिरजीस का अर्थ होता है देवताओं का राजा.
फिरोज गांधी से था गहरा लगाव
बर्टिल फॉक जो एक स्वीडिश पत्रकार थे अपनी किताब -Feroze: The Forgotten Gandhi में लिखते हैं कि राजीव गांधी के साथ उनके पिता बहुत स्नेह रखते हैं. वे राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते थे, लेकिन अपनी व्यस्त दिनचर्या में से अपने दोनों बेटों के लिए समय निकालते थे. वे अपने दोनों बेटों को मशीनों से अवगत कराते थे, उन्हें उसी तरह के खिलौने लाकर देते थे, जिनसे इंजीनियरिंग की तरह उनका रुझान हो. राजीव एक जिज्ञासु मन और यांत्रिक खिलौनों और गैजेट्स में रुचि के साथ बड़े हुए. उनका अपने पिता से बहुत मधुर संबंध था, जबकि धीरे-धीरे उनके माता-पिता के संबंधों में दुराव हो रहा था, लेकिन उसका असर बच्चों की परवरिश पर नहीं आया था. जब राजीव महज 16 साल के थे, तो फिरोज गांधी का निधन हो गया था.
राजीव के जीवन में सोनिया गांधी
राजीव गांधी के जीवन में सोनिया गांधी एक सच्ची साथी और प्रेमिका के रूप में आईं थीं. उन्होंने आजीवन एक सच्ची साथी की भूमिका निभाई. इन दोनों की पहचान कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई थी और 1968 में इनकी शादी हुई. राजीव और सोनिया गांधी के दो बच्चे हुए. सोनिया गांधी जो एक विदेशी मूल की महिला हैं, बावजूद इसके उन्होंने राजीव गांधी के लिए भारतीय संस्कारों को अपनाया.
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इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव बने प्रधानमंत्री
राजीव गांधी की राजनीति में रुचि नहीं थे. वे एक पायलट थे, लेकिन संजय गांधी की मौत के बाद उन्हें राजनीति में कदम रखना पड़ा. राजनीति में आने का फैसला उन्होंने बेमन से ही किया था और 31 अक्तूबर 1984 को वे परिस्थितिवश भारत के प्रधानमंत्री बने थे. उस दिन उनकी मां इंदिरा गांधी की हत्या आतंकवादियों ने कर दी थी. उसी दिन उनकी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की सहमति से राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी.उस समय राजीव गांधी केवल 40 वर्ष के थे.
लिट्टे की सुसाइड बॉम्बर ने की राजीव गांधी की हत्या
लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे की आत्मघाती हमलावर धनु ने राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कर दी थी. वह राजीव गांधी को फूलों की माला पहनाकर उनके पैर छूने के लिए झुकी थी और उसी समय उसने विस्फोट करके खुद को उड़ा लिया था, इस विस्फोट में राजीव गांधी समेत 16 लोगों की मौत हुई थी. राजीव गांधी ने श्रीलंका में शांति स्थापित करने के लिए भारतीय शांति सेना वहां भेजी थी, जिससे लिट्टे उनका विरोधी बन गया था,इसी विरोध में लिट्टे के आतंकवादियों राजीव गांधी की हत्या कर दी थी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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