PM, CM और मंत्रियों को पद से हटाने वाले बिल में क्या है खास, जानें कैसे यह बदल सकता है राजनीति का चरित्र

Edited by Rajneesh Anand
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में बिल पेश करने के दौरान

130th Amendment Bill 2025 : राजनीति का चरित्र बदलने और उसमें बेईमानी की जगह को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार 130th Amendment Bill 2025 लेकर आई है, जिसका उद्देश्य जनता द्वारा निर्वाचित नेताओं को जनता के प्रति ज्यादा जिम्मेदार और ईमानदार बनाना है. यह दावा सरकार कर रही है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक बहुत ही विवादास्पद है. इस विधेयक में यह व्यवस्था है कि अगर प्रधानमंत्री, मंत्री और मुख्यमंत्री भी आपराधिक मामलों में 30 दिन तक गिरफ्तार या हिरासत में रहते हैं, तो चाहे उन्हें पद से हटाने की सलाह दी जाए या नहीं वे स्वत: 31वें दिन के बाद पद से हट जाएंगे.

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130th Amendment Bill 2025 : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पेश किया. इस विधेयक के पेश होते ही संसद में विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष का कहना है कि जिस पार्टी के पास अपने दम पर सरकार में रहने के लिए बहुमत नहीं है, वो संविधान बदलने की साजिश कर रही है. कांग्रेस पार्टी ने इस विधेयक को राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से ध्यान हटाने की कोशिश बताया है. आखिर इस बिल में ऐसा क्या है कि विपक्ष इतना हमलावर है.

विधेयक में क्या है खास?

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को अपराध के मामले में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तारी या हिरासत में रखने पर पद से हटाने से संबंधित है. विधेयक में यह व्यवस्था की गई है कि अगर किसी मौजूदा मंत्री, मुख्यमंत्री या यहां तक कि प्रधानमंत्री को ऐसे अपराध में लगातार 30 दिन तक गिरफ्तार या हिरासत में रखा जाता है, जिसमें की 5 साल या उससे ज्यादा की जेल है, तो वे एक महीने के भीतर अपना पद खो सकते हैं. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 में प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर अपराध के आरोपों में पद से हटाने का प्रावधान है.

विधेयक से हो सकता है बड़ा कानूनी बदलाव

सरकार यह दावा कर रही है कि यह विधेयक राजनीति में शुचिता लाने के लिए पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य राजनेताओं को ईमानदार और नैतिक रूप से जिम्मेदार बनाना है. इस विधेयक में पद से हटाने के लिए दोषसिद्धि का इंतजार नहीं किया जा रहा है, बल्कि आरोप और गिरफ्तारी की अवधि के आधार पर निर्णय की व्यवस्था की गई है. हां, अपराध में सजा कितनी होगी, इसपर विशेष ध्यान दिया गया है. इस विधेयक के जरिए संविधान के अनुच्छेद 75, अनुच्छेद 164 और अनुच्छेद 239AA में संशोधन किया जाएगा. इस विधेयक के जरिए जो संशोधन किया जा रहा है उसके अनुसार संविधान के अनुच्छेद 75 में, खंड (5) के बाद, यह खंड जोड़ा जाएगा- जिसके अनुसार मंत्रियों को गिरफ्तारी या हिरासत में 30 दिन तक रखे जाने पर राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर संबंधित व्यक्ति को उसके पद से हटा दिया जाएगा. प्रधानमंत्री अगर 31वें दिन तक राष्ट्रपति को ऐसी सलाह नहीं देते हैं, तो अगले दिन से वह व्यक्ति मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं रहेगा. इस विधेयक में प्रधानमंत्री के लिए यह व्यवस्था की गई है कि पद पर रहते हुए अगर लगातार तीस दिनों की गिरफ्तारी या हिरासत का सामना उन्हें करना पड़ता, जिसमें 5 साल की सजा का प्रावधान है, तो 31वें दिन प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा देना होगा अन्यथा अगले दिन से वह प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे. चूंकि वर्तमान में संविधान में ऐसे मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है, जिसे गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तार और हिरासत में रखा गया हो, इसलिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन करने की आवश्यकता है.

विधेयक को पेश करने का उद्देश्य

विपक्ष के भारी विरोध के बाद सरकार ने इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया है, लेकिन सरकार यह दावा कर रही है कि यह बिल राजनीतिक शुचिता के लिए है और इसका लाभ मिलेगा. सरकार का कहना है कि कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि भारत की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. नेताओं और मंत्रियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर केवल जनहित और जन कल्याण के लिए कार्य करें. अगर उनके आपराधिक मामलों में शामिल होने की वजह से जनता की अपेक्षाओं को चोट पहुंचती है, तो यह गलत है.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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